अणु में एक कार्बन का बदलाव खोल सकता है स्मार्ट जैव पदार्थों के विकास की नई राह

Indian scientists have discovered that a minor change in molecular geometry can significantly influence the structure and properties of peptide-based materials. Researchers at Bengaluru’s Centre for Nano and Soft Matter Sciences demonstrated that introducing a single methylene group between a peptide and a fluorescent pyrene unit alters molecular organization, fluorescence behaviour, and nanoscale assembly without changing the peptide’s fundamental structure. Published in Polymer Chemistry, the study offers a promising strategy for designing advanced functional biomaterials. Its potential applications include biosensing, bioimaging, smart optical materials, optoelectronics, and molecular electronics, opening new possibilities for developing responsive, adaptable, next-generation materials.
भारतीय वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण खोज, चिकित्सा जांच, जैव चित्रण और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में मिल सकती है मदद
BY- ADITYA SINGH
विज्ञान की दुनिया में कभी-कभी बेहद छोटे बदलाव भी बड़ी संभावनाओं के द्वार खोल देते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही प्रयोग में पाया है कि किसी अणु की संरचना में केवल एक कार्बन परमाणु से संबंधित मामूली बदलाव उसके व्यवहार और गुणों को उल्लेखनीय रूप से बदल सकता है। यह खोज भविष्य में ऐसे स्मार्ट जैव पदार्थों के विकास में सहायक हो सकती है, जो बाहरी परिस्थितियों के अनुसार अपने गुणों में बदलाव कर सकें।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत बेंगलुरु स्थित नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज केंद्र (सीईएनएस) के वैज्ञानिकों ने यह महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। शोध में पाया गया कि पेप्टाइड और प्रकाश उत्सर्जित करने वाली पाइरीन इकाई के बीच केवल एक मेथिलीन समूह (–CH₂–) जोड़ने से अणुओं के आपस में जुड़ने, व्यवस्थित होने और प्रकाश संबंधी गुणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन आ जाता है। विशेष बात यह है कि इसके लिए पेप्टाइड की मूल संरचना बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
पेप्टाइड वास्तव में अमीनो अम्लों से बनी छोटी शृंखलाएं हैं, जो प्रोटीन की संरचना का आधार होती हैं। इनकी एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि ये स्वतः एकत्रित होकर अत्यंत सूक्ष्म और सुव्यवस्थित संरचनाएं बना सकती हैं। वैज्ञानिक इस गुण का उपयोग चिकित्सा, जैव प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिकी के लिए नए पदार्थ विकसित करने में करना चाहते हैं। हालांकि अब तक बड़ी चुनौती यह रही है कि इन अणुओं को इच्छित आकार और गुणों वाली संरचनाओं में कैसे व्यवस्थित किया जाए।
नए अध्ययन ने इस चुनौती के समाधान की एक संभावित दिशा दिखाई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि अणु के दो हिस्सों के बीच दूरी में बहुत मामूली परिवर्तन करने से उनकी पारस्परिक स्थिति बदल जाती है। इससे अणुओं की पैकिंग, त्रिआयामी व्यवस्था, प्रकाश उत्सर्जन की अवधि और नैनो स्तर पर बनने वाली संरचनाओं में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया।
इसका अर्थ यह है कि वैज्ञानिक किसी पदार्थ की पूरी रासायनिक संरचना बदलने के बजाय उसके घटकों की आपसी स्थिति में छोटे बदलाव करके भी उसके गुणों को नियंत्रित कर सकते हैं। इससे नए पदार्थों के विकास की प्रक्रिया अधिक लक्षित और प्रभावी बन सकती है।
इस शोध का नेतृत्व सीईएनएस के डॉ. गौतम घोष और उनके पीएचडी शोधार्थी सौरव मोयरा ने किया। अध्ययन में बेंगलुरु के जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के तारक नाथ दास तथा पश्चिम बंगाल के घाटाल रवींद्र शतवार्षिकी महाविद्यालय के डॉ. रवींद्र नाथ मन्ना ने भी सहयोग दिया।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस खोज के संभावित उपयोग व्यापक हैं। इससे ऐसे जैव संवेदक विकसित करने में सहायता मिल सकती है, जो शरीर में विशेष जैविक पदार्थों या परिवर्तनों की पहचान कर सकें। जैव चित्रण तकनीक में भी इसका उपयोग संभव है, जहां प्रकाश उत्सर्जित करने वाले अणु कोशिकाओं और ऊतकों के अध्ययन में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त स्मार्ट प्रकाशीय सामग्री, प्रकाश-इलेक्ट्रॉनिकी तथा आणविक इलेक्ट्रॉनिकी के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका पॉलिमर केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है। हालांकि इन संभावित उपयोगों को व्यावहारिक तकनीकों में बदलने के लिए अभी और अनुसंधान की आवश्यकता होगी।
इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि उन्नत जैव पदार्थों के निर्माण के लिए हमेशा बड़े रासायनिक परिवर्तन आवश्यक नहीं होते। कभी-कभी अणुओं की ज्यामिति में अत्यंत सूक्ष्म बदलाव भी उनके गुणों और उपयोग की संभावनाओं को बदल सकता है। भारतीय वैज्ञानिकों का यह अध्ययन अगली पीढ़ी के अनुकूलनीय और कार्यात्मक जैव पदार्थों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

