“एक स्मृति चित्र “- राम कथा और काकभुशुण्डि

– गोविंद प्रसाद बहुगुणा
कुछ वर्ष पूर्व जनपद उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री धाम में प्रसिद्ध कथावाचक रमेश भाई ओझा श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करने आये थे।
कथा आयोजन के दूसरे दिन ही गंगोत्री में झमाझम बारिश शुरू हो गई, जिसके कारण वहां तापमान इतना गिर गया था कि बर्फ भी गिरने लगी। थोडी देर में जब जरा मौसम खुला तो यह नजारा दिखाई दिया कि कथा स्थल के बाहर एक वृक्ष की डाल पर यह काक पक्षी बैठा दिखाई दिया। हाल के अन्दर कथा चल रही थी जिसका लाइव प्रसारण *संस्कार* चेनल कर रहा था, तो मैं भी यहाँ देहरादून में घर में बैठे- बैठे इस कार्यक्रम को देख रहा था I संस्कार चेनल के उस कैमरामैन का मैं मुरीद हो गया जिसने कथा के बीच यह चित्र भी श्रोताओं को दिखा दिए। काक पक्षी का यह चित्र देखकर मुझे ऐसा लगा मानों काकभुशुण्डि जी मानसरोवर छोड़कर गंगोत्री में भी कथा सुनने पधारे हैं।यद्यपि काकभुशुण्डि का प्रसंग सिर्फ रामचरितमानस में ही मिलता है किंतु राम कथा का वर्णन संक्षेप मेंश्रीमद्भागवत में भी मिलता है,प्रमाणस्वरूप यह श्लोक देखिये
“गुर्वर्थे त्यक्तराज्यो व्यचरदनुवनं
पद्मपद्भ्यां प्रियायाः
पाणिस्पर्शाक्षमाभ्यां मृजितपथरुजो
यो हरीन्द्रानुजाभ्याम्।
वैरूप्याच्छूर्पणख्याः प्रियविरहरुषारोपिता-भ्रू-विजृम्भ-
त्रस्ताब्धिर्बद्धसेतुः खलदवदहनः
कोसलेन्द्रोऽवतान्नः॥९-१०-४॥-
श्रीमद्भागवत नवम् स्कन्द १०वां अध्याय
रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड के अनुसार राम कथा के असली वक्ता तो काकभुशुण्डी ही थे –
उत्तर दिसि सुन्दर गिरि नीला I तहँ रह काकभुशुण्डि सुशीला II
राम भगति पथ परम प्रवीना I ग्यानी गुन गृह बहु कालीना II
राम कथा सो कहइ निरंतर I सादर सुनहि बिबिध बिहंगबरII
काक ने यह कथा पक्षीराज गरुड़ के अलावा मानसरोवर में विचरण कर रहे अन्य पक्षियों को भी सुनाई थी ,और उनके मुख से शिव जी ने भी यह कथा सुनने के खातिर पक्षी का रुप धारण किया था , यह इसलिए ज़रूरी था कि पक्षी ही दूसरे पक्षी की भाषा बोली समझ सकते हैं – “समुझहि खग खगही कै भाषा”
यह चित्र मैने यादगार के लिए टीवी प्रसारण के समय अपने मोबाइल पर सुरक्षित कर दिया था ….
