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लंदन के पास समुद्र में 1,500 टन विस्फोटक से भरा जहाज का मलबा बना टाइम बम

 

A salvage crew has been working to stabilize the SS Richard Montgomery, which sank a few months after D-Day in 1944 with 1,500 tons of explosives in her holds.

 

शीयरनेस (इंग्लैंड)। इंग्लैंड में टेम्स नदी के मुहाने के पास समुद्र में पड़ा एक पुराना अमेरिकी सैन्य जहाज पिछले 82 वर्षों से ब्रिटेन के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। एसएस रिचर्ड मोंटगोमेरी नामक इस जहाज के मलबे में द्वितीय विश्व युद्ध के समय के करीब 1,500 टन विस्फोटक होने का अनुमान है। जहाज का ढांचा लगातार कमजोर हो रहा है और अब ब्रिटिश सरकार ने उसके तीन जर्जर मस्तूलों को हटाने का काम शुरू कराया है, ताकि वे मलबे पर गिरकर किसी बड़े हादसे का कारण न बनें।

स्थानीय लोग इस जहाज को संक्षेप में ‘मोंटी’ कहते हैं। यह अमेरिकी सैन्य मालवाहक जहाज अगस्त 1944 में डी-डे के कुछ महीने बाद इंग्लैंड के तट के पास डूब गया था। जहाज ने अपना लंगर खो दिया, रेतीले क्षेत्र में फंस गया और उसमें पानी भरने के बाद डूब गया। उस समय उसके मालखानों में बड़ी मात्रा में विस्फोटक मौजूद था।

मलबे के अंदर अब भी द्वितीय विश्व युद्ध के हजारों हथियार और गोला-बारूद होने की आशंका है। इनमें करीब 2,000 पाउंड वजन वाले भारी बम, विखंडन बम, सफेद फॉस्फोरस वाले धुआं पैदा करने वाले हथियार और दबाव से सक्रिय होने वाले फ्यूज शामिल हैं। इनकी सटीक सूची उपलब्ध नहीं है।

बदलती रेत और तेज ज्वार से बढ़ता खतरा

समुद्र के भीतर इतने लंबे समय तक रहने के कारण जहाज का स्टील ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है। टेम्स के मुहाने पर तेज ज्वार और समुद्र तल की लगातार बदलती रेत स्थिति को और जटिल बनाती है। पुराने विस्फोटक पानी के भीतर भी कुछ परिस्थितियों में सक्रिय हो सकते हैं।

मलबे को स्थिर करने का काम अमेरिकी कंपनी रिजॉल्व मरीन की टीम कर रही है। परियोजना का नेतृत्व नोलन कॉनवे कर रहे हैं। उनके अनुसार, खतरा केवल जहाज के अंदर मौजूद विस्फोटकों से नहीं है, बल्कि उसके आसपास समुद्र तल पर मौजूद संदिग्ध वस्तुओं से भी है। किसी वस्तु के हिलने या टकराने से विस्फोट की स्थिति पैदा हो सकती है।

मलबे के आसपास समुद्र तल पर आधी दबी कई वस्तुएं मिली हैं। इनमें ब्रिटिश नौसेना की छोड़ी हुई रक्षात्मक माइंस और विमानरोधी गोला-बारूद के साथ जर्मनी की ओर से इस्तेमाल किए गए ऐसे बम और माइंस भी हो सकते हैं, जो युद्ध के दौरान नहीं फटे थे।

सबसे खराब स्थिति में सुनामी जैसी लहर का खतरा

ब्रिटिश सरकार के कुछ आकलन सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हालांकि, 1970 में रॉयल मिलिट्री कॉलेज ऑफ साइंस के विशेषज्ञों ने सबसे खराब स्थिति का आकलन करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि जहाज के भीतर मौजूद पूरा विस्फोटक एक साथ फट जाए तो पानी और मलबा करीब 3,000 मीटर की ऊंचाई तक उछल सकता है। इससे करीब पांच मीटर ऊंची सुनामी जैसी लहर पैदा हो सकती है, जो आसपास के शहरों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और तेल-गैस सुविधाओं के लिए खतरा बन सकती है।

ब्रिटिश सरकार ने ऐसे बड़े विस्फोट की संभावना को ‘दूरस्थ’ बताया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि दूरस्थ का अर्थ असंभव नहीं होता।

1967 में ऐसी ही एक घटना ने खतरे को और गंभीर बना दिया था। उस समय साल्वेज टीम ने एक अन्य अमेरिकी निर्मित जहाज एसएस कील्से के मलबे से गोला-बारूद को सुरक्षित करने का प्रयास किया था। अभियान के दौरान विस्फोट हुआ, जिसकी तीव्रता 4.5 की तीव्रता वाले भूकंप के बराबर बताई गई।

