जच्चा-बच्चा की मौत की जांच में देरी पर थराली पुल पर धरने पर बैठा पीड़ित परिवार
थराली, 21 जुलाई (हरेन्द्र बिष्ट)। विकासखंड थराली के लेटाल गांव की गर्भवती महिला और उसके नवजात की एंबुलेंस में हुई मौत के मामले की जांच में कथित देरी से नाराज मृतका का पति मंगलवार को अपने दो मासूम बच्चों और मां के साथ थराली मोटर पुल पर धरने पर बैठ गया। इससे करीब आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा। बाद में उपजिलाधिकारी यशवीर सिंह रावत पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और समझा बुझा कर परिवार को तहसील ले गए, जिसके बाद यातायात बहाल हो सका।
गौरतलब है कि 29 जून को लेटाल गांव निवासी गर्भवती सरिता देवी (36), पत्नी नरेंद्र कुमार को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में करीब चार घंटे तक रोकने के बाद हालत बिगड़ने पर उन्हें कर्णप्रयाग रेफर किया गया। हालांकि, कर्णप्रयाग पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में सरिता देवी और नवजात दोनों की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने सीएचसी थराली के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि जिस एंबुलेंस से प्रसूता को रेफर किया गया, उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर तक उपलब्ध नहीं था।
परिजनों का कहना है कि घटना को लंबा समय बीत जाने के बावजूद जांच शुरू नहीं हुई। इसी से क्षुब्ध होकर मृतका के पति नरेंद्र कुमार अपने 14 वर्षीय पुत्र नितिन कुमार, 10 वर्षीय पुत्री नेहा और मां मानी देवी के साथ थराली मोटर पुल पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे पिंडर नदी में छलांग लगाने जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
सूचना मिलने पर उपजिलाधिकारी यशवीर सिंह रावत मौके पर पहुंचे और पुलिस की सहायता से परिवार को तहसील कार्यालय ले गए। वहां नरेंद्र कुमार से वार्ता कर उनकी शिकायतें सुनी गईं।
नरेंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार को उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए फोन कर सीएचसी थराली बुलाया गया था। मंगलवार सुबह वे परिवार सहित अस्पताल पहुंचे, लेकिन जांच टीम वहां नहीं पहुंची। उनका आरोप है कि बार-बार संपर्क करने पर भी जांच दल ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी और उन्हें गुमराह किया जाता रहा। इससे आक्रोशित होकर उन्होंने धरने का निर्णय लिया।
उपजिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता की। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार देर शाम तक थराली पहुंचकर पीड़ित परिवार के बयान दर्ज करने का आश्वासन दिया। अब पीड़ित परिवार जांच पूरी कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है।
