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मेरठ के आसमान में पहली बार सूर्यकिरण का रोमांच, एक लाख से अधिक लोगों ने देखा हवाई प्रदर्शन

 

नौ हॉक विमानों ने पांच मीटर से भी कम फासले पर उड़ान भरकर दिखाए हैरतअंगेज करतब

मेरठ, 21 सितम्बर। भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने पहली बार मेरठ के आसमान में अपने हैरतअंगेज हवाई करतबों से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। 19 और 20 सितम्बर को आयोजित दो दिवसीय हवाई प्रदर्शन को देखने के लिए एक लाख से अधिक लोग पहुंचे। दर्शकों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक शामिल थे।
प्रदर्शन की खास बात यह भी रही कि सूर्यकिरण टीम के तीन सदस्य मेरठ से हैं, जिनमें हवाई करतब दिखाने वाले दो पायलट भी शामिल हैं। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रविवार को प्रदर्शन देखा। उन्होंने इसे अनुशासन, सटीकता, टीम भावना और पेशेवर दक्षता का बेहतरीन समन्वय बताते हुए टीम के साहस और समर्पण की सराहना की। पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सूर्यकिरण के पायलटों की सटीकता और साहस की प्रशंसा की।


सूर्यकिरण टीम ने अपने 2026 के प्रशिक्षण सत्र के सफल समापन के बाद मेरठ में नए विन्यास के साथ प्रदर्शन किया। टीम ने लाल और सफेद रंग के नौ हॉक एमके-132 विमानों के जरिए लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और प्रसिद्ध ‘डीएनए’ सहित कई रोमांचक करतब दिखाए। कई विन्यासों में विमान एक-दूसरे से पांच मीटर से भी कम दूरी पर उड़ते दिखाई दिए। इतनी कम दूरी पर तेज गति से एक साथ उड़ान भरना पायलटों के कौशल, आपसी तालमेल और भरोसे की कठिन परीक्षा माना जाता है।
प्रदर्शन का सबसे आकर्षक दृश्य तब बना जब विमानों ने आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआं छोड़कर तिरंगा उकेरा। इसके लिए हॉक एमके-132 विमानों में विशेष बदलाव किए गए हैं। भारतीय वायु सेना के नाशिक स्थित बेस रिपेयर डिपो ने विमानों में रंगीन धुआं छोड़ने वाले उपकरण लगाए हैं।


हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित हॉक एमके-132 विमानों का इस्तेमाल करने वाली सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का गठन 1996 में हुआ था। यह एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम है। अपने 30 वर्ष के सफर में टीम भारत और विदेशों में 800 से अधिक हवाई प्रदर्शन कर चुकी है। चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में भी टीम भारतीय वायु सेना की पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी है।

भारतीय वायु सेना के ‘दूत’ के रूप में पहचान बना चुकी सूर्यकिरण टीम के प्रदर्शनों का उद्देश्य केवल हवाई कौशल दिखाना नहीं, बल्कि युवाओं को वायु सेना और अन्य रक्षा सेवाओं में करियर के लिए प्रेरित करना भी है। मेरठ में उमड़ी एक लाख से अधिक दर्शकों की भीड़ ने इस आयोजन को शहर के यादगार हवाई प्रदर्शनों में शामिल कर दिया।

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