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अगस्त में अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर होंगे तीन बड़े स्पेसवॉक, सौर ऊर्जा और संचार प्रणाली को मिलेगा नया बल

Most spacewalks during the Apollo Program took place on the lunar surface and extended EVA durations past seven hours through upgrades to the spacesuits or Extravehicular Mobility Units (EMUs). Spacewalks conducted aboard Skylab in the mid-1970s proved the value of spacesuited astronauts to carry out repairs and maintenance of the space station – indeed, the EVA to free Skylab’s jammed solar array played a key role in saving the program. Similarly, beginning in the late 1970s, Soviet then Russian cosmonauts using ever-improved Orlan spacesuits proved the value of EVAs in inspecting, maintaining, repairing and augmenting space stations.

 

 -A NASA COMUNIQUE-

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) को भविष्य के लिए और अधिक सक्षम तथा सुरक्षित बनाने की दिशा में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अगस्त महीने में तीन महत्वपूर्ण स्पेसवॉक (अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर किया जाने वाला कार्य) आयोजित करने जा रही है। इन अभियानों के दौरान अंतरिक्ष यात्री स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, संचार प्रणाली को उन्नत करने और भविष्य में प्रस्तावित नियंत्रित डी-ऑर्बिट (पृथ्वी के वातावरण में सुरक्षित वापसी) की तैयारियों से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य करेंगे।

इन तीनों स्पेसवॉक के जरिए न केवल अंतरिक्ष स्टेशन के मौजूदा ढांचे को मजबूत किया जाएगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आने वाले वर्षों में भी आईएसएस वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष अभियानों का प्रमुख केंद्र बना रहे।

30 जुलाई को होगी मिशन की विस्तृत जानकारी

नासा 30 जुलाई को ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा, जिसमें आगामी स्पेसवॉक की विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। इस संवाद में नासा के लो-अर्थ ऑर्बिट कार्यक्रम के उप प्रबंधक बिल स्पेच तथा स्पेसवॉक फ्लाइट डायरेक्टर क्रिस डॉबिंस और क्लोई मेहरिंग मिशन की तकनीकी तैयारियों और उद्देश्यों की जानकारी देंगे।

पहला स्पेसवॉक 6 अगस्त को

पहला स्पेसवॉक 6 अगस्त को होगा। इसमें नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका मेयर और भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन अंतरिक्ष स्टेशन के “क्वेस्ट एयरलॉक” से बाहर निकलकर लगभग साढ़े छह घंटे तक कार्य करेंगे।

इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य स्टेशन के 3बी पावर चैनल में आवश्यक हार्डवेयर स्थापित करना है, ताकि भविष्य में नए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे (आईरोसा) को लगाया जा सके। यह नया सौर पैनल इस वर्ष के अंत तक स्टेशन तक पहुंचने की योजना है और यह सातवां आईरोसा होगा।

नया सौर पैनल स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाएगा, जिससे वैज्ञानिक प्रयोगों, जीवन समर्थन प्रणालियों तथा अन्य महत्वपूर्ण परिचालन कार्यों को अतिरिक्त ऊर्जा मिलेगी। नासा के अनुसार यह अतिरिक्त ऊर्जा भविष्य में अंतरिक्ष स्टेशन के सुरक्षित और नियंत्रित डी-ऑर्बिट अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यह जेसिका मेयर का छठा स्पेसवॉक होगा, जबकि डॉ. अनिल मेनन पहली बार अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर काम करेंगे। मेयर लाल धारियों वाला स्पेससूट पहनेंगी, जबकि मेनन बिना धारियों वाला सफेद स्पेससूट पहनेंगे।

दूसरा स्पेसवॉक 13 अगस्त को

13 अगस्त को होने वाले दूसरे स्पेसवॉक का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्पेस-टू-ग्राउंड संचार एंटीना को बदलना है।

यह एंटीना मिशन कंट्रोल सेंटर (ह्यूस्टन) और अंतरिक्ष स्टेशन के बीच उच्च गति से डेटा, वीडियो तथा अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान-प्रदान का प्रमुख माध्यम है। वर्षों से लगातार उपयोग के कारण इस प्रणाली का उन्नयन आवश्यक हो गया है। नए एंटीना के लगने से स्टेशन की संचार क्षमता और विश्वसनीयता में सुधार होगा।

तीसरा स्पेसवॉक 25 अगस्त को

25 अगस्त को होने वाले तीसरे स्पेसवॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्री बिजली आपूर्ति चैनलों के केबल तथा डेटा रिले सिस्टम को जोड़ने का कार्य करेंगे। यह भी स्टेशन के नियमित रखरखाव और भविष्य में प्रस्तावित डी-ऑर्बिट मिशन की तैयारियों का हिस्सा है।

इसी अभियान में “हार्मनी मॉड्यूल” के अग्र भाग पर लगे उस नेविगेशन उपकरण को भी बदला जाएगा, जिसका उपयोग आने वाले अंतरिक्ष यानों की सुरक्षित डॉकिंग के लिए किया जाता है। यह उपकरण अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाले कार्गो और मानवयुक्त अंतरिक्ष यानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुल 283 स्पेसवॉक का नया रिकॉर्ड

अगस्त में होने वाले ये तीनों अभियान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण, रखरखाव और आधुनिकीकरण के लिए किए जाने वाले क्रमशः 281वें, 282वें और 283वें अमेरिकी स्पेसवॉक होंगे।

स्पेसवॉक अंतरिक्ष अभियानों का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है। अंतरिक्ष यात्री शून्य गुरुत्वाकर्षण, अत्यधिक तापमान और विकिरण वाले वातावरण में कई घंटे तक काम करते हैं। प्रत्येक गतिविधि पहले से तय योजना के अनुसार संचालित की जाती है और पृथ्वी पर मौजूद मिशन कंट्रोल की टीम हर क्षण उनकी निगरानी करती है।

भविष्य के लिए हो रही तैयारी

नासा का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन दो दशकों से अधिक समय से वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रमुख मंच बना हुआ है। अब इसके संचालन के अंतिम वर्षों को ध्यान में रखते हुए इसकी ऊर्जा, संचार और सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि स्टेशन अपने शेष मिशनों को सुरक्षित ढंग से पूरा कर सके और भविष्य में इसके नियंत्रित डी-ऑर्बिट अभियान को भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सके।

अगस्त के ये तीनों स्पेसवॉक इसी व्यापक योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनसे प्राप्त अनुभव भविष्य के चंद्रमा तथा मंगल अभियानों में भी उपयोगी साबित होंगे।

 

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