कैंसर की चुनौती : 2030 तक देश में हर साल 20 लाख नए मामलों की आशंका

India faces a growing cancer burden, with an estimated 15.7 lakh new cases in 2025 and projections of nearly 20 lakh annually by 2030. While advanced treatment exists in major cities, rural and remote areas still lack timely diagnosis and affordable care. Tata Memorial Centre, under the Department of Atomic Energy, is addressing this gap by expanding its network to 11 facilities across seven states and supporting new centres such as the day-care facility inaugurated in Vidisha, Madhya Pradesh, in September 2026. Through a hub-and-spoke model and the National Cancer Grid linking over 380 institutions, the focus is on decentralising services, training local staff, reducing costs, and bringing quality cancer care closer to ordinary citizens.

— उषा रावत —
कैंसर के खिलाफ लड़ाई केवल अत्याधुनिक अस्पतालों, महंगी मशीनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए जरूरी है कि बीमारी का समय पर पता चले, इलाज आम आदमी की आर्थिक पहुंच में हो और मरीजों को उपचार के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर महानगरों की यात्रा न करनी पड़े। भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच यह चुनौती गंभीर होती जा रही है। देश के बड़े शहरों में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन ग्रामीण, पर्वतीय और पिछड़े क्षेत्रों में आज भी कैंसर की जांच और उपचार तक पहुंच कठिन है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन टाटा मेमोरियल सेंटर के माध्यम से कैंसर सेवाओं का क्षेत्रीय विस्तार स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना पैदा कर रहा है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2022 में देश में लगभग 14.6 लाख नए कैंसर मामले होने का अनुमान था, जबकि 2025 के लिए यह संख्या लगभग 15.7 लाख आंकी गई। सितंबर 2026 में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आशंका व्यक्त की कि 2030 तक प्रतिवर्ष करीब 20 लाख नए मामले सामने आ सकते हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि केवल महानगरों के अस्पतालों पर निर्भर रहकर बढ़ती आवश्यकता पूरी करना कठिन होगा।
टाटा मेमोरियल : उपचार के साथ अनुसंधान
मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन एक प्रमुख स्वायत्त संस्थान है। यह कैंसर की रोकथाम, निदान, उपचार, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में कार्यरत है। इसकी विशेषता आधुनिक चिकित्सा के साथ आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राहत प्रदान करना भी है।
उपलब्ध संस्थागत विवरणों के अनुसार, इसके प्रमुख केंद्रों में बड़ी संख्या में मरीजों को मुफ्त अथवा अत्यधिक रियायती उपचार दिया जाता है। कुछ विवरणों में ऐसे मरीजों का अनुपात लगभग 60 से 70 प्रतिशत बताया गया है, हालांकि यह अनुपात केंद्र, उपचार श्रेणी और पात्रता के अनुसार अलग हो सकता है।
इस संस्थान की भूमिका अब मुंबई तक सीमित नहीं है। पंजाब के मुल्लांपुर और संगरूर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी, आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, बिहार के मुजफ्फरपुर और असम के गुवाहाटी सहित विभिन्न स्थानों तक इसकी सेवाओं का विस्तार हुआ है। सरकारी जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 तक इसका नेटवर्क सात राज्यों में 11 अस्पतालों अथवा संस्थागत इकाइयों तक पहुंच चुका था।
विदिशा में क्षेत्रीय उपचार की पहल
आठ सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में कैंसर डे-केयर केंद्र का उद्घाटन इसी विस्तार का हिस्सा है। टाटा मेमोरियल सेंटर के तकनीकी सहयोग से यहां चरणबद्ध कैंसर उपचार प्रणाली विकसित की जा रही है।
