राड़ीबगड़ में ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा रहा गधेरा
–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 5 जुलाई। बरसात की शुरुआत के साथ ही तहसील कार्यालय थराली से सटे राड़ीबगड़ गांव के ग्रामीणों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। पिछले वर्ष हुए भूस्खलन और भू-कटाव का स्थायी उपचार नहीं होने के कारण ग्रामीण भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। गांव के बीच से बहने वाला गधेरा लगातार कटाव कर आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, जिससे कई मकानों और गौशालाओं पर खतरा मंडरा रहा है।
नगर पंचायत थराली के अंतर्गत स्थित राड़ीबगड़ गांव वर्ष 2025 की आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। उस दौरान थराली, चेपड़ों, सबगड़ सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी भूस्खलन और भू-कटाव हुआ था। राड़ीबगड़ में भी कई आवासीय भवन और गौशालाएं खतरे की जद में आ गई थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कई परिवारों को एहतियातन राहत शिविरों में पहुंचाया था। मौसम सामान्य होने के बाद ग्रामीण अपने घर लौट आए, लेकिन खतरा आज भी बरकरार है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बीच से गुजरने वाला गधेरा लगातार भूमि का कटाव कर रहा है और धीरे-धीरे आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। इससे हर बारिश के साथ लोगों की चिंता और बढ़ जाती है। वर्ष 2025 की आपदा के बाद से ग्रामीण लगातार शासन-प्रशासन और सिंचाई विभाग से सुरक्षा दीवार, चेकडैम तथा अन्य सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों के अनुसार दिन तो किसी तरह गुजर जाता है, लेकिन रात में बारिश शुरू होते ही पूरा गांव सतर्क हो जाता है। कई परिवार पूरी रात जागकर हालात पर नजर रखने को मजबूर हैं। उन्हें हर समय आशंका बनी रहती है कि कहीं तेज बारिश के कारण फिर से भूस्खलन या कटाव न हो जाए।
राड़ीबगड़ निवासी जगदीश पंत, दिगंबर पंत, मुन्ना सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि आपदा के बाद उन्होंने कई बार शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों को ज्ञापन देकर गधेरे पर सुरक्षा दीवार और अन्य सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उनका कहना है कि बरसात शुरू होने के साथ ही खतरा फिर सिर पर मंडराने लगा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं किए गए और भविष्य में किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति का नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।
