पीएमश्री विद्यालयों के लिए सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा पर शिक्षक संदर्शिका तैयार, पांच दिवसीय कार्यशाला संपन्न

देहरादून, 28 जून। भारत सरकार द्वारा स्वीकृत पीएमश्री विद्यालयों में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL) एवं मानसिक स्वास्थ्य आधारित कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से कक्षा 6 से 12 तक के लिए आयोजित पांच दिवसीय शिक्षक संदर्शिका निर्माण कार्यशाला का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में वर्ष 2019 से ‘आनन्दम्’ कार्यक्रम के तहत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा का सफल संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए भी मानसिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा पर आधारित कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक संबंध स्थापित करने तथा जिम्मेदार निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना है।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने मिलकर कुल 32 गतिविधियां तैयार कीं, जिनका उपयोग शिक्षक कक्षा शिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के सामाजिक-भावनात्मक कौशल विकसित करने में करेंगे।
कार्यशाला का आयोजन उत्तराखंड की अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण निदेशक श्रीमती वंदना गर्ब्याल की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक डॉ. बी.पी. मैन्दोली, राज्य नोडल अधिकारी (पीएमश्री-SEL) रहे। इसमें एससीईआरटी, विभिन्न डायट संस्थानों के प्रवक्ताओं तथा पीएमश्री विद्यालयों के शिक्षकों सहित कुल 32 प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यशाला के संचालन एवं तकनीकी सहयोग में लभ्य फाउंडेशन, ड्रीम ए ड्रीम तथा अमेरिकन फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समापन समारोह में एससीईआरटी उत्तराखंड के अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी ने कहा कि विद्यार्थियों का सामाजिक एवं भावनात्मक विकास आज की शिक्षा व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य तथा जीवन कौशल को सुदृढ़ बनाने में प्रभावी सिद्ध होंगी।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कार्यशाला में विकसित गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, समानुभूति, संवाद कौशल, भावनात्मक प्रबंधन तथा सहयोगात्मक व्यवहार विकसित करने में सहायक होंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के समग्र, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने शिक्षक संदर्शिका को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने तथा विद्यार्थियों के सामाजिक, भावनात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
