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ब्रह्मांड के रहस्यमय पावरहाउस: ब्लेज़ार से मिले नए एक्स-रे संकेत खोलेंगे आकाशगंगाओं के राज़

चित्र 1: ब्लेज़ार या सक्रिय गांगेय नाभिक का एक चित्रण, जो प्रेक्षक की दृष्टि रेखा के लगभग समानांतर एक शक्तिशाली जेट उत्सर्जित करता है। इस चित्रण में दर्शाए गए रंग केवल कलात्मक उद्देश्यों के लिए हैं। छवि क्रेडिट: नासा

Scientists studied X-ray light from four special galaxies called BL Lac objects that shine brightly in high-energy rays. They used data from two space telescopes, NICER and NuSTAR, looking at 13 different observations of Mrk 421, Mrk 501, PG 1553+113, and PKS 2155-304. Most spectra fit a simple curved model well. But six observations of Mrk 421 and Mrk 501 did not. These happened when the sources were in medium or low brightness. The team thinks extra light from a hot disk around the black hole was present. In four cases of Mrk 421, they also saw a small extra bump of energy between 1.42 and 1.70 keV.

 By- Jyoti and Aditya Rawat

हमारा ब्रह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है, और इनमें से कुछ सबसे बड़े रहस्य हमारी आकाशगंगा के बाहर मौजूद हैं। खगोलशास्त्रियों ने हाल ही में ब्रह्मांड में सर्वाधिक ऊर्जा वाले विकिरण (रेडिएशन) उत्सर्जित करने वाले कुछ खास खगोलीय पिंडों का गहराई से अध्ययन किया है, जिन्हें ‘ब्लेज़ार’ कहा जाता है। इस नए शोध ने अत्यधिक ऊर्जावान पिंडों से निकलने वाले एक्स-रे उत्सर्जन के स्रोतों के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां दी हैं।

यह अध्ययन न केवल इन खगोलीय पिंडों के आसपास की चरम भौतिक परिस्थितियों को समझने में मदद करेगा, बल्कि इस बड़े सवाल का भी जवाब देगा कि सक्रिय आकाशगंगाओं को आखिर इतनी भारी मात्रा में ऊर्जा कहाँ से प्राप्त होती है।

ब्लेज़ार क्या हैं और ये इतने खास क्यों हैं?

इसे समझने के लिए कल्पना कीजिए एक ऐसी सक्रिय आकाशगंगा की, जिसके बिल्कुल केंद्र में एक अतिविशाल ब्लैक होल (Supermassive Black Hole – SMBH) बैठा है। यही ब्लैक होल इस पूरी प्रणाली का ‘इंजन’ है। जब गैस, धूल और अन्य पदार्थ इस ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण की ओर गिरते हैं, तो भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है। इस प्रक्रिया के दौरान, ब्लैक होल प्रकाश की गति के लगभग बराबर चलने वाले कणों के शक्तिशाली ‘जेट’ अंतरिक्ष में छोड़ता है।

ब्लेज़ार की खासियत यह है कि इन जेट्स की दिशा लगभग सीधे हमारी पृथ्वी की ओर होती है। इसी खास ओरिएंटेशन (अभिविन्यास) के कारण ब्लेज़ार हमें अंतरिक्ष में असाधारण रूप से चमकीले दिखाई देते हैं। इन पिंडों का एक विशेष रूप से चरम समूह ‘टीईवी ब्लेज़ार’ (TeV Blazars) कहलाता है, जो टेरा-इलेक्ट्रॉन वोल्ट (अत्यंत उच्च-ऊर्जा) वाली गामा किरणें उत्पन्न करते हैं।

चित्र 2: एमआरके 421 का एमजेडी 60077 के दौरान नाइसर (काला) और न्‍यूस्टार (लाल बिंदु एफपीएमए तथा हरे बिंदु एफपीएमबी को दर्शाते हैं) के संयुक्त रूप से फिट किए गए स्पेक्ट्रम को दिखाया गया है। फिटिंग मॉडल पैनलों में दिखाए गए हैं। (भौमिक और गुप्ता, 2026 के आधार पर)

खगोलशास्त्रियों के सामने बड़ी चुनौती

चूंकि ब्लेज़ार के ये शक्तिशाली जेट लगभग सीधे हमारी पृथ्वी की ओर निर्देशित होते हैं, इसलिए दूरबीनों से प्राप्त उनके एक्स-रे स्पेक्ट्रम में मुख्य रूप से इसी जेट की चमक दिखाई देती है। जेट का यह तेज प्रकाश इतना अधिक होता है कि यह आकाशगंगा के अन्य हिस्सों से आने वाले विकिरण को छिपा देता है—जैसे कि सीधे ब्लैक होल के आसपास घूमने वाली ‘अभिवृद्धि डिस्क’ (Accretion Disk)। इसके चलते ब्लैक होल के ठीक पास मौजूद वातावरण की पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

