उत्तराखंड में सीमा पर्यटन को नई पहचान देगा ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’
शुक्रवार, 29 मई . उत्तराखंड की दुर्गम एवं सुरम्य नीति घाटी में 31 मई और 01 जून 2026 को आयोजित होने वाला ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ राज्य में साहसिक और सीमा पर्यटन को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बनकर उभर रहा है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग और भारतीय सेना के संयुक्त समन्वय से आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, सैन्य-नागरिक सहयोग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की एक दूरदर्शी पहल है।
चमोली जनपद में भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित नीति घाटी अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे हिमालयी भूभाग और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है। हालांकि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित आधारभूत सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र अब तक अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है। ऐसे में ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ जैसे आयोजन इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
अल्ट्रा रन में 75 किमी, 42 किमी, 21 किमी, 10 किमी और 5 किमी की विभिन्न श्रेणियां रखी गई हैं, जिनमें पेशेवर खिलाड़ियों के साथ बड़ी संख्या में शौकिया धावक भी हिस्सा लेंगे। प्रतिभागियों को ऊंचाई वाले कठिन रास्तों, कम ऑक्सीजन स्तर और तेजी से बदलते मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। यही वजह है कि इसे देश की सबसे कठिन सहनशक्ति आधारित दौड़ों में शामिल माना जा रहा है, जहां शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषताओं में नागरिक प्रशासन और भारतीय सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय शामिल है। उच्च हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की लॉजिस्टिक क्षमता, चिकित्सा सुविधाएं और संचालन विशेषज्ञता आयोजन की सफलता में अहम भूमिका निभा रही हैं। टेंट और आवास व्यवस्था से लेकर चिकित्सा सहायता, मार्ग सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन तक सेना की सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। आयोजन के दौरान पर्यटकों और प्रतिभागियों की बढ़ती आवाजाही से होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, भोजन, गाइड सेवाओं और हस्तशिल्प गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे सीमावर्ती गांवों के लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे तथा पलायन जैसी गंभीर समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।
यह पहल केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज’ अवधारणा के अनुरूप भी मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को विकास और पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ना है। मीडिया और साहसिक खेल प्रेमियों का ध्यान आकर्षित कर यह आयोजन नीति घाटी को एक जीवंत, सुरक्षित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन को भी आयोजन का प्रमुख आधार बनाया गया है। आयोजकों द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और प्रतिभागियों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी और घाटी की प्राकृतिक सुंदरता सुरक्षित रह सके।
आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। मार्ग सर्वेक्षण, चिकित्सा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और लॉजिस्टिक तैयारियों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। प्रतिभागियों और स्थानीय समुदायों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि साहस, राष्ट्रीय एकता, सीमावर्ती विकास और उत्तराखंड की संभावनाओं का प्रतीक बनकर सामने आ रहा है। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि खेल और साहसिक गतिविधियां किस प्रकार पर्यटन, स्थानीय विकास और राष्ट्र गौरव को नई ऊर्जा प्रदान कर सकती हैं।

