ब्लॉगस्वास्थ्य

स्वस्थ आदतों से 80 की उम्र में भी तेज रह सकता है दिमाग

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. माजिद फोतूही ने बताए छह असरदार उपाय

जयसिंह रावत

उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अन्य अंगों की तरह मस्तिष्क में भी बदलाव होना स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि सही जीवनशैली अपनाई जाए तो दिमाग को लंबे समय तक सक्रिय, स्वस्थ और युवा बनाए रखा जा सकता है। यही संदेश प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट और मस्तिष्क स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. माजिद फोतूही ने दिया है।
अमेरिकी समाचार पत्र The Washington Post में प्रकाशित एक विस्तृत लेख में डॉ. फोतूही ने बताया कि मस्तिष्क का सिकुड़ना या “ब्रेन एट्रोफी” सामान्यतः 30 से 40 वर्ष की आयु के बाद शुरू हो जाता है और 70 वर्ष के बाद इसकी गति तेज हो जाती है। विशेष रूप से मस्तिष्क का फ्रंटल कॉर्टेक्स, जो निर्णय लेने, योजना बनाने और जटिल सोच के लिए जिम्मेदार होता है, तथा हिप्पोकैम्पस, जो स्मृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।


हालांकि उनका कहना है कि यह स्थिति पूरी तरह अपरिवर्तनीय नहीं है। उचित खानपान, व्यायाम, मानसिक सक्रियता और सकारात्मक जीवनशैली के माध्यम से न केवल इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है, बल्कि कई मामलों में मस्तिष्क की क्षमता में सुधार भी संभव है।
डॉ. फोतूही वर्षों से “ब्रेन फिटनेस प्रोग्राम” के माध्यम से हजारों लोगों का मार्गदर्शन कर चुके हैं। उनकी चर्चित पुस्तक The Invincible Brain भी इसी विषय पर आधारित है। उन्होंने मस्तिष्क को स्वस्थ बनाए रखने के लिए छह महत्वपूर्ण आदतों को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी है।
नियमित व्यायाम को बताया सबसे प्रभावी उपाय
डॉ. फोतूही के अनुसार व्यायाम मस्तिष्क के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ता है, ऑक्सीजन और पोषक तत्व बेहतर तरीके से पहुंचते हैं तथा सूजन कम होती है। इसके अलावा व्यायाम से “ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर” यानी बीडीएनएफ नामक प्रोटीन का स्तर बढ़ता है, जो नई तंत्रिका कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं हर सप्ताह 60 से 80 मील तक साइकिल चलाते हैं। इसके अलावा तेज चाल से पैदल चलना, तैराकी, दौड़ना या हल्का वजन उठाना भी दिमाग के लिए लाभकारी माना जाता है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि नियमित व्यायाम से हिप्पोकैम्पस का आकार बढ़ सकता है, जिससे याददाश्त बेहतर होती है और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा 30 से 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लंबे समय तक लगातार बैठे रहना मस्तिष्क और हृदय दोनों के लिए नुकसानदेह है। ऐसे में हर घंटे कुछ मिनट चलना, स्ट्रेचिंग करना और प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट तक तेज चाल से टहलना फायदेमंद हो सकता है।
मेडिटेरेनियन डाइट को माना मस्तिष्क का संरक्षक
डॉ. फोतूही भोजन को मस्तिष्क स्वास्थ्य का दूसरा सबसे बड़ा आधार मानते हैं। वे मेडिटेरेनियन डाइट का पालन करने की सलाह देते हैं, जिसमें ताजे फल, हरी सब्जियां, नट्स, बीन्स, साबुत अनाज, मछली, जैतून का तेल और दही प्रमुख रूप से शामिल होते हैं।
उनके अनुसार प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, अत्यधिक चीनी, जंक फूड और तला-भुना भोजन मस्तिष्क में सूजन बढ़ाने का काम करते हैं। दूसरी ओर पौष्टिक आहार एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करता है, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखता है और मस्तिष्क कोशिकाओं को क्षति से बचाता है।
विशेष रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड को मस्तिष्क के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह मछली, अलसी और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। भारतीय संदर्भ में हल्दी वाला दूध, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, बाजरा, जौ और मौसमी फल भी काफी उपयोगी माने गए हैं।
वे बताते हैं कि दिन की शुरुआत हल्के और पौष्टिक नाश्ते से करनी चाहिए तथा रात का भोजन कम और सुपाच्य होना चाहिए।
अच्छी नींद को बताया दिमाग की सफाई प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मस्तिष्क के लिए अत्यंत आवश्यक है। गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क स्वयं को साफ करता है और अल्जाइमर से जुड़े हानिकारक प्रोटीन बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
