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चारधाम हेलीकॉप्टर संचालन 2026 का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ

नयी दिल्ली, 28 जून। नागर विमान मंत्रालय ने चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण के दौरान हेलीकॉप्टर संचालन के सुरक्षित और सफल संचालन पर संतोष व्यक्त किया है। यह उपलब्धि यात्रियों के लिए सुरक्षित, निर्बाध और विश्वसनीय हवाई संपर्क सुनिश्चित करने की सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हेलीकॉप्टर संचालन का पहला चरण अप्रैल 2026 में चार धाम यात्रा की शुरुआत के साथ शुरू हुआ और 26 जून 2026 को समाप्त हुआ। इस अवधि के दौरान, प्रतिदिन लगभग 400 हेलीकॉप्टर उड़ानों का संचालन किया गया। कुल 12,032 शटल उड़ानों ने 67,064 तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुगम बनाया, जबकि अतिरिक्त 2,065 चार्टर उड़ानों ने 11,715 तीर्थयात्रियों को सेवाएं दीं, जिससे पूरे चार धाम क्षेत्र में सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल कनेक्टिविटी प्रदान की गई।

इस वर्ष के संचालन के सफल संचालन पर अपने विचार साझा करते हुए, नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित करने को विशेष प्राथमिकता दी है कि चारधाम यात्रा पर जाने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अधिक सुविधा, सहजता और सुरक्षा के साथ यात्रा कर सके। हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक श्रद्धालु यह पवित्र यात्रा पूरी सुरक्षा और पूर्ण विश्वास के साथ संपन्न करे। इस वर्ष की यात्रा शुरू होने से काफी पहले डीजीसीए, हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों और यूकाडा सहित सभी हितधारकों के साथ समन्वय कर विभिन्न स्तरों पर लगातार समीक्षा की गई। व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के सक्रिय सहयोग के लिए मैं उनका विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।”

चारधाम हेलीकॉप्टर संचालन देश के सबसे चुनौतीपूर्ण विमानन क्षेत्रों में से एक में किया जाता है, जहां दुर्गम पहाड़ी भूभाग, तेजी से बदलता मौसम, संकरी घाटियां, सीमित परिचालन समय और हेलीकॉप्टरों की अधिक आवाजाही के कारण अत्यधिक सावधानी, सुदृढ़ परिचालन योजना और कड़े नियामकीय पर्यवेक्षण की आवश्यकता होती है।

हिमालयी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सेवाओं से जुड़ी अनूठी परिचालन चुनौतियों को पहचानते हुए, मंत्रालय ने इस वर्ष के तीर्थयात्रा सीजन की शुरुआत से काफी पहले व्यापक तैयारी शुरू कर दी थी।

नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने परिचालन तत्परता और सुरक्षा तैयारियों का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए व्यक्तिगत रूप से कई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता की। इन बैठकों में नागर विमानन मंत्रालय, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों तथा उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इन बैठकों में परिचालन प्रक्रियाओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल, मौसम संबंधी तैयारियों और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र पर पूर्ण समन्वय सुनिश्चित किया गया।

नागर विमानन मंत्रालय के सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा और उत्तराखंड सरकार के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन की संयुक्त अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यात्रा के लिए व्यापक सुरक्षा ढांचे को अंतिम रूप दिया गया। तीर्थयात्रा के पूरे सीजन में निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए, उनके नेतृत्व में साप्ताहिक समीक्षा बैठकों का एक तंत्र संस्थागत बनाया गया, जिससे परिचालन से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान संभव हो सका।

श्री राम मोहन नायडू ने कहा, “पिछले वर्षों में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बाद हमने हेलीकॉप्टर संचालन के प्रत्येक पहलू की व्यापक समीक्षा की। मूल कारणों की पहचान की गई, नियामकीय निगरानी को मजबूत किया गया, हवाई यातायात समन्वय में सुधार किया गया, परिचालन अवसंरचना को उन्नत किया गया और सभी हितधारकों को एक साझा उद्देश्य, विमानन सुरक्षा के साथ जोड़ा गया।”

मंत्रालय ने एक बहु-स्तरीय सुरक्षा रणनीति अपनाई जिसमें बेहतर हवाई यातायात प्रबंधन, निगरानी, संचार, मौसम की निगरानी, पायलटों की सक्षमता, बुनियादी ढांचे में वृद्धि और परिचालन निरीक्षण शामिल थे।

