देश में नक्सलवाद का अध्याय समाप्त, अब कोई जिला एलडब्ल्यूई प्रभावित नहीं: केंद्र
नई दिल्ली, 1 अगस्त। केंद्र सरकार ने कहा है कि लगभग छह दशक तक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती रहे वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया गया है। केंद्र के अनुसार, मार्च-अप्रैल 2026 तक देश का कोई भी जिला नक्सल प्रभावित श्रेणी में नहीं बचा है। अब 37 जिलों को केवल ‘लिगेसी एंड थ्रस्ट’ तथा एक जिले को ‘चिंताजनक जिला’ श्रेणी में रखा गया है, जहां सुरक्षा और विकास संबंधी प्रयास कुछ समय तक जारी रहेंगे।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि 2015 में लागू ‘वामपंथी उग्रवाद से निपटने की राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना’ के तहत सुरक्षा, विकास और स्थानीय समुदायों के अधिकारों पर समान रूप से काम किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि अप्रैल 2018 में 126 नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर जुलाई 2021 में 70, अप्रैल 2024 में 38, दिसंबर 2025 में आठ और मार्च-अप्रैल 2026 में शून्य हो गई।
केंद्र सरकार ने बताया कि 2014-15 से अब तक सुरक्षा संबंधी व्यय योजना के तहत राज्यों को 3,805.04 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। पुलिस आधुनिकीकरण और विशेष अवसंरचना के लिए 1,761 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए, जबकि 663 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाए जा चुके हैं। केंद्रीय एजेंसियों को हेलीकॉप्टर और अन्य सुरक्षा सुविधाओं के लिए 1,303.68 करोड़ रुपये दिए गए।
विकास के मोर्चे पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 15,189 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं, 9,497 मोबाइल टावर स्थापित किए गए, 47 आईटीआई, 49 कौशल विकास केंद्र और 179 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोले गए। इसके अलावा 6,025 डाकघरों में बैंकिंग सेवाएं, 1,804 बैंक शाखाएं और 1,321 एटीएम स्थापित किए गए हैं।
सरकार ने बताया कि अब पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों के एक-तिहाई हिस्से को जन सुविधा केंद्रों में बदला जा रहा है, जहां लोगों को कौशल विकास, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही 21.26 लाख से अधिक वनाधिकार पट्टे वितरित किए गए हैं और जनजातीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 2014 से अब तक 37,655 युवाओं को जनजातीय युवा विनिमय कार्यक्रम के तहत देश के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कराया गया है।
केंद्र सरकार का कहना है कि अब उसकी प्राथमिकता पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, सुशासन, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने और पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए नक्सलवाद की पुनरावृत्ति रोकना है।
