बड़ी जात बगवाबासा पहुंची, बधाण की लोकजात वेदनी से लौटी
साफ मौसम में निखरी हिमशृंखलाओं ने यात्रियों को किया मंत्रमुग्ध
-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/देवाल, 18 सितम्बर। बेहद खुशगवार मौसम के बीच श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा शुक्रवार को अपने 15वें पड़ाव पातरनचौनियां और बगवाबासा पहुंच गई। वहीं बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की लोकजात यात्रा वेदनी में पूजा-अर्चना के बाद सिद्धपीठ देवराड़ा, थराली के लिए वापस लौट पड़ी है।
बड़ी जात यात्रा में शामिल दशोली, बण्ड और ज्वाल्पा की देव डोलियों, छंतोलियों और चौसिंगा खंडुओं के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने वेदनी कुंड में स्नान किया। इसके बाद यहां स्थित नंदादेवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर यात्रा 14वें पड़ाव वेदनी से आगे बढ़ी और 15वें तथा दूसरे निर्जन पड़ाव पातरनचौनियां और बगवाबासा पहुंची। दुर्गम यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं में खासा उत्साह बना हुआ है।

शनिवार को बड़ी जात यात्रा रहस्यमय रूपकुंड और यात्रा के सबसे कठिन रास्तों में शुमार ज्यूरागली से होकर 16वें तथा तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंचेगी।
इधर, बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की डोली शुक्रवार सुबह 13वें पड़ाव गैरोलीपातल से चलकर वेदनी बुग्याल पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने वेदनी कुंड की परिक्रमा की और पितरों को तर्पण देकर उनके तारण की प्रार्थना की। पूजा-अर्चना के बाद लोकजात की वापसी यात्रा शुरू हुई। डोली वेदनी बुग्याल से आली बुग्याल और दिदिना होते हुए रात्रि प्रवास के लिए देवाल विकासखंड के बांक गांव पहुंची। गांव पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया। शनिवार को यात्रा लोहाजंग और बगड़ीगाड़ होते हुए रात्रि प्रवास के लिए ल्वाणी गांव पहुंचेगी।

साफ मौसम में घंटों तस्वीरें खींचते रहे यात्री
पिछले छह दिनों से क्षेत्र में मौसम साफ और खुशगवार बने रहने से बड़ी जात में शामिल श्रद्धालु खासे उत्साहित हैं। शुक्रवार सुबह से दोपहर तक वेदनी, आली और आसपास के क्षेत्रों में आसमान बिल्कुल साफ रहा। यहां से दिखाई देने वाली त्रिशूली, नंदाघुंघटी सहित अन्य हिमशृंखलाएं धूप में चमकती नजर आईं।
सुबह करीब साढ़े छह बजे से ही श्रद्धालु इन दुर्लभ दृश्यों को अपने कैमरों और मोबाइल फोन में कैद करने में जुट गए। कई यात्री घंटों तक हिमालयी दृश्यों की तस्वीरें लेते रहे। श्रद्धालुओं का कहना था कि इतनी ऊंचाई पर इस तरह का साफ मौसम कम ही देखने को मिलता है। उन्होंने इन मनोरम दृश्यों को अपनी यात्रा का यादगार अनुभव बताते हुए इसे मां नंदा की कृपा माना।
