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कठिन रूपकुंड-ज्यूरागली मार्ग पार कर शीला समुद्र पहुंची नंदादेवी बड़ी जात

 

  • हल्की बर्फबारी ने बढ़ाया यात्रियों का रोमांच, आज होमकुंड में होगी विशेष पूजा और कैलाश की ओर विदा होंगे चौसिंगा खंडू
  • कठिन रूपकुंड-ज्यूरागली मार्ग पार कर शीला समुद्र पहुंची नंदादेवी बड़ी जात

 

रहस्यमयी रूपकुंड झील जहां कभी सेकड़ो नरकंकाल, जेवरात आदि तैरते मिले थे-फ़ोटो सौजन्य, हरेन्द्र बिष्ट

महिपाल गुसाईं/हरेंद्र बिष्ट
गोपेश्वर/थराली, 19 सितम्बर। नंदादेवी बड़ी जात यात्रा-2026 शनिवार को अपने सबसे कठिन और दुर्गम यात्रा मार्गों में शामिल पातरनचौणियां-रूपकुंड-ज्यूरागली मार्ग को पार कर 16वें पड़ाव एवं तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंच गई। ऊंचाई, दुर्गम रास्ते और पिछले दिनों हुए हल्के हिमपात के बावजूद हजारों नंदा भक्तों का उत्साह बना रहा। उच्च हिमालय के विहंगम प्राकृतिक दृश्यों और रास्ते में बिछी बर्फ के बीच श्रद्धालु माता नंदा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।

शनिवार तड़के बड़ी जात में शामिल दशोली, बंड और ज्वाल्पा की देव डोलियां, विभिन्न क्षेत्रों और गांवों से आई देव छंतोलियां, चौसिंगा खंडू तथा हजारों श्रद्धालु 15वें पड़ाव पातरनचौणियां से शीला समुद्र के लिए रवाना हुए। यात्रा कैलवा विनायक से होते हुए प्रसिद्ध रूपकुंड पहुंची और वहां से अत्यंत कठिन ज्यूरागली मार्ग को पार कर ग्लेशियर के ऊपर स्थित शीला समुद्र पहुंची। दुर्गम और जोखिम भरे मार्ग के बावजूद श्रद्धालुओं में थकान से अधिक उत्साह दिखाई दिया।

रूपकुंड से ज्यूरागली और वहां से शीला समुद्र की ओर पिछले दिनों हुए हल्के हिमपात ने यात्रा के रोमांच को और बढ़ा दिया। बर्फ देखकर यात्री विचलित होने के बजाय उत्साहित नजर आए। श्रद्धालु हिमपात को भी माता नंदा की कृपा मानते हुए आगे बढ़ते रहे। विशेषकर राज्य के बाहर से आए ऐसे श्रद्धालु, जिन्होंने पहले कभी बर्फ नहीं देखी थी, उच्च हिमालय में बर्फ से ढके रास्ते और चोटियों को देखकर बेहद रोमांचित हुए।

शीला समुद्र में शनिवार रात देवी जागरण के साथ ध्योसिंह और लाटू देवता की पूजा-अर्चना की जाएगी। रविवार को यात्रा यहां से त्रिशूली और नंदा घुंघटी हिमशृंखलाओं की तलहटी में स्थित पंचगंगा होमकुंड पहुंचेगी। होमकुंड में विधि-विधान से बड़ी जात की विशेष पूजा-अर्चना होगी। यहीं देवी को भेंट-पवाड़ा और शृंगार सामग्री अर्पित की जाएगी। इसके बाद पिछले 16 दिनों से यात्रा के साथ चल रहे चौसिंगा खंडुओं को परंपरानुसार कैलाश की ओर विदा किया जाएगा। बड़ी जात यात्रा का यह सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है।

होमकुंड में पूजा और चौसिंगा खंडुओं की विदाई के बाद बड़ी जात की वापसी शुरू हो जाएगी। रविवार को वापसी के क्रम में यात्रा 17वें पड़ाव एवं चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ की ओर बढ़ेगी।

इधर, बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की लोकजात यात्रा सिद्धपीठ देवराड़ा वापसी के क्रम में शनिवार को दूसरे पड़ाव ल्वाणी गांव पहुंच गई। सुबह देव डोली बांक गांव से विदा होकर लोहाजंग होते हुए दोपहर के भोजन के लिए बगड़ीगाड़ पहुंची। यहां देव डोली और छतोली की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ यात्रा का स्वागत किया गया।

इस अवसर पर हरनी की ग्राम प्रधान रीता पांडे, क्षेत्र पंचायत सदस्य पारी देवी, पूर्व प्रधान गंगा सिंह सुयाल, हरिकृष्ण पांडे, बादल सिंह, मदन सिंह, कलम सिंह और पदम सिंह खत्री सहित स्थानीय ग्रामीणों ने यात्रा का स्वागत कर उसे अगले पड़ाव के लिए विदा किया। देर शाम देव डोली ल्वाणी गांव पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने परंपरागत ढंग से उसका स्वागत किया।

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