धामी केबिनेट के अहम फैसले—परिवहन, शिक्षा, कुम्भ-2027 और रोजगार से जुड़े बड़े निर्णयों को मंजूरी
—उषा रावत द्वारा
देहरादून, 30 अप्रैल। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों में परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ करने, कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों को तेज करने, शिक्षा और रोजगार से जुड़े नियमों में बदलाव तथा वन एवं औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित नीतिगत संशोधन शामिल हैं। इन निर्णयों का सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था, युवाओं के अवसरों और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है।
सबसे प्रमुख निर्णयों में परिवहन विभाग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। कैबिनेट ने उत्तराखण्ड मोटर यान (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी देते हुए प्रवर्तन चालकों के लिए पुलिस चालकों की तर्ज पर वर्दी निर्धारित करने का निर्णय लिया। साथ ही राज्य परिवहन बेड़े को विस्तार देने के लिए 250 नई बसों की खरीद को स्वीकृति दी गई। जीएसटी दर में कमी (28% से 18%) का लाभ उठाते हुए पहले स्वीकृत 100 बसों की संख्या बढ़ाकर 109 कर दी गई है।
कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। हरिद्वार में होने वाले निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाते हुए एक करोड़ रुपये तक के कार्य मेलाधिकारी और पांच करोड़ तक के कार्य गढ़वाल मंडल आयुक्त स्तर से स्वीकृत किए जाएंगे। इससे विकास कार्यों में तेजी आने की संभावना है।
कानूनी और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने अहम संशोधन किए। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली 2026 में बदलाव करते हुए जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य बनाया गया है। साथ ही निःशुल्क विधिक सहायता के दायरे में अब एसिड अटैक पीड़ितों को भी शामिल किया गया है।
औद्योगिक क्षेत्र में सरकार ने उपखनिज परिहार नियमावली में संशोधन करते हुए खनिज पर रॉयल्टी दर ₹7 से बढ़ाकर ₹8 प्रति क्विंटल कर दी है। वहीं आबकारी नीति के अनुरूप 6 प्रतिशत वैट दर के संशोधन प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
वन एवं पर्यावरण से जुड़े फैसलों में उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, 2016 में संशोधन करते हुए वन दरोगा के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है। साथ ही आयु सीमा 21 से 35 वर्ष निर्धारित की गई, जबकि वन आरक्षी के लिए आयु सीमा 18 से 25 वर्ष तय की गई है। इसके अलावा, राज्य में मधुमक्खी पालन आधारित आजीविका नीति को भी मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य स्वरोजगार बढ़ाना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है।
शिक्षा क्षेत्र में भी कई अहम फैसले लिए गए। अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 में संशोधन करते हुए कक्षा 1 से 8 तक संचालित संस्थानों की संबद्धता जिला स्तर पर देने का प्रावधान किया गया है, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के लिए विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता अनिवार्य होगी। साथ ही संस्कृत शिक्षा के लिए नई सेवा नियमावली को मंजूरी दी गई, जिससे शिक्षकों के प्रमोशन में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
इसके अतिरिक्त, विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती के लिए नई शैक्षिक योग्यताओं को मंजूरी दी गई है, जो केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना को अब अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा।
कार्मिक मामलों में कैबिनेट ने एकल संवर्ग में प्रतीक्षा सूची के उपयोग के लिए स्पष्ट एसओपी बनाने का निर्णय लिया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग श्रेणी के रिक्त पदों के संबंध में भी न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप निर्णय लिया गया है।
ठेकेदारी व्यवस्था में सुधार करते हुए ‘डी’ श्रेणी के ठेकेदारों के लिए निविदा सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये कर दी गई है।
कुल मिलाकर, कैबिनेट के ये फैसले प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, विकास कार्यों को गति देने और विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
