पहली बरसात में ही दरक गया बदरीनाथ मार्ग पर कमेड़ा का ‘ट्रीटमेंट’, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

–दिग्पाल गुसाईं की रिपोर्ट-
गौचर, 30 जुलाई। ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कमेड़ा के पास भू-धंसाव रोकने के लिए किया गया निर्माण कार्य पहली बरसात की मार भी नहीं झेल पाया। सड़क और पुस्ते पर पड़ी दरारों तथा दोबारा शुरू हुए धंसाव ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान के स्थायी उपचार का दावा किया जा रहा था, वहां बारिश शुरू होते ही सड़क के साथ पुस्ता भी दरकने लगा है।
जनपद चमोली के प्रवेश द्वार कमेड़ा पेट्रोल पंप के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से भू-धंसाव की समस्या से जूझ रहा है। इस संवेदनशील स्थान को स्थिर करने के लिए पूर्व में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से भी कई प्रयास किए गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। पिछले कुछ वर्षों से मार्ग के चौड़ीकरण और रखरखाव की जिम्मेदारी एनएचआईडीसीएल के पास है।
एनएचआईडीसीएल के अधीन कार्य कर रही भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस स्थान पर मैठाणा की तर्ज पर ट्रीटमेंट कार्य शुरू किया था। खास बात यह रही कि निर्माण कार्य यात्रा सीजन शुरू होने से कुछ ही दिन पहले शुरू किया गया, जिससे पहले से व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। सड़क की चौड़ाई सीमित होने के कारण एक समय में केवल एक तरफ से वाहनों की आवाजाही हो पा रही थी। नतीजा यह हुआ कि यहां घंटों जाम लगता रहा और यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। यातायात व्यवस्था संभालने में पुलिस को दिनभर मशक्कत करनी पड़ती थी।
किसी तरह करीब एक माह पहले कंपनी ने यहां ट्रीटमेंट कार्य पूरा कर दिया। इसके बाद नई सड़क को देखकर उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुरानी भू-धंसाव की समस्या का अब स्थायी समाधान हो गया है और यात्रियों को इस स्थान पर बार-बार लगने वाले झटकों और जाम से राहत मिलेगी। लेकिन पहली ही बारिश ने इन उम्मीदों पर सवालिया निशान लगा दिया।
बरसात शुरू होते ही सड़क के साथ बना पुस्ता फिर से धंसने लगा और सड़क पर जगह-जगह दरारें उभर आईं। इससे न केवल यातायात की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, बल्कि हाल में किए गए निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहली बरसात में ही सड़क और पुस्ते में दरारें आने लगी हैं तो आने वाले दिनों में लगातार बारिश के बीच स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कमेड़ा के प्रधान मैठाणी का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान लग रहा था कि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा, लेकिन पहली बारिश में ही सड़क और पुस्ते के दरकने से स्थिति ने पूरी तस्वीर सामने ला दी है। उनका कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इतनी जल्दी सड़क और पुस्ते में दरारें क्यों आने लगीं।
वहीं, भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर उस्मान अली का कहना है कि सड़क सिंक हुई है। उन्होंने कहा कि इसे जल्द ठीक कर लिया जाएगा।
अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर किए गए ट्रीटमेंट के बाद यदि पहली बरसात में ही सड़क धंसने और पुस्ते में दरारें पड़ने लगें तो क्या निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच नहीं होनी चाहिए? वर्षों से भू-धंसाव से जूझ रहे इस संवेदनशील स्थान पर महज मरम्मत के बजाय समस्या के स्थायी समाधान और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
