उत्तराखंड में 31 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में ऑरेंज चेतावनी
मौसम विभाग ने भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और सड़कें बाधित होने की जताई आशंका, चारधाम यात्रियों से सतर्क रहने की अपील
देहरादून, 27 जुलाई। उत्तराखंड में सक्रिय मानसून के चलते अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), देहरादून ने 27 से 31 जुलाई तक राज्य के अधिकांश जिलों के लिए भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज गर्जना की चेतावनी जारी की है। विशेष रूप से 27 से 29 जुलाई के बीच कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ अत्यंत तीव्र वर्षा होने की आशंका व्यक्त की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार 27 जुलाई को देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी, नैनीताल, पिथौरागढ़, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ अत्यंत तीव्र वर्षा के दौर की भी संभावना है। राज्य के अन्य जिलों में भी भारी वर्षा और तेज गर्जना के साथ बारिश होने की चेतावनी दी गई है।
28 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान है। 29 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और टिहरी जिलों में भी ऐसी ही स्थिति रहने की संभावना है। 30 और 31 जुलाई को देहरादून, पौड़ी, बागेश्वर, नैनीताल तथा उत्तरकाशी के कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा का क्रम जारी रह सकता है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार भारी वर्षा के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़कों और राजमार्गों के अवरुद्ध होने, छोटी नदियों और गदेरों में अचानक जलस्तर बढ़ने तथा निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लगातार वर्षा के कारण प्रमुख नदियों और उनकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने, फ्लैश फ्लड, तट कटाव तथा बांधों और बैराजों से पानी छोड़े जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
आईएमडी ने यह भी कहा है कि भारी वर्षा के चलते बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने की आशंका है। कच्चे मकानों, निर्माणाधीन भवनों, पुलों, सुरंगों और अन्य कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। रेलवे संचालन, जिला मुख्यालयों, सरकारी एवं निजी संस्थानों, अस्पतालों, विद्यालयों तथा प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
चारधाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने कहा है कि अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा करें तथा यात्रा के दौरान खड़ी ढलानों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और उफनती नदियों-नालों से दूर रहें। भारी वर्षा के दौरान सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र को पार करने का प्रयास न करें और बाढ़ वाले क्षेत्रों में वाहन या पैदल प्रवेश न करें। पर्वतारोहण अभियानों को भी आवश्यक होने पर स्थगित करने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, जलविद्युत परियोजनाओं, बांध एवं बैराज प्रबंधन एजेंसियों को भी आवश्यक एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, नदी और नालों के किनारे बसे परिवारों तथा निचले इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। गरज-चमक के दौरान लोगों को घरों के भीतर रहने, पेड़ों के नीचे शरण न लेने तथा बिजली संचालित उपकरणों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
सात दिन के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 27 जुलाई से 2 अगस्त तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा और गरज-चमक के साथ बौछारों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। ऐसे में अगले एक सप्ताह तक लोगों को मौसम की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
