चमोली में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग ने पकड़ा जोर
भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री धामी को सौंपा ज्ञापन, सीमांत क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की कमी का उठाया मुद्दा

गोपेश्वर, 8 अक्टूबर (महिपाल गुसाईं)। सीमांत जिले चमोली में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। जिले में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के अभाव और गंभीर मरीजों को उपचार के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर ले जाने की मजबूरी को देखते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग उठाई। इससे पहले यह मांग भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और जिले के प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी के समक्ष भी रखी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने चमोली की विषम भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्र की सामरिक महत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों का उल्लेख किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि जिले में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को ऋषिकेश, देहरादून अथवा अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों में ले जाना पड़ता है। दूरस्थ क्षेत्रों से इन अस्पतालों की दूरी लगभग 300 किलोमीटर तक पहुंच जाती है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं के अलावा खेती-किसानी, पशुपालन, पेड़ों से गिरने और घास काटने के दौरान होने वाले हादसों में लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों और ट्रॉमा उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की जान पर बन आती है। आपातकालीन चिकित्सा में समय की अहम भूमिका होती है। जिले में मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध उच्चस्तरीय अस्पताल की स्थापना से अनेक लोगों की जान बचाई जा सकती है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि चमोली सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत जिला है। यहां के बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, लेकिन उनके परिवारों को भी बेहतर उपचार के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए मेडिकल कॉलेज की स्थापना केवल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का विषय नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा, सामाजिक विकास और जनकल्याण से भी जुड़ी है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने के साथ चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे नर्सिंग, पैरामेडिकल, तकनीकी सेवाओं तथा अन्य क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में भी सहायक हो सकता है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने सहित स्थानीय जनता हरसंभव सहयोग करने को तैयार है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस दिशा में शीघ्र ठोस पहल करने का अनुरोध किया।
प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रघुवीर सिंह बिष्ट, चमोली जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह रावत, नगर पालिका परिषद गोपेश्वर के अध्यक्ष संदीप सिंह रावत, पूर्व प्रमुख एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नंदन सिंह बिष्ट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खत्री, पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कृष्णमणि थपलियाल और बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व उपाध्यक्ष किशोर सिंह पंवार सहित अन्य भाजपा नेता शामिल थे।