इससे पहले जून 2026 में विशेषज्ञों ने स्थानीय सुविधाओं का आकलन किया। आयोजित जांच कार्यक्रम में 586 कैंसर रोगियों और 254 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई। इन मरीजों के लिए आगे की जांच और उपचार की व्यवस्था की गई। ये आंकड़े जांच शिविर से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें क्षेत्र में कैंसर की कुल व्यापकता का सूचक नहीं माना जा सकता।
विदिशा के दो चिकित्सकों और सात नर्सिंग अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे शल्य चिकित्सकों, पैथोलॉजी विशेषज्ञों और अन्य कर्मचारियों का प्रशिक्षण प्रस्तावित है। यहां आधुनिक रेडियोथेरेपी सुविधा तथा लीनियर एक्सीलरेटर स्थापित करने की योजना भी है, जिसके अगले दो से तीन वर्षों में कार्यशील होने की अपेक्षा व्यक्त की गई है।
बड़े अस्पतालों से छोटे केंद्रों को सहयोग
कैंसर उपचार के विकेंद्रीकरण के लिए बड़े विशेषज्ञ अस्पतालों और छोटे चिकित्सा केंद्रों के बीच सहयोग की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसे ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल कहा जाता है। इसमें बड़े अस्पताल विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और जटिल उपचार उपलब्ध कराते हैं, जबकि छोटे केंद्र प्रारंभिक जांच, नियमित उपचार और मरीजों की निगरानी करते हैं।
टाटा मेमोरियल सेंटर के नेतृत्व में राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सितंबर 2026 की सरकारी जानकारी के अनुसार, इससे 380 से अधिक कैंसर केंद्र, अनुसंधान संस्थान और संबंधित संगठन जुड़े हैं। साझा उपचार दिशानिर्देश, पैथोलॉजी मानक, ऑनलाइन विशेषज्ञ परामर्श और प्रशिक्षण इसके प्रमुख कार्य हैं। हालांकि राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड स्वयं औपचारिक हब एंड स्पोक व्यवस्था नहीं है; वह संस्थानों के बीच सहयोग का मंच है।
रोकथाम और सस्ती चिकित्सा पर जोर
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जोखिम कारकों को नियंत्रित करके कैंसर के अनेक मामलों की रोकथाम संभव है। तंबाकू, शराब, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, कुछ संक्रमण और पर्यावरणीय जोखिमों पर नियंत्रण महत्वपूर्ण है। भारत में मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की समय पर पहचान के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
टाटा मेमोरियल सेंटर कैंसर उपचार की लागत कम करने और कम दुष्प्रभाव वाली औषधियों की खोज पर भी अनुसंधान कर रहा है। महाराष्ट्र के खोपोली में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों और औषधीय पौधों से संबंधित अनुसंधान की पहल की गई है। हालांकि किसी नई औषधि को प्रभावी उपचार मानने से पहले वैज्ञानिक परीक्षण और सुरक्षा संबंधी प्रमाण आवश्यक हैं।
ग्रामीण और पर्वतीय भारत के लिए सबक
विदिशा का अनुभव उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के पर्वतीय राज्यों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। इन क्षेत्रों में लंबी दूरी, कठिन परिवहन और विशेषज्ञों की कमी कैंसर मरीजों की परेशानियां बढ़ाती हैं।
हर जिले में अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल बनाना संभव नहीं, लेकिन जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में जांच, उपयुक्त कीमोथेरेपी, विशेषज्ञ परामर्श और प्रशामक देखभाल विकसित की जा सकती है। गंभीर मरीजों के लिए बड़े अस्पतालों से प्रभावी रेफरल व्यवस्था आवश्यक है।
कैंसर से मुकाबले में अस्पतालों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। असली सफलता इस बात से मापी जाएगी कि कितने मरीजों की बीमारी समय पर पहचानी गई, कितनों को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिला तथा कितने परिवार इलाज के कारण आर्थिक संकट से बच सके।
कैंसर उपचार की अगली बड़ी उपलब्धि केवल नई मशीनों की स्थापना नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान की सुविधाओं को सामान्य नागरिक के घर के करीब पहुंचाना होगी। यही बढ़ते कैंसर संकट से निपटने की सबसे महत्वपूर्ण दिशा है।