इस बेहतर सुरक्षा ढांचे के हिस्से के रूप में, भारतीय विमानन प्राधिकरण ने घाटी में व्यवस्थित हेलीकॉप्टर मूवमेंट के लिए समर्पित के-रूट्स (K-Routes) के प्रकाशन में तेजी लाई। एएआई (एएआई) ने हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) और संचार, नौवहन व निगरानी (सीएनएन) कर्मियों को रणनीतिक रूप से तैनात करके सहस्रधारा और सेरसी में हवाई यातायात नियंत्रण सेवाएं शुरू कीं। बद्रीनाथ और केदारनाथ में स्थायी एटीसी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि की पहचान भी की गई है, जबकि हेलीकॉप्टर संचालन के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अंतरिम परिचालन सुविधाएं स्थापित की गई हैं।

परिचालन निगरानी को मजबूत करने के लिए यूकाडा ने महत्वपूर्ण स्थानों पर 33 पीटीजेड (पैन-टिल्ट-ज़ूम) कैमरे लगाए। सहस्रधारा और सीतापुर में दो एकीकृत कमांड, नियंत्रण, संचार एवं समन्वय केंद्र (आईसीसीसीसी) स्थापित किए गए हैं, जहां से हेलीपैड संचालन, हेलीकॉप्टरों की निगरानी और मौसम पर केंद्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के साथ निकट समन्वय के माध्यम से मौसम की निगरानी क्षमताओं में भी काफी वृद्धि की गई है। मौसम की निगरानी को और मजबूत करने के लिए सीतापुर, केदारनाथ, बद्रीनाथ, झाला और खरसाली में पांच स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली (एडब्ल्यूओएस) और सीलोमीटर स्थापित किए गए। हवाई यातायात नियंत्रण अधिकारियों ने सभी हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों को वर्तमान और पूर्वानुमानित मौसम की जानकारी निरंतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया।

चारधाम यात्रा के दौरान संचालित प्रत्येक हेलीकॉप्टर में हेलीकॉप्टर ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया, जिससे आईसीसीसीसी के माध्यम से उनकी लगातार निगरानी संभव हुई। संचार व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए तीन अतिरिक्त वीएचएफ (वेरी हाई फ्रीक्वेंसी) संचार सेट भी खरीदे गए।

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने महत्वपूर्ण हेलीपैडों पर विशेष उड़ान संचालन और एयरवर्थिनेस टीमों की तैनाती कर नियामकीय निगरानी को मजबूत किया। इन टीमों ने लगातार निगरानी, आकस्मिक निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट किए। पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) की भी प्रतिदिन निगरानी की गई ताकि थकान से जुड़े जोखिमों को समाप्त किया जा सके।

हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए डीजीसीए ने पायलटों के लिए योग्यता मानकों को भी और कड़ा किया। चारधाम यात्रा के दौरान उड़ान भरने वाले प्रत्येक पायलट के लिए न्यूनतम 750 घंटे का पर्वतीय उड़ान अनुभव, जिसमें पिछले एक वर्ष में कम से कम 100 घंटे की उड़ान तथा केदारनाथ में कम से कम 10 टेकऑफ और लैंडिंग का अनुभव अनिवार्य किया गया।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई अतिरिक्त परिचालन उपाय भी लागू किए गए। हेलीकॉप्टरों में यात्रियों की संख्या अधिकतम अनुमत क्षमता के 70 प्रतिशत तक सीमित की गई। चार्टर उड़ानों की संख्या पर भी उचित सीमा तय की गई। हाई-टेंशन विद्युत लाइनों पर विमानन सुरक्षा संकेतक और चेतावनी गुब्बारे लगाए गए ताकि पायलटों को बेहतर दृश्यता मिल सके। साथ ही सभी हेलिपैडों पर समान ग्राउंड हैंडलिंग और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू की गई, जिससे यात्रियों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकी।

नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू ने आगे कहा, “विमानन में सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इससे कभी कोई समझौता नहीं हो सकता। हमने सुरक्षा उल्लंघनों के प्रति जीरो-टॉलरेंस (शून्य-सहनशीलता) का दृष्टिकोण अपनाया है। इसके अलावा, जब बात पवित्र चार धाम यात्रा पर जाने वाले लाखों भक्तों से जुड़ी हो, तब सुरक्षा पूरी तरह से अपरिहार्य हो जाती है।”

नागर विमानन मंत्रालय देशभर में हेलीकॉप्टर सुरक्षा को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। देश के सबसे चुनौतीपूर्ण विमानन क्षेत्रों में से एक में चारधाम यात्रा 2026 के पहले चरण का सफल संचालन, सुरक्षा मानकों के प्रति मंत्रालय की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

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