भारतीय शोधकर्ताओं की अहम कामयाबी

इस बड़ी मुश्किल को हल करने के लिए भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत एक स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज), नैनीताल के शोधकर्ताओं ने बीड़ा उठाया। शोधकर्ता रिया भौमिक और आलोक सी. गुप्ता ने अत्यधिक उच्च-ऊर्जा विकिरण उत्सर्जित करने वाले चार क्लासिकल ब्लेज़ार का चयन किया— एमआरके 421, एमआरके 501, पीजी 1553+113 और पीकेएस 2155-304।

शोधकर्ताओं ने नासा (NASA) की दो बेहतरीन अंतरिक्ष दूरबीनों— नाइसर (NICER) और न्‍यूस्टार (NuSTAR) —से प्राप्त डेटा के 13 सेटों का गहन विश्लेषण किया। नाइसर दूरबीन ने कम-ऊर्जा वाली एक्स-रे का बारीकी से प्रेक्षण किया, जबकि न्‍यूस्टार ने अधिक-ऊर्जा वाली एक्स-रे रेंज को कवर किया। इन दोनों दूरबीनों के डेटा को एक साथ मिलाने से शोधकर्ताओं को इन ऊर्जावान आकाशगंगाओं के व्यवहार की एक बहुत ही व्यापक और स्पष्ट तस्वीर प्राप्त हुई।

जब ‘शांत’ हुए ब्लेज़ार, तो सामने आई नई जानकारी

विश्लेषण के दौरान एक बहुत ही दिलचस्प बात सामने आई। आमतौर पर, अधिकांश एक्स-रे स्पेक्ट्रम को ब्लेज़ार उत्सर्जन के सामान्य मॉडल द्वारा आसानी से समझाया जा सकता था। लेकिन, जब शोधकर्ताओं ने एमआरके 421 और एमआरके 501 नामक ब्लेज़ार का उस समय अध्ययन किया जब वे मध्यम से कम सक्रिय अवस्था (यानी अपेक्षाकृत शांत) में थे, तो कम एक्स-रे ऊर्जा पर एक ‘अतिरिक्त घटक’ दिखाई दिया।

इसका सीधा सा अर्थ यह है कि जब जेट की ताकत थोड़ी कमजोर पड़ी, तब एक्स-रे स्पेक्ट्रम में केवल जेट का ही नहीं, बल्कि ब्लैक होल के चारों ओर मौजूद ‘अभिवृद्धि डिस्क’ (Accretion Disk) से होने वाले उत्सर्जन का भी योगदान देखा गया। एमआरके 421 के मामले में ऐसे साक्ष्य पहले भी मिल चुके हैं, लेकिन एमआरके 501 के लिए अभिवृद्धि डिस्क के योगदान का यह पहला स्पष्ट संकेत है।

इसके अलावा, एमआरके 421 के स्पेक्ट्रम में एक छोटी अतिरिक्त चोटी (गॉसियन घटक) भी दिखाई दी, जो किसी विशेष ऊर्जा पर थोड़े अधिक एक्स-रे विकिरण को दर्शाती है। हालांकि, इसका सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और यह उपकरणों के प्रभाव से भी जुड़ा हो सकता है।

अन्य ब्लेज़ार का व्यवहार और भविष्य का सफर

शोध में शामिल अन्य दो ब्लेज़ार— पीजी 1553+113 और पीकेएस 2155-304 —के एक्स-रे प्रेक्षणों को मानक मॉडल द्वारा अच्छी तरह समझाया जा सका। इनके स्पेक्ट्रम का आकार वक्राकार (Curved) था, जो बताता है कि अलग-अलग ऊर्जा वाले कण भिन्न-भिन्न दरों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं और विकिरण के माध्यम से उसे खो देते हैं।

हाल ही में प्रतिष्ठित जर्नल ‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित यह अध्ययन यह साबित करता है कि ब्लेज़ार के एक्स-रे स्पेक्ट्रम में केवल एक ही विकिरण स्रोत (जेट) का एकाधिकार नहीं होता है। निष्कर्ष साफ तौर पर बताते हैं कि जब शक्तिशाली जेट कमजोर पड़ते हैं, तो ब्लैक होल के करीब मौजूद अभिवृद्धि प्रवाह को भी मापा जा सकता है।

भविष्य में, अलग-अलग तरह की दूरबीनों का उपयोग करके इन पिंडों का तब अध्ययन करना, जब वे सक्रिय और शांत दोनों अवस्थाओं में हों, खगोलशास्त्रियों के लिए ब्रह्मांड के कई और रहस्य खोल सकता है। इससे न केवल सक्रिय आकाशगंगाओं की ऊर्जा का स्रोत समझ में आएगा, बल्कि अतिविशाल ब्लैक होल और उनके आसपास के रहस्यमय पर्यावरण के बीच होने वाली जटिल अंतःक्रियाओं को भी स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

(प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.3847/1538-4357/ae875a)

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