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साइलेंट किलर: हाइपरटेंशन का बढ़ता वैश्विक संकट

The WHO’s first-ever report on hypertension highlights a severe global health crisis, labeling it a “silent killer.” Worldwide, one in three adults—about 1.3 billion people—suffers from high blood pressure, yet four out of five lack adequate treatment. India faces a massive burden with over 188 million affected adults. Uncontrolled hypertension, often driven by poor diet, inactivity, and stress, silently leads to fatal cardiovascular diseases and strokes. However, prioritizing timely medical intervention and lifestyle modifications could prevent millions of deaths. Global and national efforts, like the India Hypertension Control Initiative, are critical steps toward mitigating this preventable epidemic.

-ज्योति रावत –

आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ और तनाव के बीच एक ऐसी बीमारी चुपचाप हमारे समाज में अपनी जड़ें जमा रही है, जिसकी आहट भी अधिकांश लोगों को तब तक नहीं मिलती, जब तक कि वह कोई जानलेवा रूप न ले ले। इसी गंभीर विषय पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 78वें सत्र के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बेहद महत्त्वपूर्ण और अपनी तरह की पहली रिपोर्ट जारी की है। “उच्च रक्तचाप पर वैश्विक रिपोर्ट: द रेस अगेंस्ट अ साइलेंट किलर” (The Race Against a Silent Killer) शीर्षक वाली यह रिपोर्ट दुनिया भर में हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप के विनाशकारी प्रभावों, इसके तेजी से बढ़ते मामलों और उपचार की कमियों पर एक विस्तृत प्रकाश डालती है। यह रिपोर्ट न केवल नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है, बल्कि आम जनता के लिए भी एक अलार्म है जो इस ‘मूक قاتल’ (साइलेंट किलर) की गंभीरता को रेखांकित करती है।

उच्च रक्तचाप की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि और इसका मूक स्वरूप :  इसे समझने के लिए हमें मानव शरीर की रक्त संचार प्रणाली को देखना होगा। उच्च रक्तचाप तब होता है जब धमनियों या रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव लगातार बहुत अधिक बना रहता है। चिकित्सीय भाषा में, जब यह दबाव 140/90 mmHg या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे हाइपरटेंशन की श्रेणी में रखा जाता है। रक्तचाप को हमेशा दो संख्याओं में मापा और लिखा जाता है। पहली संख्या, जिसे सिस्टोलिक दबाव कहा जाता है, उस समय रक्त वाहिकाओं में दबाव को दर्शाती है जब हृदय धड़कता है या संकुचित होकर रक्त को पंप करता है। दूसरी संख्या, जिसे डायस्टोलिक दबाव कहते हैं, वह दबाव है जब हृदय दो धड़कनों के बीच आराम की स्थिति में होता है।

इसे ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उच्च रक्तचाप से ग्रसित अधिकांश लोगों में सालों तक इसके कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते हैं। लोग अक्सर इस भ्रम में रहते हैं कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं, जबकि अंदर ही अंदर बढ़ा हुआ रक्तचाप उनके महत्त्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुँचा रहा होता है। बहुत अधिक उच्च रक्तचाप होने पर ही कुछ लोगों को सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या नाक से खून आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसी अज्ञानता को दूर करने और लोगों को नियमित जाँच के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से हर साल 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) मनाया जाता है।

एक वैश्विक महामारी: चौंकाने वाले आंकड़े : विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस ताज़ा रिपोर्ट के आंकड़े किसी वैश्विक महामारी से कम डरावने नहीं हैं। वर्तमान में दुनिया भर में हर तीन में से एक वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। पिछले कुछ दशकों में इसके प्रसार में चिंताजनक वृद्धि हुई है। वर्ष 1990 से 2019 के बीच, उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों की संख्या 650 मिलियन से दोगुनी होकर 1.3 बिलियन (130 करोड़) तक पहुँच गई है। यह बीमारी अब पूरी दुनिया में 30 से 79 आयु वर्ग के लगभग 33% वयस्कों को अपना शिकार बना चुकी है।

इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के बावजूद, उच्च रक्तचाप से पीड़ित हर पाँच में से लगभग चार व्यक्तियों को इसका पर्याप्त और प्रभावी इलाज नहीं मिल पा रहा है। यह स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और जागरूकता में एक बहुत बड़ी खाई को दर्शाता है। अगर हम उपचार कवरेज में क्षेत्रीय असमानताओं की बात करें, तो उच्च आय वाले देशों और निम्न आय वाले देशों के बीच भारी अंतर देखने को मिलता है। WHO के अमेरिकी क्षेत्र के देश 60% उपचार कवरेज दर के साथ सबसे आगे हैं, जबकि अफ्रीकी क्षेत्र में यह कवरेज मात्र 27% है। यह भी एक कटु सत्य है कि उच्च रक्तचाप से पीड़ित तीन-चौथाई से अधिक वयस्क निम्न और मध्यम आय वाले देशों में निवास करते हैं, जहां स्वास्थ्य ढांचा पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है।

भारत पर उच्च रक्तचाप का भारी बोझ : अगर हम भारत के संदर्भ में बात करें, तो स्थिति बेहद संवेदनशील है। तेजी से हो रहे शहरीकरण, बदलती आहार शैली और तनावपूर्ण जीवन के कारण अकेले भारत में 30 से 79 वर्ष की आयु के अनुमानित 188.3 मिलियन (लगभग 18.8 करोड़) वयस्क उच्च रक्तचाप की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि भारत में उच्च रक्तचाप की व्यापकता वैश्विक औसत 31% से मामूली रूप से कम है, लेकिन देश की विशाल आबादी के कारण यह संख्या स्वास्थ्य प्रणाली पर एक बहुत बड़ा बोझ डालती है।