डॉ. फोतूही का कहना है कि लगातार कम नींद लेने से तनाव हार्मोन बढ़ते हैं, स्मरण शक्ति कमजोर होती है और एकाग्रता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वे प्रतिदिन सात से आठ घंटे की नींद लेने की सलाह देते हैं।
उनके अनुसार सोने से पहले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाना, कमरे को शांत और अंधेरा रखना तथा नियमित समय पर सोना बेहतर नींद के लिए जरूरी है। यदि किसी को नींद आने में कठिनाई होती है तो शाम का हल्का व्यायाम और ध्यान लाभकारी साबित हो सकता है।
तनाव नियंत्रण और ध्यान को बताया मानसिक सुरक्षा कवच
आधुनिक जीवनशैली में तनाव एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। डॉ. फोतूही के अनुसार लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव मस्तिष्क के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो हिप्पोकैम्पस को प्रभावित करता है और स्मरण शक्ति कमजोर कर सकता है।
वे बताते हैं कि नियमित ध्यान, योग और माइंडफुलनेस जैसी गतिविधियां कोर्टिसोल के स्तर को कम करती हैं और मस्तिष्क की ग्रे मैटर को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।
डॉ. फोतूही स्वयं प्रतिदिन मेडिटेशन करते हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में केवल 10 से 15 मिनट का ध्यान भी मानसिक शांति और फोकस बढ़ाने में मदद कर सकता है। सांसों पर ध्यान केंद्रित करने की सरल प्रक्रिया भी अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
नई चीजें सीखते रहने से सक्रिय रहता है दिमाग
विशेषज्ञों का मानना है कि मस्तिष्क भी शरीर की मांसपेशियों की तरह है, जितना उसका उपयोग होगा, उतना ही वह मजबूत बनेगा। नई भाषा सीखना, संगीत वाद्य बजाना, किताबें पढ़ना, पहेलियां हल करना या नई तकनीक सीखना मस्तिष्क में नए न्यूरल कनेक्शन विकसित करता है।
डॉ. फोतूही बताते हैं कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम याद रखने का अभ्यास करते हैं। इसके अलावा वे नियमित रूप से सुडोकू और क्रॉसवर्ड जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं।
विशेषज्ञ इसे “कॉग्निटिव रिजर्व” बढ़ाने का तरीका मानते हैं, जो उम्र बढ़ने के बावजूद मस्तिष्क को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।
सामाजिक जुड़ाव और सकारात्मक सोच भी जरूरी
डॉ. फोतूही अकेलेपन को मस्तिष्क के लिए गंभीर खतरा मानते हैं। उनका कहना है कि परिवार, मित्रों और समाज से जुड़े रहने वाले लोगों में मानसिक समस्याओं का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है।
बातचीत करना, हंसना, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेना और सकारात्मक सोच बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। वे स्वयं सामाजिक गतिविधियों और नृत्य जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं तथा आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखने पर जोर देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सकारात्मक सोच से शरीर में ऐसे रसायन उत्पन्न होते हैं, जो तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
छोटे बदलावों से मिल सकते हैं बड़े परिणाम
डॉ. फोतूही का कहना है कि इन सभी आदतों को एक साथ अपनाने के बजाय धीरे-धीरे जीवनशैली में शामिल करना अधिक प्रभावी रहता है। पहले सप्ताह में नियमित व्यायाम और ध्यान शुरू किया जा सकता है। इसके बाद खानपान में सुधार और पढ़ने जैसी मानसिक गतिविधियों को जोड़ा जा सकता है।
उनके “ब्रेन फिटनेस प्रोग्राम” में शामिल 80 प्रतिशत से अधिक लोगों में याददाश्त, फोकस और मानसिक स्थिति में सुधार दर्ज किया गया। उनका मानना है कि केवल जीन ही व्यक्ति के भविष्य का निर्धारण नहीं करते, बल्कि उसकी जीवनशैली और आदतें भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं।
स्वस्थ दिमाग के लिए आज से शुरुआत जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण और डिजिटल निर्भरता के इस दौर में मस्तिष्क स्वास्थ्य पर ध्यान देना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।
डॉ. माजिद फोतूही का स्पष्ट संदेश है कि यदि व्यक्ति समय रहते अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव कर ले, तो 80 से 90 वर्ष की आयु तक भी मानसिक रूप से सक्रिय और तेज बना रह सकता है।
सुबह की सैर, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, परिवार के साथ समय और नई चीजें सीखने की आदत न केवल अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के खतरे को कम कर सकती है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बना सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!