साढ़े तीन घंटे की सर्जरी में 97 ग्राम का दुर्लभ ओडोन्टोमा निकाला, किशोर को लौटाई मुस्कान
मुरादाबाद, 29 जुलाई। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की टीम ने एक जटिल सर्जरी कर 14 वर्षीय किशोर के जबड़े से 97 ग्राम का दुर्लभ ओडोन्टोमा सफलतापूर्वक निकालकर उसे बड़ी राहत दिलाई। करीब साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में चिकित्सकों ने चेहरे की बनावट, जबड़े की हड्डी और नसों को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर जैसी इस असामान्य वृद्धि को हटाया।
बिजनौर जिले के रानी नांगल गांव निवासी समीर आलम पिछले चार वर्षों से निचले जबड़े के दाहिनी ओर दांत न निकलने और भारीपन की समस्या से परेशान था। दांत नहीं निकलने के कारण उसे कठोर भोजन चबाने में भी कठिनाई होती थी। कई दंत चिकित्सकों को दिखाने के बावजूद बीमारी का सही कारण सामने नहीं आया। बाद में परिजन उसे टीएमयू के डेंटल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां सीटी स्कैन जांच में निचले जबड़े में ओडोन्टोमा होने की पुष्टि हुई।
ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रो. डी.एस. गुप्ता के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन कर 97 ग्राम का ओडोन्टोमा निकाला। चिकित्सकों के अनुसार, इस आकार का ओडोन्टोमा अत्यंत दुर्लभ होता है और ऐसे मामले लगभग तीन प्रतिशत मामलों में ही देखने को मिलते हैं। सामान्यतः यह दांत के आकार का होता है तथा कभी-कभी एक से अधिक भी हो सकता है।
डेंटल कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन ने बताया कि ओडोन्टोमा जबड़े के भीतर दांतों के इनेमल और डेंटिन से बनने वाली एक गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर जैसी वृद्धि होती है। इसका पता अक्सर तब चलता है, जब स्थायी दांत समय पर नहीं निकल पाते। यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो यह बढ़कर जबड़े को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रो. डी.एस. गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2008 से टीएमयू में कार्यरत रहते हुए उन्होंने लगभग एक हजार फेशियल सर्जरी की हैं, लेकिन यह उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण मामला रहा। सर्जरी टीम में डॉ. सौभाग्य अग्रवाल, डॉ. एस.डी. राव और डॉ. शुभम मिश्रा सहित अन्य चिकित्सक शामिल रहे।
