नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसने पर कांग्रेस ने उठाए निर्माण गुणवत्ता और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल

देहरादून, 4 अगस्त। नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पुल की एप्रोच रोड पहली ही बड़ी बारिश के बाद धंसने की घटना को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने निर्माण गुणवत्ता, निगरानी और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने मंगलवार को जारी बयान में इस मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने तथा पूरी टेंडर प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की।
दसौनी ने कहा कि लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्मित इस पुल पर 12 जुलाई से यातायात शुरू हुआ था। उनके अनुसार 28 जुलाई को एप्रोच रोड में धंसाव की घटना सामने आई, जिसकी जानकारी प्रशासन द्वारा भी सार्वजनिक की गई है।
उन्होंने कहा कि इस घटना के साथ-साथ परियोजना से जुड़े कुछ सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर भी कई प्रश्न उठ रहे हैं। उनके अनुसार उपलब्ध दस्तावेजों में एम/एस हिमालयन कंस्ट्रक्शन नामक पार्टनरशिप फर्म में रुचि भट्ट की 25 प्रतिशत, नितिन कुमार गर्ग की 50 प्रतिशत तथा अखिलेश कुमार भट्ट की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज है। वहीं, अन्य उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार एम/एस दून एसोसिएट्स में अरविंद कुमार भट्ट की 50 प्रतिशत, अरविंद कुमार गर्ग की 30 प्रतिशत तथा वैभव गर्ग की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्शाई गई है।
दसौनी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इन दस्तावेजों के आधार पर किसी व्यक्ति पर कोई आरोप या दोष सिद्ध होने का दावा नहीं कर रही है। उनका कहना था कि यदि सार्वजनिक अभिलेखों में दर्ज जानकारी सही है और संबंधित फर्म का इस परियोजना से संबंध है, तो पारदर्शिता तथा संभावित हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) के संबंध में स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार और संबंधित पक्षों से कई सवाल पूछे हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह जानना शामिल है कि संबंधित परियोजना का ठेका किस फर्म को मिला, टेंडर प्रक्रिया क्या रही, निर्माण से पहले डिजाइन, मिट्टी की जांच, ड्रेनेज और निर्माण सामग्री का परीक्षण किस एजेंसी ने किया तथा पुल को यातायात के लिए सुरक्षित घोषित करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी या तकनीकी एजेंसी की थी। साथ ही कांग्रेस ने यह भी पूछा है कि एप्रोच रोड धंसने की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और क्या सरकार गुणवत्ता परीक्षण, निरीक्षण रिपोर्ट, वर्क ऑर्डर तथा भुगतान संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक करेगी।
दसौनी ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक पदाधिकारी या उससे जुड़े व्यक्ति का किसी निर्माण फर्म से संबंध है, तो ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार का हितों का टकराव नहीं है, तो सरकार और संबंधित पक्षों को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस ने नंदा की चौकी पुल परियोजना की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि केवल एप्रोच रोड की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि धंसाव के कारण क्या थे, ड्रेनेज व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं तथा निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ था या नहीं।
दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड में भारी बारिश सामान्य स्थिति है, इसलिए निर्माण कार्यों में उसी के अनुरूप गुणवत्ता मानकों का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुसार हुआ है तो स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा, और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना सार्वजनिक धन से बनी है, इसलिए इसकी गुणवत्ता, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण से जुड़े तथ्यों को लेकर जनता को जानकारी मिलनी चाहिए। कांग्रेस ने सरकार और संबंधित पक्षों से इन सवालों पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
संपादकीय सावधानी: इस समाचार में सभी दावे कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी के बयान के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। किसी भी व्यक्ति, फर्म या संस्था के विरुद्ध लगाए गए आरोप स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। यदि संबंधित पक्ष का जवाब उपलब्ध हो, तो उसे भी समाचार में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए।