इंचों में दिखाई देता है समुद्र का तल

रिचर्ड मोंटगोमेरी के मलबे तक पहुंचना भी सामान्य साल्वेज अभियान जैसा नहीं है। टीम ने रडार, चुंबकीय सर्वेक्षण उपकरण और सोनार की मदद से मलबे तथा उसके आसपास के समुद्र तल का विस्तृत सर्वेक्षण किया है।

साल्वेज टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे मलबे या उसके आसपास मौजूद किसी संदिग्ध वस्तु से टकराए बिना काम करें। पानी के भीतर दृश्यता बेहद कम है। गोताखोर जेफ कॉर्निश के अनुसार, वहां दृश्यता इंचों में मापी जाती है और उन्हें कई बार केवल स्पर्श के आधार पर काम करना पड़ता है।

इसी कारण मस्तूलों को काटने के लिए पारंपरिक उपकरणों के बजाय डायमंड वायर सॉ का इस्तेमाल किया गया। इससे कंपन कम होता है और मलबे को नुकसान पहुंचने या किसी विस्फोटक को सक्रिय करने की आशंका भी घटती है।

इस अभियान के लिए विशेष रूप से तैयार बजरे को समुद्र तल की गाद में तीन मजबूत पैरों के सहारे स्थिर किया गया है। गोताखोर बेहद सावधानी से पानी में उतरते हैं और मलबे के कमजोर डेक पर पैर रखने से बचते हैं।

सक्रिय समुद्री मार्ग के बेहद करीब है मलबा

रिचर्ड मोंटगोमेरी का मलबा तट से कुछ मील दूर और सक्रिय समुद्री मार्ग से केवल कुछ सौ मीटर की दूरी पर है। इस रास्ते से हर साल हजारों जहाज गुजरते हैं। इनमें मालवाहक, कंटेनर जहाज, टगबोट, तरलीकृत प्राकृतिक गैस ले जाने वाले जहाज और लंदन जाने वाले क्रूज जहाज शामिल हैं।

मलबे के चारों ओर प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया गया है और उसे समुद्री संकेतकों से चिह्नित किया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने कई बार इस क्षेत्र में लोगों की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई है। विंडसर्फर्स के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंचने, गोताखोरों के वहां जाने और कम ज्वार के दौरान मछुआरों के मलबे पर पहुंचने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के आपातकालीन योजना विशेषज्ञ डेविड अलेक्जेंडर ने कहा कि यह एक ऐसा जोखिम है जिसका सटीक आकलन करना मुश्किल है, क्योंकि मलबे के भीतर मौजूद विस्फोटकों के बारे में पर्याप्त विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार विस्फोट की संभावना के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है, लेकिन जोखिम को शून्य भी नहीं माना जा सकता।

द्वितीय विश्व युद्ध का तैरता हुआ अवशेष

रिचर्ड मोंटगोमेरी एक ‘लिबर्टी शिप’ था, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उत्तरी अटलांटिक में सैन्य सामग्री पहुंचाने के लिए बनाया गया था। फ्लोरिडा के जैक्सनविले में निर्मित यह जहाज अंतिम बार भारी विस्फोटक सामग्री लेकर फ्रांस के लिए रवाना हुआ था। समुद्री यात्रा और जर्मन पनडुब्बियों के खतरे से बचने के बाद उसे नव-मुक्त चेरबर्ग पहुंचना था, लेकिन अगस्त 1944 के अंत में इंग्लैंड के तट के पास वह डूब गया।

अब इसके तीन मस्तूल समुद्र की सतह से ऊपर दिखाई देते हैं और दूर से भी मलबे की मौजूदगी का पता चलता है। आसपास के लोग इसे द्वितीय विश्व युद्ध की याद और उसके खतरनाक अवशेष, दोनों के रूप में देखते हैं।

ब्रिटिश सरकार ने मस्तूलों को हटाने के लिए करीब 12 मिलियन डॉलर की परियोजना शुरू की। विशेषज्ञों को आशंका थी कि कमजोर हो चुके मस्तूल नीचे के जर्जर डेक पर गिर सकते हैं और इससे मलबे के भीतर मौजूद विस्फोटकों के लिए नया खतरा पैदा हो सकता है।

हाल में तीनों मस्तूलों को सावधानी से काटकर निकाल लिया गया। जंग और समुद्री जीवों से ढके ये मस्तूल अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में मिले, लेकिन जहाज का बाकी ढांचा बेहद कमजोर हो चुका है। कुछ स्थानों पर स्टील इतना पतला हो चुका है कि उसे हाथ से भी आसानी से क्षतिग्रस्त किया जा सकता है।

निकाले गए मस्तूलों को चैथम हिस्टोरिक डॉकयार्ड ले जाया जा रहा है। वहां उन्हें संरक्षित कर जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। इस तरह रिचर्ड मोंटगोमेरी का एक हिस्सा इतिहास और संग्रहालय में सुरक्षित रहेगा, जबकि समुद्र में पड़ा उसका विस्फोटक मलबा अब भी ब्रिटेन के लिए एक अनसुलझा खतरा बना हुआ है।

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