सोंग नदी की सेहत बताएंगे जलीय जीव, तितलियां और पक्षी
सारा के तहत 80 किलोमीटर क्षेत्र में शुरू हुआ जैविक संकेतकों का अध्ययन, 36 स्थानों पर होगा सर्वेक्षण

देहरादून, 4 नवंबर। पूर्वी दून घाटी की जीवनरेखा मानी जाने वाली सोंग नदी कितनी स्वस्थ है, उसके पानी की गुणवत्ता कैसी है और बढ़ती मानवीय गतिविधियों का नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इन सवालों का जवाब अब जलीय जीवों, तितलियों, मधुमक्खियों और पक्षियों के अध्ययन से तलाशा जाएगा। उत्तराखंड के स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) के अंतर्गत सोंग नदी की पारिस्थितिक स्थिति का आकलन करने के लिए जैविक संकेतक परियोजना शुरू की गई है।
इस परियोजना के तहत नदी के उद्गम से लेकर गंगा में उसके संगम तक लगभग 80 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में विभिन्न जीव प्रजातियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. वी.पी. उनियाल के मार्गदर्शन में संचालित इस शोध का उद्देश्य नदी की वर्तमान पारिस्थितिक स्थिति का वैज्ञानिक आधार तैयार करना और उसके संरक्षण के लिए आवश्यक उपाय सुझाना है।

जलीय जीवों से मिलेगी प्रदूषण की जानकारी
वैज्ञानिकों के अनुसार नदी के स्वास्थ्य का आकलन केवल पानी के रासायनिक परीक्षण से नहीं, बल्कि उसमें और उसके आसपास पाए जाने वाले जीवों की विविधता से भी किया जा सकता है। कुछ जीव प्रदूषण के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं, जबकि कुछ प्रदूषित वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं। इनकी उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति से नदी की पारिस्थितिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।
परियोजना के अंतर्गत पांच प्रमुख जीव समूहों का अध्ययन किया जाएगा। इनमें पानी में रहने वाले सूक्ष्म अकशेरुकी जीव और कीटों के लार्वा, तितलियां, जंगली मधुमक्खियां, व्याध पतंग एवं सुई पतंग तथा विभिन्न पक्षी प्रजातियां शामिल हैं। जलीय अकशेरुकी जीव पानी की गुणवत्ता और प्रदूषण की स्थिति समझने में मदद करेंगे, जबकि तितलियों और मधुमक्खियों से नदी किनारे की वनस्पतियों तथा परागण की स्थिति का पता चलेगा। व्याध पतंग और सुई पतंग जल स्रोतों एवं उनके आसपास के आवासों की दशा के संकेतक होंगे। इसी प्रकार पक्षियों की विविधता से समूचे नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का आकलन किया जाएगा।
36 स्थानों पर दो मौसमों में होगा सर्वेक्षण
अध्ययन के लिए टिहरी जिले के कद्दूखाल क्षेत्र में नदी के उद्गम से लेकर देहरादून के टिहरी फार्म क्षेत्र में गंगा संगम तक सोंग नदी को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। ऊपरी, मध्य और निचले हिस्सों में 12-12 स्थायी सर्वेक्षण स्थल निर्धारित किए जाएंगे। इस प्रकार कुल 36 स्थानों पर जीव प्रजातियों की उपस्थिति, विविधता और उनके प्राकृतिक आवासों की स्थिति का अध्ययन होगा।
छह महीने की इस परियोजना में नवंबर से अप्रैल के बीच दो चरणों में सर्वेक्षण किया जाएगा। पहला चरण मानसून के बाद और दूसरा मानसून से पहले की परिस्थितियों पर केंद्रित होगा। इससे अलग-अलग मौसमों में नदी के जैविक स्वास्थ्य में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी मिल सकेगी।
सोंग बांध और खनन के प्रभावों को समझने में मिलेगी मदद
सोंग नदी पर प्रस्तावित बांध, नदी क्षेत्र में खनन, बढ़ते शहरीकरण और अन्य मानवीय गतिविधियों के संभावित प्रभावों को देखते हुए इस अध्ययन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना के माध्यम से नदी की जैव विविधता और पारिस्थितिक स्थिति का आधारभूत आंकड़ा संग्रह तैयार किया जाएगा। भविष्य में इसी के आधार पर नदी में होने वाले परिवर्तनों की तुलना और निगरानी की जा सकेगी।
अध्ययन से यह समझने में भी मदद मिलेगी कि नदी के कौन से हिस्से पारिस्थितिक दृष्टि से अधिक संवेदनशील हैं और किन क्षेत्रों में संरक्षण तथा पुनर्जीवन के उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। शोध के निष्कर्ष सोंग नदी के दीर्घकालीन संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी और नदी प्रबंधन संबंधी नीतियों के निर्धारण में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

