ज्योतिर्मठ पुनर्वास कार्यों की एनडीएमए ने की समीक्षा, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के दिए निर्देश

देहरादून, 9 जुलाई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की सदस्य रीता मिस्सल तथा सदस्य दिनेश कुमार असवाल ने गुरुवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में ज्योतिर्मठ भूधंसाव के बाद संचालित पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति, सामने आ रही चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। एनडीएमए के सदस्यों ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरे किए जाएं।
रीता मिस्सल ने कहा कि पुनर्वास कार्यों में स्थानीय समुदाय की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभी कार्य प्रभावित लोगों को विश्वास में लेकर किए जाएं, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और एनडीएमए ज्योतिर्मठ के प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़े हैं तथा पुनर्वास के साथ उनकी आजीविका को भी प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक में प्रभावित परिवारों को दिए जा रहे मुआवजे की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को मुआवजा वितरण समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
एनडीएमए सदस्य दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि ज्योतिर्मठ क्षेत्र में भूधंसाव का नियमित वैज्ञानिक जोखिम आकलन किया जाना आवश्यक है। साथ ही, भूधंसाव की सतत निगरानी के लिए आधुनिक मॉनिटरिंग उपकरण शीघ्र स्थापित किए जाएं, ताकि भूमि की गतिविधियों का वास्तविक समय में आकलन कर समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।
बैठक में एनडीएमए के सदस्यों ने विभिन्न विभागों से कार्यों के दौरान सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी ली और उनके समाधान पर भी चर्चा की। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार को यदि किसी भी प्रकार की तकनीकी या अन्य सहायता की आवश्यकता होगी, तो एनडीएमए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ज्योतिर्मठ पुनरुत्थान परियोजना के तहत 292 करोड़ रुपये की पहली किश्त मई 2025 में राज्य को प्राप्त हुई थी। इस राशि से ढाल स्थिरीकरण, टो प्रोटेक्शन, सीवर और ड्रेनेज सहित विभिन्न महत्वपूर्ण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। एनडीएमए के सदस्यों ने इन कार्यों की प्रगति पर संतोष जताते हुए गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने बताया कि असुरक्षित घोषित 55 भवनों को ध्वस्त करने के लिए चिन्हित किया गया है और यह कार्य शुरू हो चुका है। एनडीएमए ने इस प्रक्रिया में और तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि संभावित जोखिम को शीघ्र कम किया जा सके।
विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य सरकार ज्योतिर्मठ पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और बेहतर पुनर्वास उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में डॉ. एस.के. जेना, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, वरिष्ठ सलाहकार शशांक मिश्रा, वरिष्ठ सलाहकार अरुण कुमार नटराजन सुब्रमणियन, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष राजेश चंद्रा, सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष सुभाष चंद्रा, यूयूएसडीए के अपर निदेशक विनय मिश्रा, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, डॉ. मोहित पूनिया सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पीडीएनए-2025 की धनराशि के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा
बैठक में वर्ष 2025 की विभिन्न आपदाओं के बाद पीडीएनए-2025 के अंतर्गत स्वीकृत 811 करोड़ रुपये की धनराशि के प्राथमिकता के आधार पर उपयोग की रणनीति पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस मद में 182.67 करोड़ रुपये की पहली किश्त राज्य को प्राप्त हो चुकी है। एनडीएमए के सदस्यों ने निर्देश दिए कि उपलब्ध धनराशि का शीघ्र, प्रभावी और परिणामोन्मुख उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाई जा सके।
