शिक्षा/साहित्य

गढ़वाल विश्वविद्यालय में नवोदय शिक्षकों का चार दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 46 शिक्षक आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक का लेंगे प्रशिक्षण

श्रीनगर (गढ़वाल), 2 नवंबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) और राष्ट्रीय नवोदय नेतृत्व संस्थान, नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में जवाहर नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए चार दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम सोमवार को शुरू हुआ। 2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के 46 शिक्षक भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और तकनीकी दक्षताओं का प्रशिक्षण देना है।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास जरूरी है। शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक तकनीक का समन्वय करते हुए विद्यार्थियों में रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन और नैतिक मूल्यों को विकसित करना चाहिए। शिक्षक की भूमिका केवल विषयगत ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी हैं। उनके सतत व्यावसायिक विकास से ही गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा को नई दिशा मिल सकती है। वर्तमान समय में विषयगत ज्ञान के साथ तकनीकी दक्षता और नवीन शिक्षण पद्धतियों की समझ भी आवश्यक है। शिक्षकों को आधुनिक तकनीक और नवाचारों का उपयोग विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप करना चाहिए।

कार्यक्रम की समन्वयक एवं आईक्यूएसी की उपनिदेशक प्रो. सीमा धवन ने बताया कि प्रशिक्षण में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, दक्षता आधारित शिक्षण, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक, राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अनुभवात्मक शिक्षण और डिजिटल शिक्षा जैसे विषय शामिल किए गए हैं।

प्रथम तकनीकी सत्र में एससीईआरटी उत्तराखंड के विशेषज्ञ प्रदीप रावत ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, दक्षता आधारित अधिगम और अधिगम प्रतिफल पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षण, खेल आधारित शिक्षा, तकनीक के उपयोग और सतत मूल्यांकन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दक्षता आधारित शिक्षण विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करता है।

दूसरे सत्र में अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली के डॉ. ऋषभ कुमार मिश्रा ने शिक्षक दक्षता एवं शिक्षण शास्त्र पर व्याख्यान दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. रवनीत कौर ने भी शैक्षिक विषयों पर विचार रखे।

इस अवसर पर डीन प्रो. एम.एस. पंवार, परिसर निदेशक प्रो. एच.बी.एस. चौहान, कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रैवानी सहित अनेक शिक्षक एवं शिक्षाविद् मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनु राही ने किया। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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