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भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: रेरा पोर्टल से जुड़ेगा मानचित्र अनुमोदन, अवैध निर्माण पर सख्ती

 

 देहरादून, 30अप्रैल ।  राज्य में निर्माण गतिविधियों को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में सचिवालय में अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं की मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) की निर्माणाधीन वेबसाइट से जोड़ा जाएगा। इसके तहत सभी संबंधित मानचित्र स्वीकृति प्राधिकरणों को पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके।

बैठक में रेरा सदस्य नरेश मठपाल, पंकज कुलश्रेष्ठ, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह वर्निया, अपर जिलाधिकारी उत्तरकाशी मुक्ता मिश्रा, संयुक्त निदेशक पंचायती राज एमएस राणा, वरिष्ठ नगर एवं ग्राम नियोजक शशि मोहन श्रीवास्तव सहित विभिन्न प्राधिकरणों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान रेरा से संबंधित समस्याओं और निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया की जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर पुनर्विचार के संकेत
बैठक में 1 अगस्त 2025 के शासनादेश के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में हुई वृद्धि पर विशेष चर्चा हुई। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, आवासीय या पर्यटन उपयोग में परिवर्तन पर सर्किल रेट के बराबर तथा व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन पर 1.5 गुना शुल्क लिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि बढ़े हुए शुल्क के कारण आम लोगों को मानचित्र स्वीकृति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर आवास सचिव ने सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में इस विषय पर विचार कर एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजें, ताकि जनहित में राहत देने पर निर्णय लिया जा सके।

अधिसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का अधिकार समाप्त
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब पंचायती राज संस्थाओं को अधिसूचित क्षेत्रों में नक्शा पास करने का अधिकार नहीं रहेगा। 2025 के संशोधित अधिनियम की धारा-59 के तहत पंचायती राज अधिनियम की धारा-106 को निरस्त किए जाने के बाद अब केवल विकास प्राधिकरण ही इन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति देंगे। इस संबंध में आवास विभाग ने पंचायती राज विभाग को निर्देशित किया है कि वे तत्काल सर्कुलर जारी कर सभी जिला पंचायतों को नई व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

रेरा के जरिए कॉलोनियों पर कड़ी निगरानी
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्रों के बाहर यदि कहीं भूखंडों का उपविभाजन या कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो उस पर रेरा के माध्यम से सख्त निगरानी और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरणों और रेरा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए।

अवैध निर्माण रोकने के लिए कॉमन ड्राफ्ट तैयार होगा
राज्य में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर चिंता जताते हुए आवास सचिव ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया जाए। यह ड्राफ्ट सभी प्राधिकरणों के लिए समान कानूनी ढांचा उपलब्ध कराएगा, जिससे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगी। अधिकारियों को इसे शीघ्र शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

ऑनलाइन प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता
बैठक के अंत में आवास सचिव ने कहा कि रेरा पोर्टल के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी और आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने और तय समयसीमा के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

“रेरा पोर्टल से जुड़ेगी मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया” – डॉ. आर. राजेश कुमार
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य में निर्माण और विकास गतिविधियों को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। रेरा पोर्टल से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया जुड़ने से नागरिकों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिलेगी और समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को लेकर प्राप्त फीडबैक के आधार पर संशोधन पर विचार किया जाएगा, जबकि अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेरा और प्राधिकरणों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।

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