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मेक इन इंडिया’ : इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन सात गुना, मोबाइल निर्माण 32 गुना बढ़ा

 

नई दिल्ली, 25 सितंबर। देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, वाहन, औषधि, इस्पात, रेलवे और रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन में 2022-23 से 2025-26 के बीच स्थिर कीमतों पर 10.88 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान विनिर्माण औद्योगिक उत्पादन सूचकांक भी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7 प्रतिशत बढ़ा।

केंद्र सरकार ने 25 सितंबर 2014 को ‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य भारत को विनिर्माण, डिजाइन और नवाचार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना था। बाद में इसे ‘मेक इन इंडिया 2.0’ के रूप में विस्तार दिया गया और अब इसके दायरे में विनिर्माण के 15 तथा सेवा क्षेत्र के 12 सहित कुल 27 क्षेत्र शामिल हैं।

पत्र सूचना कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में मोबाइल फोन उत्पादन करीब 18,900 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, यानी इसमें लगभग 32 गुना वृद्धि हुई। उत्पादन की मात्रा के लिहाज से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है।

वाहन क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में देश में 3.103 करोड़ वाहनों का उत्पादन हुआ, जो 2014-15 की तुलना में करीब 33 प्रतिशत अधिक है। औषधि उद्योग का वार्षिक कारोबार 2025-26 में 5.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जबकि औषधि निर्यात 2.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। चिकित्सा उपकरणों का घरेलू उत्पादन भी 2019-20 के करीब 28 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 41,500 करोड़ रुपये हो गया।

इस्पात उत्पादन में भी लगभग दोगुनी वृद्धि दर्ज हुई है। कच्चे इस्पात का उत्पादन 2014-15 के 8.17 करोड़ टन से बढ़कर 2025-26 में 17 करोड़ टन हो गया। रेलवे ने 2025-26 में 1,674 इंजन और 6,677 आधुनिक एलएचबी कोच बनाए। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन का मूल्य 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया।

देश में सौर उपकरण निर्माण क्षमता में भी तेज विस्तार हुआ है। सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2014 के 2.3 गीगावाट से बढ़कर जून 2026 तक 192 गीगावाट और सौर सेल क्षमता 1.2 गीगावाट से बढ़कर करीब 30 गीगावाट हो गई। अंतरिक्ष उपयोग के लिए स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित करने और दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक के घरेलू निर्माण की दिशा में भी नई क्षमताएं विकसित की गई हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014-15 से 2025-26 के बीच देश में कुल 843 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं के तहत जून 2026 तक 2.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ और 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन एवं बिक्री दर्ज की गई। इन योजनाओं से 14.6 लाख रोजगार सृजित होने का दावा किया गया है। सितंबर 2026 तक करीब 2.54 लाख इकाइयों को स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।

सरकार ने हाल में सेमीकंडक्टर, मोबाइल फोन, औद्योगिक पार्क, विशेष इस्पात और दुर्लभ मृदा चुंबक जैसे क्षेत्रों में नई योजनाएं भी शुरू की हैं। इनमें ‘सेमीकॉन 2.0’ के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक और मोबाइल फोन विनिर्माण योजना के लिए 62,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन प्रयासों का लक्ष्य घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने के साथ भारत की वैश्विक विनिर्माण आपूर्ति शृंखला में हिस्सेदारी मजबूत करना है। �

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