भारत के लिए एक बड़ी चुनौती इस बीमारी पर नियंत्रण पाने की है। रिपोर्ट के अनुसार, 50% नियंत्रण दर के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उच्च रक्तचाप से पीड़ित अतिरिक्त 67 मिलियन (6.7 करोड़) व्यक्तियों को तत्काल और प्रभावी उपचार मिले। यदि भारत इस दिशा में प्रगति के इस परिदृश्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लेता है, तो वर्ष 2040 तक उच्च रक्तचाप के कारण होने वाली 4.6 मिलियन (46 लाख) असामयिक मौतों को टाला जा सकता है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि केवल सही समय पर चिकित्सा सुविधा और उचित देखभाल से कितने बड़े पैमाने पर जनहानि को रोका जा सकता है।

जोखिम के कारक और अनियंत्रित रक्तचाप की जटिलताएँ: उच्च रक्तचाप रातों-रात विकसित नहीं होता है; यह लंबे समय तक अपनाई गई अनुचित जीवनशैली का परिणाम होता है। उच्च नमक (सोडियम) वाला आहार इसका सबसे प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अतिरिक्त, शारीरिक गतिविधि की कमी, गतिहीन जीवनशैली, जंक फूड का अत्यधिक सेवन, बढ़ता मोटापा, और अत्यधिक शराब व तंबाकू का सेवन उच्च रक्तचाप को निमंत्रण देते हैं। अनुवांशिकी (जेनेटिक्स) भी इसमें एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, यानी यदि परिवार में पहले से किसी को उच्च रक्तचाप रहा है, तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा बढ़ जाता है। मानसिक तनाव और अपर्याप्त नींद भी आधुनिक समय में इसके बड़े कारक बनकर उभरे हैं।

जब उच्च रक्तचाप का लंबे समय तक उपचार नहीं किया जाता है, तो यह शरीर के विभिन्न अंगों पर विनाशकारी प्रभाव डालता है। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप के कारण हृदय से जुड़ी गंभीर और जानलेवा समस्याएँ पैदा होती हैं। इनमें सीने में दर्द (एंजाइना), दिल का दौरा (हार्ट अटैक), हृदय गति रुकना (हार्ट फेल्योर) और हृदय की अनियमित धड़कन (एरिथमिया) शामिल हैं। इसके अलावा, बढ़ा हुआ रक्तचाप धमनियों को कठोर और संकुचित कर देता है, जिससे मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है और स्ट्रोक (पक्षाघात) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह गुर्दों (किडनी) को भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है।

उपचार, बचाव और वैश्विक पहल का रोडमैप : विश्व स्तर पर उच्च रक्तचाप की दवा लेने वाले 30 से 70 वर्ष की आयु के वयस्कों का प्रतिशत वर्ष 1990 में 22% था, जो 2019 में बढ़कर 42% हो गया है। इसी अवधि के दौरान प्रभावी उपचार कवरेज भी चौगुना होकर 21% तक पहुँचा है, लेकिन यह अभी भी पर्याप्त नहीं है। लगभग 30% मरीज ऐसे हैं जिनका रक्तचाप खतरे के निशान से बहुत ऊपर है और उन्हें तत्काल चिकित्सीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि यदि उच्च रक्तचाप के प्रभावी उपचार का दायरा बढ़ाया जाए, तो वर्ष 2050 तक दुनिया भर में 76 मिलियन मौतों, 120 मिलियन स्ट्रोक के मामलों, 79 मिलियन दिल के दौरों और 17 मिलियन हार्ट फेल्योर के मामलों को रोका जा सकता है।

इस दिशा में वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। वर्ष 2025 तक उच्च रक्तचाप के प्रसार को 25% तक कम करने के लक्ष्य के साथ, WHO और यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने 2016 में ‘ग्लोबल हार्ट्स इनिशिएटिव’ की शुरुआत की थी। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र का सतत् विकास लक्ष्य 3 (SDG 3) भी सभी उम्र के लोगों के लिए स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करने और कल्याण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। भारत ने भी इस दिशा में ‘भारत उच्च रक्तचाप नियंत्रण पहल’ (IHCI) कार्यक्रम लागू किया है। इस कार्यक्रम और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर गैर-संचरणीय रोगों (NCDs) की जाँच व उपचार के प्रयासों के माध्यम से भारत सरकार का लक्ष्य 2025 तक उच्च रक्तचाप या मधुमेह के 75 मिलियन (7.5 करोड़) रोगियों को मानक देखभाल के दायरे में लाना है।

उच्च रक्तचाप से बचाव का सबसे कारगर हथियार जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव है। आहार में नमक की मात्रा कम करना, ताजे फलों और सब्जियों का सेवन बढ़ाना, नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और तंबाकू व शराब से पूरी तरह दूरी बनाना, इसके प्रबंधन के मूल मंत्र हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट आह्वान किया है कि सभी देशों को उच्च रक्तचाप की रोकथाम, इसके शीघ्र पता लगाने और प्रभावी प्रबंधन को अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य लाभ पैकेज में सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। जिन नियंत्रण कार्यक्रमों को अब तक कम प्राथमिकता और कम बजट मिलता रहा है, उन्हें सुदृढ़ करने की सख्त आवश्यकता है। उच्च रक्तचाप की नियमित जाँच और इसका समुचित उपचार किसी भी देश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) का एक अभिन्न हिस्सा होना चाहिए, ताकि हर नागरिक एक स्वस्थ, उत्पादक और सुरक्षित जीवन जी सके।

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