क्षेत्रीय समाचार

सिलगांव सड़क के लिए जमीन देने वाले काश्तकार छह साल से मुआवजे के इंतजार में

 

सड़क बनकर तैयार, वाहनों की आवाजाही भी शुरू, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों को अब तक नहीं मिला मुआवजा

रिखणीखाल/पौड़ी, 2 नवंबर (प्रभुपाल रावत)। पौड़ी जिले के रिखणीखाल विकासखंड के अंतर्गत गवाणा और द्वारी गांवों के काश्तकार सिलगांव संपर्क सड़क के निर्माण के लिए ली गई अपनी जमीन के मुआवजे का पिछले छह वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण का कार्य पूरा होने और वाहनों की आवाजाही शुरू होने के बावजूद प्रभावित काश्तकारों को अब तक मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रभावित काश्तकारों के अनुसार वर्ष 2019-20 में सिलगांव संपर्क सड़क के निर्माण के लिए गवाणा और द्वारी गांवों की कृषि भूमि ली गई थी। उस समय संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से जमीन का उचित मुआवजा शीघ्र देने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद सड़क का निर्माण भी पूरा हो गया और उस पर वाहनों का संचालन भी शुरू हो गया, लेकिन जिन किसानों ने सड़क के लिए अपनी जमीन दी, वे आज भी मुआवजे से वंचित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के लैंसडौन कार्यालय और पौड़ी जिला प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें भेजीं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन देकर लौटा दिया गया। लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण प्रभावित परिवारों में विभागीय कार्यप्रणाली के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

काश्तकारों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में पहले ही कृषि भूमि सीमित है और खेती-किसानी से आजीविका चलाना लगातार कठिन होता जा रहा है। ऐसे में सड़क निर्माण के लिए जमीन चले जाने से कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क सुविधा का लाभ पूरे क्षेत्र को मिल रहा है, लेकिन इसके लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों की आर्थिक क्षति की भरपाई नहीं की गई है। उनका सवाल है कि जब सरकार और संबंधित विभाग समय पर मुआवजा नहीं दे सकते थे तो किसानों की जमीन क्यों ली गई?

प्रभावित ग्रामीणों ने पौड़ी के जिलाधिकारी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में ली गई भूमि का मुआवजा प्रचलित सर्किल दरों के अनुसार ब्याज सहित दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही भुगतान में छह वर्षों से हो रही देरी की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपने अधिकारों के लिए आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए जमीन देने वाले किसानों को वर्षों तक मुआवजे से वंचित रखना उनके साथ अन्याय है।

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