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गिरते हुए स्पेस टेलीस्कोप को बचाने की जंग: नासा का साहसिक ‘रेस्क्यू मिशन’

केनेथ चांग

नासा (NASA) का एक अनोखा और ऐतिहासिक स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष से सीधे धरती की ओर गिर रहा है। यदि समय रहते इसे नहीं बचाया गया, तो ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों का अध्ययन करने वाली नासा की यह स्विफ्ट वेधशाला’ (Neil Gehrels Swift Observatory) अगले कुछ ही महीनों में पृथ्वी के वायुमंडल में रगड़ खाकर जलकर खाक हो जाएगी।

दो दशकों से भी अधिक समय से यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड की सबसे हिंसक और चरम घटनाओं, जैसे तारों के टूटने और ब्लैक होल के बनने के बाद निकलने वाली चमक (Afterglows) का अध्ययन कर रहा है। वर्ष 2004 में जब ‘स्विफ्ट’ को लॉन्च किया गया था, तब यह पृथ्वी की सतह से लगभग 370 मील (करीब 595 किमी) ऊपर चक्कर लगा रहा था। इतनी ऊँचाई पर वायुमंडल के कण न के बराबर थे, जिससे इसे कोई रुकावट नहीं आ रही थी। लेकिन समय के साथ, धीरे-धीरे इसकी कक्षा (Orbit) नीचे खिसकती चली गई।

अब यह टेलीस्कोप गिरकर महज 210 मील (करीब 338 किमी) की ऊँचाई पर आ गया है। यहाँ वायुमंडल घना है, जिसके घर्षण (Drag) के कारण इसकी गति लगातार धीमी हो रही है। अगर अगले कुछ महीनों में इसे ऊपर नहीं धकेला गया, तो वायुमंडल की घनी परतें इसे चीरकर नष्ट कर देंगी।

अब नासा एक अभूतपूर्व और रोबोटिक रेस्क्यू मिशन के ज़रिये इस टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में ही ‘कैच’ करके वापस एक ऊँची कक्षा में धकेलने (Boost) की तैयारी कर रहा है। स्विफ्ट मिशन के मुख्य अन्वेषक (Principal Investigator) ब्रैड सेंगको कहते हैं, मैं इस मिशन को लेकर सतर्कता के साथ आशान्वित हूँ।”

$30 मिलियन का दांव और एक ‘क्रेजी’ स्टार्टअप

यदि नासा स्विफ्ट का कोई विकल्प (नया टेलीस्कोप) बनाने का फैसला करता, तो इसमें कई साल लग जाते और सैकड़ों मिलियन डॉलर का खर्च आता। इसीलिए नासा ने एरिजोना के फ्लैगस्टाफ के एक छोटे से स्टार्टअप कैटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज’ (Katalyst Space Technologies) को $30 मिलियन (3 करोड़ डॉलर) का अनुबंध सौंपकर एक स्मार्ट दांव खेला है।

कैटालिस्ट ने महज़ 9 महीने के रिकॉर्ड समय में फ्रिज के आकार का एक रेस्क्यू स्पेसक्राफ्ट तैयार किया है, जिसे लिंक’ (Link) नाम दिया गया है। आमतौर पर ऐसे अंतरिक्ष मिशनों को तैयार होने में बरसों लग जाते हैं, लेकिन यहाँ समय की भारी कमी थी।

नासा के एस्ट्रोफिजिक्स डिवीजन के निदेशक शॉन डोमागल-गोल्डमैन ने कहा, अगर हम यह कदम नहीं उठाते, तो स्विफ्ट को खोने का जोखिम 100 फीसदी था। आर्थिक और प्रबंधन के दृष्टिकोण से यह दांव लगाना बिल्कुल सही था। पहले किसी को नहीं लगा था कि यह संभव हो पाएगा।”

सूर्य चक्र (Solar Cycle) ने बढ़ाई मुसीबत

नासा ने शुरुआत में स्विफ्ट टेलीस्कोप को केवल दो साल के जीवनकाल के लिए डिज़ाइन किया था, इसलिए दो दशक बाद इसकी कक्षा को वापस ऊपर उठाने (Orbit Boosting) की कोई आपातकालीन योजना नहीं बनाई गई थी।

इस सैटेलाइट के गिरने की गति को भांपना इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि यह सूर्य के 11 साल के सनस्पॉट चक्र (Sunspot Cycle) पर निर्भर करती है। वर्ष 2024 के अंत में आया सौर चरम (Solar Peak) अनुमान से कहीं अधिक शक्तिशाली था। सूर्य से निकले तीव्र सौर ज्वालाओं (Solar Flares) ने पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को गर्म करके बाहर की ओर फैला दिया, जिससे स्विफ्ट पर वायुमंडलीय घर्षण अचानक बढ़ गया और वह तेज़ी से नीचे गिरने लगा।

