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ब्लैक होल जेट से बदलती आकाशगंगाओं की नियति

Astronomers have identified a mechanism by which supermassive black holes shape galaxy evolution. Beyond a galaxy’s stellar disk lies the vast, diffuse circumgalactic medium (CGM), the primary fuel reservoir for star formation. If all CGM gas cooled and collapsed, galaxies would be far more star-rich than observed. Researchers from Raman Research Institute and Arizona State University found that powerful plasma jets from central black holes inject energy into the CGM along their paths. This heats and ionizes the gas—detected via its distinctive glow—especially at the disk edge and CGM outer boundary, preventing cooling and new star formation, thus regulating galactic growth.

 

 

-ज्योति रावत /आदित्य सिंह 

आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद विशालकाय ब्लैक होल किस तरह अपनी पूरी आकाशगंगा के विकास को प्रभावित करते हैं, इसका एक संभावित वैज्ञानिक तंत्र सामने आया है। भारतीय और अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक दल ने पाया है कि ब्लैक होल से निकलने वाली अत्यंत शक्तिशाली जेट अपने आसपास मौजूद गैस के विशाल भंडार को गर्म और ऊर्जावान बनाकर नए तारों के निर्माण को रोक सकती हैं।

जब हम किसी आकाशगंगा की कल्पना करते हैं तो आमतौर पर धूल और तारों से भरी उसकी सर्पिल संरचना दिखाई देती है। लेकिन आकाशगंगा के चमकीले तारकीय चक्र से काफी बाहर तक फैला गैस का एक बेहद विरल और लगभग अदृश्य आवरण भी होता है। इसे परिगैलेक्टिक माध्यम कहा जाता है। यह गैसीय क्षेत्र आकाशगंगा से 10 से 20 गुना तक बड़े क्षेत्र में फैला हो सकता है और नए तारों के निर्माण के लिए आवश्यक गैस का प्रमुख स्रोत है।

अगर इस क्षेत्र में मौजूद पूरी गैस धीरे-धीरे ठंडी होकर एकत्रित होती और तारों में बदल जाती, तो ऐसी आकाशगंगाएं बननी चाहिए थीं जिनमें असाधारण संख्या में तारे होते। लेकिन ब्रह्मांड में ऐसी अत्यधिक चमकीली और तारों से भरी आकाशगंगाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखाई देतीं। पिछले एक दशक से अधिक समय से खगोल वैज्ञानिक यह संभावना व्यक्त करते रहे हैं कि आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद अतिविशाल ब्लैक होल से निकलने वाली ऊर्जा गैस को ठंडा होकर तारों में बदलने से रोक सकती है। हालांकि यह प्रक्रिया वास्तव में किस तरह काम करती है, इसे लेकर अब तक वैज्ञानिकों में पूरी सहमति नहीं थी।

Fig. An artist’s impression of how relativistic jets launched by the central supermassive black holes (also known as an “active galactic nuclei”/AGN) impact the surrounding gaseous reservoir in a galaxy. Image courtesy: Hailey Nelson, Arizona State University (ASU).

 

ब्लैक होल बेहद छोटे, लेकिन अत्यंत शक्तिशाली

इस प्रक्रिया को समझने के लिए आकार का अंतर महत्वपूर्ण है। एक सामान्य अतिविशाल ब्लैक होल का आकार सौरमंडल के पैमाने का हो सकता है, जबकि उसके आसपास की आकाशगंगा में अरबों तारकीय प्रणालियां मौजूद हो सकती हैं। इसके बावजूद केंद्र में मौजूद यह अपेक्षाकृत छोटा ब्लैक होल अपनी जेट के माध्यम से आकाशगंगा के अत्यंत विशाल गैसीय क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

भारत के रमन अनुसंधान संस्थान और अमेरिका के एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी समेत विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों ने इस संबंध में एक संभावित तंत्र की पहचान की है। रमन अनुसंधान संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संस्थान है।

