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भविष्य की ऊर्जा का ‘छोटा’ जादूगर: 2D टेल्यूरियम नैनोशीट्स से चमकेगी हरित हाइड्रोजन की राह

चित्र: 2डी टीई नैनोशीट पर चुंबकीय क्षेत्र द्वारा प्रेरित हाइड्रोजन उत्क्रमण। लगाए गए चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में α टीई नैनोशीट की सतह पर अयुग्मित स्पिन हाइड्रोजन गैस के बुलबुले उत्पन्न करते हैं, तथा अधिक प्रबल चुंबकीय क्षेत्र पर इसका प्रदर्शन और बेहतर हो जाता है।

Novel Quasi‑2D tellurium (Te) nanosheets developed offer an unusual approach to controlling magnetism and catalysis in a single material, facilitating indigenous solutions for sustainable hydrogen production impacting future clean‑energy production. As devices shrink, traditional materials are becoming limited in their relevance due to instability and loss of functionality and scientists are looking for materials that can suit the changing needs. Recent predictions and experiments on 2D Te and telluride magnets suggested that breaking inversion symmetry and introducing strain could unlock spin‑orbit‑driven magnetism and ferroelectricity in elemental Te.

 

Edited by- Jyoti Rawat

आज की दुनिया में जैसे-जैसे गैजेट्स का आकार सिमट रहा है, विज्ञान के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे पदार्थों को खोजने की है जो न केवल सूक्ष्म हों, बल्कि अत्यधिक कुशल भी हों। इसी दिशा में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो भारत को स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई दे सकती है।

क्या है यह अनोखी खोज?

वैज्ञानिकों की टीम, जिसमें प्रो. दीपांकर मंडल और उनके पीएचडी छात्र दलिप सैनी शामिल हैं, ने क्वासी 2D $\alpha$-टेल्यूरियम (Te) नैनोशीट्स विकसित की हैं। यह पदार्थ एक ही समय में चुंबकत्व (Magnetism) और उत्प्रेरण (Catalysis) को नियंत्रित करने की अद्भुत क्षमता रखता है। सरल शब्दों में कहें तो, यह एक ऐसा ‘सुपर-मटेरियल’ है जो हाइड्रोजन उत्पादन की प्रक्रिया को क्रांतिकारी ढंग से बदल सकता है।

बदली हुई बनावट, जागे हुए गुण

सामान्यतः ‘बल्क’ टेल्यूरियम में कुछ गुण छिपे या शांत रहते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने जब लिक्विड फेज एक्सफोलिएशन तकनीक के जरिए इसे बेहद पतली परतों (2D नैनोशीट्स) में बदला, तो इसमें जादुई बदलाव देखने को मिले:

सक्रिय इलेक्ट्रॉन स्पिन: शोध में पाया गया कि इन नैनोशीट्स की सतह पर अयुग्मित 5p इलेक्ट्रॉन स्पिन प्रकट हो जाते हैं, जो सामान्य रूप से शांत रहते हैं।

चुंबकत्व का उदय: सतह पर आए ‘स्ट्रेन’ और टूटी हुई ‘इन्वर्ज़न सिमिट्री’ के कारण इस पदार्थ में एक स्वतः स्फूर्त फेरोमैग्नेटिक (चुंबकीय) अवस्था पैदा हो जाती है।

मल्टीफेरोइक शक्ति: यह पदार्थ एक साथ चुंबकीय, विद्युतीय और पाइजोइलेक्ट्रिक प्रतिक्रियाएं देने में सक्षम है। यह दुनिया के उन विरले पदार्थों में से है जो ‘मल्टीफेरोसिटी’ और ‘स्पिन्ट्रॉनिक्स’ को आपस में जोड़ते हैं।

हरित हाइड्रोजन: अब कम बिजली में ज्यादा उत्पादन

इस शोध का सबसे बड़ा प्रभाव हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइज़र पर पड़ेगा। हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन माना जाता है, लेकिन इसे बनाने में बहुत अधिक बिजली खर्च होती है।

मैग्नेटोइलेक्ट्रिक नियंत्रण की मदद से यह नया पदार्थ हाइड्रोजन उत्पन्न करने के लिए आवश्यक वोल्टेज को काफी कम कर देता है। इससे बिजली की खपत घटेगी और हरित हाइड्रोजन का उत्पादन अधिक किफायती और ऊर्जा-दक्ष (Energy Efficient) हो जाएगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर हेल्थकेयर तक: व्यापक भविष्य

‘एडवांस्ड मैटेरियल्स’ पत्रिका में प्रकाशित यह कार्य केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है। इसकी स्थिरता और लचीलेपन के कारण यह तीन बड़े क्षेत्रों में क्रांति ला सकता है:

स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स: कम ऊर्जा खपत वाले मेमोरी डिवाइस और स्मार्ट सेंसर्स का निर्माण।

वियरेबल टेक्नोलॉजी: लचीले और पोर्टेबल होने के कारण इन्हें कपड़ों या शरीर पर पहने जाने वाले सेंसर्स में इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्वास्थ्य निगरानी: रियल-टाइम स्वास्थ्य और पर्यावरणीय निगरानी के लिए उन्नत उपकरणों का विकास।

आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

यह खोज साबित करती है कि हम जटिल चुंबकीय यौगिकों पर निर्भर रहने के बजाय, टेल्यूरियम जैसे मूल तत्वों की संरचना में बदलाव करके भी भविष्य की चुनौतियों का समाधान निकाल सकते हैं। यह न केवल विज्ञान की जीत है, बल्कि सतत और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक सशक्त स्वदेशी कदम है।

नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स का भविष्य: स्मार्ट सेंसर्स और मेमोरी

2D टेल्यूरियम नैनोशीट्स की मल्टीफेरोइक प्रकृति (चुंबकीय और विद्युत गुणों का संगम) इन्हें अगली पीढ़ी के स्मार्ट सेंसर्स के लिए आदर्श बनाती है। इनका उच्च लचीलापन और संवेदनशीलता इन्हें शरीर पर पहने जाने वाले (Wearable) उपकरणों में फिट बैठती है, जो वास्तविक समय में पल्स रेट या पर्यावरणीय विषाक्तता को सटीक रूप से माप सकते हैं।

वहीं, मेमोरी डिवाइस (Spintronics) के क्षेत्र में, यह पदार्थ क्रांतिकारी है। पारंपरिक मेमोरी के विपरीत, इसमें डेटा स्टोर करने के लिए बिजली के बजाय इलेक्ट्रॉन स्पिन का उपयोग होता है। इससे ‘नॉन-वोलाटाइल’ मेमोरी बनाना संभव है, जो न केवल बहुत कम बिजली खपत करती है, बल्कि डेटा प्रोसेसिंग की गति को भी कई गुना बढ़ा देती है। यह तकनीक भविष्य के पोर्टेबल और ऊर्जा-दक्ष कंप्यूटिंग का आधार बनेगी।

 

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