धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का टीएमयू आगमन, शिक्षा और अध्यात्म पर दिए विचार

मुरादाबाद, 18 जुलाई। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) में दिगंबर जैन परंपरा के पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज 24 संतों के साथ विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। इस अवसर पर कुलाधिपति परिवार, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक, छात्र-छात्राओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया।
गुरुवार सायंकाल विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री एवं संतों का स्वागत किया गया। इसके बाद ससंघ विश्वविद्यालय के जिनालय पहुंचे, जहां विधि-विधान से पाद-प्रक्षालन, मंगल आरती और पूजन संपन्न हुआ। इसके उपरांत संत भवन तक मंगल यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
शुक्रवार प्रातः रिद्धि-सिद्धि भवन में भगवान महावीर की शांतिधारा तथा अष्ट-द्रव्य अर्घ समर्पण का आयोजन किया गया। कुलाधिपति सुरेश जैन एवं उनके परिवार ने प्रथम जल-अर्घ समर्पित किया। इसके बाद दिगंबर जैन समाज, विश्वविद्यालय परिवार, शिक्षक, छात्र-छात्राओं तथा विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप और फल अर्पित किए।
इस अवसर पर आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने द्वारा रचित ‘वस्तुत्व महाकाव्य’ की प्रतियां कुलाधिपति सुरेश जैन, जीवीसी मनीष जैन तथा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन को भेंट कीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि यह ग्रंथ विश्वविद्यालय के जिनालय एवं केंद्रीय पुस्तकालय में अध्ययन और शोध के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति में विवेक, संस्कार और आत्मबोध का विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों से भारतीय आगमों तथा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के गंभीर अध्ययन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन ग्रंथों में निहित वैज्ञानिक और दार्शनिक विचारों का समकालीन संदर्भों में अध्ययन किया जाना चाहिए।
आचार्य श्री ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों के निरंतर विकास की कामना भी व्यक्त की।
इस दौरान चांसलर आवास ‘संवृद्धि’ में आचार्य श्री का आहार संपन्न हुआ, जबकि अन्य 24 संतों का आहार विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कराया गया। कार्यक्रम में कुलाधिपति परिवार की प्रथम महिला वीना जैन, ऋचा जैन, जहान्वी जैन, विश्वविद्यालय परिवार तथा दिगंबर जैन समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। विद्वान पंडित ऋषभ शास्त्री भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
शुक्रवार सायंकाल आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज एवं ससंघ ने विश्वविद्यालय परिसर से मंगल विहार किया। आयोजन के दौरान शिक्षा, अध्यात्म और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

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