ब्लैक होल से निकलती हैं अत्यंत शक्तिशाली जेट

ब्लैक होल की चर्चा अक्सर ऐसे खगोलीय पिंड के रूप में होती है जो अपने आसपास की गैस और धूल को अपनी ओर खींच लेता है। लेकिन सक्रिय ब्लैक होल के आसपास की प्रक्रिया का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भी है। वे प्रकाश की गति के निकट वेग से गर्म प्लाज्मा की शक्तिशाली धाराएं, जिन्हें जेट कहा जाता है, अंतरिक्ष में दूर तक भेज सकते हैं। प्लाज्मा आवेशित कणों से बनी अत्यधिक ऊर्जावान अवस्था है।

वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या ये जेट आकाशगंगा के आसपास फैले गैस के विशाल भंडार तक अपना प्रभाव पहुंचाती हैं। अध्ययन के अनुसार, जब ब्लैक होल से निकली जेट पहली बार परिगैलेक्टिक गैस से टकराती है तो वह उसमें ऊर्जा पहुंचाती है। इससे गैस गर्म और ऊर्जावान हो जाती है और उसके ठंडा होकर एकत्रित होने की प्रक्रिया बाधित होती है।

जेट के रास्ते में ही मिला मजबूत संकेत

ऊर्जावान और आयनित गैस विशेष प्रकार का प्रकाश उत्सर्जित करती है। वैज्ञानिकों ने इसी संकेत की तलाश परिगैलेक्टिक माध्यम में की। जब उन्होंने आकाशगंगाओं के चारों ओर सभी दिशाओं से प्राप्त संकेतों का औसत निकाला तो कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला। लेकिन जब उन्होंने ब्लैक होल की जेट की दिशा में गैस का अध्ययन किया तो मजबूत संकेत दिखाई दिया।

अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता और रमन अनुसंधान संस्थान के खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी प्रभाग की सहायक प्रोफेसर नम्रता रॉय के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि जेट ने गैस को सभी दिशाओं में समान रूप से प्रभावित नहीं किया, बल्कि उसका प्रभाव मुख्य रूप से जेट के मार्ग में मौजूद गैस तक सीमित रहा।

वैज्ञानिकों को दो स्थानों पर विशेष रूप से मजबूत संकेत मिले। पहला, तारकीय चक्र के बाहरी किनारे पर, जहां जेट पहली बार परिगैलेक्टिक गैस से टकराती है। दूसरा, इस गैसीय क्षेत्र की बाहरी सीमा पर, जहां धीमी हो चुकी जेट दोबारा आसपास की गैस से टकराती है।

ऊर्जा का जमाव रोकता है तारों का निर्माण

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रक्रिया को किसी कठोर वस्तु से टकराने जैसी स्थिति से समझा जा सकता है। टक्कर के दौरान ऊर्जा का एक हिस्सा आसपास के माध्यम में पहुंचता है। इसी तरह जेट की ऊर्जा गैस में जमा होकर उसे गर्म और ऊर्जावान बनाती है।

आम तौर पर ठंडी गैस गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एकत्रित होकर घनी होती है और अंततः नए तारों का निर्माण करती है। लेकिन जब ब्लैक होल की जेट इस गैस को गर्म और अशांत कर देती है तो गैस का उसी तरह एकत्रित होना कठिन हो जाता है। परिणामस्वरूप नए तारों के निर्माण की दर कम हो सकती है।

इस तरह आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद अपेक्षाकृत छोटा ब्लैक होल अपनी जेट के माध्यम से उससे बहुत बड़े क्षेत्र में फैली गैस को प्रभावित कर सकता है और अंततः आकाशगंगा के विकास की दिशा तय करने वाली प्रक्रियाओं में भूमिका निभा सकता है।

अध्ययन के सह-लेखक और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर संचायिता बोर्थाकुर के अनुसार, इसका व्यापक महत्व यह है कि ब्लैक होल अपने छोटे केंद्रीय क्षेत्र से बहुत दूर तक आकाशगंगाओं के विकास को प्रभावित कर सकते हैं।

इस अध्ययन के निष्कर्ष शोध पत्रिका द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जेट द्वारा छोड़े गए इन संकेतों का अध्ययन यह समझने में मदद कर सकता है कि आकाशगंगाओं में तारों का निर्माण समय के साथ क्यों धीमा पड़ता है और किस तरह उनके केंद्र में मौजूद ब्लैक होल उनकी दीर्घकालिक संरचना और विकास को प्रभावित करते हैं।

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Publication Link: DOI 10.3847/2041-8213/ae9cbd

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