नासा के पास नए सिरे से मिशन डिजाइन करने का समय नहीं था, इसलिए उन्होंने ‘कैटालिस्ट’ सहित तीन ऐसी कंपनियों की खोज की जिनके पास ऐसी तकनीक पहले से मौजूद थी। कैटालिस्ट के सीईओ घोन्ही ली (Ghonhee Lee) ने मुस्कुराते हुए कहा, शायद हम ही अकेले ऐसे ‘सनकी’ थे जिन्होंने कहा कि हाँ, इतने कम बजट और समय सीमा में यह काम मुमकिन है।”

कबाड़ से मिला ‘विंग्ड रॉकेट’ और अनोखी लॉन्चिंग

कैटालिस्ट के सामने एक बड़ी चुनौती बजट की थी। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन-9 जैसे रॉकेट की लॉन्चिंग फीस ही नासा द्वारा दिए गए कुल $30 मिलियन के बजट को खत्म कर देती।

ऐसे में कैटालिस्ट ने रक्षा कंपनी नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन (Northrop Grumman) से संपर्क किया। सौभाग्य से, उनके पास 1980 के दशक का एक पुराना पंखों वाला रॉकेट पेगासस’ (Pegasus) लॉन्ग-टर्म स्टोरेज में सुरक्षित मिल गया, जिसे सरकार के किसी दूसरे मिशन के लिए रखा गया था।

‘पेगासस’ रॉकेट की खासियत यह है कि यह किसी लॉन्चपैड से नहीं, बल्कि एक विमान के जरिए लॉन्च होता है। विमान इस रॉकेट को पेट के नीचे बांधकर 40,000 फीट की ऊँचाई तक ले जाता है, और फिर वहाँ से हवा में ड्रॉप करता है, जिसके बाद रॉकेट का इंजन स्टार्ट होता है। विमान के ज़रिये कहीं से भी लॉन्च होने की इस क्षमता ने इस मिशन को जीवनदान दिया, क्योंकि फ्लोरिडा या उत्तरी इलाकों से स्विफ्ट की कक्षा तक पहुँचना सामान्य रॉकेटों के लिए बेहद कठिन था।

कैसे होगा यह ‘अंतरिक्ष रेस्क्यू’?

प्रशांत महासागर के मध्य में स्थित मार्शल द्वीप समूह के क्वाजालीन एटोल (Kwajalein Atoll) से इस रेस्क्यू स्पेसक्राफ्ट ‘लिंक’ को लॉन्च किया जा रहा है। खराब मौसम के कारण इसमें मामूली देरी हुई है।

  • पहला चरण: लॉन्चिंग के बाद कैटालिस्ट के मिशन कंट्रोलर 1-2 हफ्ते ‘लिंक’ के सिस्टम की जांच करेंगे।
  • दूसरा चरण: इसके बाद ‘लिंक’ को गिरते हुए स्विफ्ट टेलीस्कोप के करीब पहुँचने और उसे सुरक्षित रूप से ‘पकड़ने’ (Grab) में करीब डेढ़ महीना लगेगा।
  • तीसरा चरण: पकड़ मजबूत होने के बाद, लिंक अपने इंजनों की मदद से स्विफ्ट को अगले दो महीनों तक धीरे-धीरे ऊपर की ओर धकेलेगा।

योजना के मुताबिक, स्विफ्ट को वर्तमान स्थिति से 100 मील (लगभग 160 किमी) और ऊपर स्थापित कर दिया जाएगा। इस बूस्ट के बाद यह टेलीस्कोप अगले एक दशक (10 साल) तक अंतरिक्ष में सुरक्षित रहकर ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करता रहेगा।

विज्ञान के लिए क्यों ज़रूरी है ‘स्विफ्ट’?

खगोलविदों के लिए स्विफ्ट का बचे रहना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरिक्ष में होने वाले गामा-रे बर्स्ट (Gamma-ray Bursts – GRB) यानी ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली प्रकाश तरंगों का अध्ययन करता है। जब भी अंतरिक्ष में कोई तारा टूटता है या न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं, तो स्विफ्ट तुरंत अपनी दिशा बदलकर उस ओर घूम जाता है और सटीक डेटा जुटाता है।

हाल के वर्षों में गामा-रे बर्स्ट को लेकर वैज्ञानिकों की पुरानी थ्योरी गलत साबित हुई है, जिससे ब्रह्मांड के नियम और जटिल हो गए हैं। वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि स्विफ्ट के नए जीवनकाल से मिलने वाला डेटा खगोल विज्ञान के उन अनसुलझे रहस्यों को खोलेगा, जिन्हें अब तक असंभव माना जाता रहा है।

 

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