अन्य

दून पुस्तकालय में कमल जोशी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘आवारगी’ का प्रदर्शन कर उन्हें याद किया गया.

देहरादून, 18 जुलाई । दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से आज सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर, कवि, घुमक्कड़ और फोटो-पत्रकार कमल जोशी के जीवन एवं व्यक्तित्व पर आधारित चर्चित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘आवारगी (Wanderlust)’ का सफल एवं भावपूर्ण प्रदर्शन कर उनके व्यक्तित्व व कार्यों को याद किया गया।

इस कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता, फोटोग्राफी, सिनेमा, पर्यावरण तथा शिक्षा जगत से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक, बुद्धिजीवी, कलाकार, विद्यार्थी और फिल्म प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी श्री चंद्र शेखर तिवारी ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और कहा कि कमल जोशी केवल एक उत्कृष्ट फोटोग्राफर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील कवि, जिज्ञासु यात्री और प्रकृति के सच्चे साधक थे। उन्होंने कहा कि कमल जोशी का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है तथा उनकी दृष्टि हमें प्रकृति, समाज और मनुष्य के प्रति अधिक संवेदनशील बनने की प्रेरणा देती है।

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन श्रीमती गीता गैरोला ने किया। उन्होंने कमल जोशी के जीवन, उनके रचनात्मक सफर तथा डॉक्यूमेंट्री के निर्माण की पृष्ठभूमि को सहज और रोचक ढंग से उपस्थित श्रोताओं के समक्ष रखा।

फिल्म प्रदर्शन के उपरांत फिल्म के निर्देशक एवं निर्माता जयदेव भट्टाचार्य ने डॉक्यूमेंट्री के निर्माण की प्रक्रिया, शोध यात्रा तथा निर्माण के दौरान आए अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनका उद्देश्य कमल जोशी के व्यक्तित्व और कृतित्व के उन पक्षों को सामने लाना था, जो आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि संवेदनशील दृष्टि, प्रकृति-प्रेम और मानवीय मूल्यों का एक जीवंत दस्तावेज है।

वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती कवंलजीत कौर ने कमल जोशी की कविताओं की भावभूमि, उनकी भाषा और प्रकृति के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कमल जोशी की कविताएँ उनके व्यक्तित्व की आत्मा हैं और उन्हें समझे बिना कमल जोशी को पूर्णतः समझना संभव नहीं है।

इसके पश्चात श्री निकोलस हॉफलैंड ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘आवारगी’ केवल एक डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि स्मृतियों, संवेदनाओं और रचनात्मक जीवन का सशक्त सिनेमाई दस्तावेज है। उन्होंने फिल्म की शोधपरकता, प्रस्तुति और भावनात्मक गहराई की सराहना की।
चाय पर खुली चर्चा में उपस्थित दर्शकों ने भी अपने विचार साझा किए।
फिल्म तथा कमल जोशी के व्यक्तित्व पर सार्थक संवाद में
उपस्थित प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रकार की डॉक्यूमेंट्री आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक, रचनात्मक और बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

कार्यक्रम का समापन कमल जोशी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए तथा सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।

यह आयोजन कमल जोशी के बहुआयामी व्यक्तित्व, उनके रचनात्मक अवदान और प्रकृति के प्रति उनके गहरे सरोकारों को याद करने का एक सार्थक अवसर सिद्ध हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!