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चारधाम यात्रा में स्वच्छ और शुद्ध भोजन सुनिश्चित करने के व्यापक इंतजाम

देहरादून, 21  अप्रैल ।चारधाम यात्रा मार्ग के होटल-ढाबों में इस बार तीर्थयात्रियों को स्वच्छ और शुद्ध भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विशेष तैयारियां की हैं। विभाग द्वारा यात्रा मार्ग पर क्विक रिस्पांस टीमों और मोबाइल फूड सेफ्टी वैन की तैनाती की गई है। इसके साथ ही होटल-ढाबा संचालकों और खाद्य कारोबारियों के साथ व्यापक स्तर पर संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चारधाम यात्रा को ‘हरित यात्रा’ की थीम पर संचालित करने पर जोर दे रहे हैं। इसी क्रम में विभाग यात्रा मार्ग के प्रमुख शहरों में होटल एवं खाद्य कारोबारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। चारधाम मार्ग पर शुद्ध एवं ताजा भोजन सुनिश्चित करने के लिए रोटेशन के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती की गई है। साथ ही खाद्य पदार्थों की नियमित जांच और जन-जागरूकता के लिए मोबाइल फूड सेफ्टी वैन सक्रिय हैं, जबकि शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु क्विक रिस्पांस टीमें भी तैनात की गई हैं। विभाग ने शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री नंबर 18001804246 जारी किया है।

आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन सचिन कुर्वे के निर्देशानुसार विभाग होटल और ढाबा संचालकों के साथ बैठकों के माध्यम से ‘ग्रीन यात्रा’, स्वच्छता और मिलावट रहित भोजन सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण दे रहा है। उपायुक्त मुख्यालय गणेश कंडवाल ने बताया कि आयुक्त के निर्देशों के तहत अब तक उत्तरकाशी, श्रीनगर, देवप्रयाग, तीनधारा, चंबा, घनसाली, रुद्रप्रयाग और घट्टूगाड़ में 250 से अधिक होटल कारोबारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इन कार्यशालाओं में कारोबारियों से भोजन में तेल, नमक और चीनी का सीमित उपयोग करने की अपील की जा रही है, जिससे विशेष रूप से मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित यात्रियों को सुविधा मिल सके। इसके साथ ही ‘ईट राइट’ अभियान के तहत होटलों को खाद्य तेल का तीन बार से अधिक उपयोग न करने और उसे बायोफ्यूल निर्माण के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में प्रयास है कि तीर्थयात्रियों को शुद्ध भोजन और स्वच्छ वातावरण मिले, साथ ही पवित्र तीर्थस्थलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक की समस्या न बढ़े। इसके लिए ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ के सिद्धांत पर कार्य किया जा रहा है।

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