गौचर मेले की तैयारियां तेज, सांस्कृतिक मंच का होगा विस्तार
**14 नवंबर से शुरू होगा सात दिवसीय राजकीय मेला, दुकानों और स्टालों की संख्या में कटौती**
— दिग्पाल गुसाईं की रिपोर्ट —
गौचर, 4 नवंबर। चमोली जिले के गौचर में आगामी 14 नवंबर से आयोजित होने वाले सात दिवसीय ऐतिहासिक गौचर औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। मेले की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद बनाने के लिए मेलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग अलकेश नौडियाल तैयारियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इस बार सांस्कृतिक मंच का विस्तार करने के साथ ही मेला मैदान के स्वरूप और दुकानों की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है।
वर्ष 1943 में भारत-तिब्बत व्यापार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शुरू हुआ ऐतिहासिक गौचर मेला इस वर्ष अपने 72वें आयोजन की ओर बढ़ रहा है। उत्तराखंड के प्रमुख राजकीय मेलों में शामिल यह मेला सात दिनों तक दिन-रात चलने वाली व्यापारिक, सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियों के लिए विशेष पहचान रखता है। हालांकि गौचर मेले की तर्ज पर पर्वतीय क्षेत्रों में अनेक मेलों का आयोजन होने लगा है, लेकिन ऐतिहासिक विरासत और व्यापारिक महत्व के कारण गौचर मेले का अपना विशिष्ट स्थान बना हुआ है।
समय के साथ मेले के स्वरूप और आयोजन पर होने वाले खर्च में भी व्यापक बदलाव आया है। एक दौर में मेले के आयोजन के लिए पांच से दस लाख रुपये के बजट की मांग की जाती थी, जबकि अब इसका खर्च करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है। सांस्कृतिक संध्याओं को आकर्षक बनाने के लिए उत्तराखंड के साथ ही देश के अन्य हिस्सों से भी प्रसिद्ध कलाकारों और सांस्कृतिक दलों को आमंत्रित किया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार सांस्कृतिक मंच का विस्तार किया जा रहा है।
बदलते परिवेश में मेले के पारंपरिक सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखना भी आयोजकों के लिए चुनौती बना हुआ है। आधुनिक मनोरंजन और व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव के बीच मेले की ऐतिहासिक पहचान तथा लोकसंस्कृति को जीवंत रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मेला मैदान में इस बार व्यवस्थाओं में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है। पिछले वर्षों तक यहां 287 दुकानों और 144 स्टालों का निर्माण किया जाता था, लेकिन इस बार दर्शकों की सुविधा और आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से मेले के नक्शे में बदलाव करते हुए दुकानों और स्टालों की संख्या घटाई जा रही है।
फिलहाल मेला मैदान में साफ-सफाई, दुकानों के निर्माण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का कार्य तेजी से चल रहा है। मेला प्रशासन का प्रयास है कि आयोजन शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि व्यापारियों, कलाकारों और मेलार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

