कैंसर के इलाज की नई राह खोल सकता है कोशिकाओं का यह ‘सुरक्षा ताला’
Ligand-independent activation of VEGFRs is a hallmark of diabetes and several cancers. Like EGFR, VEGFR2 is activated spontaneously at high receptor concentrations. VEGFR1, on the other hand, remains constitutively inactive in the unligated state, making it an exception among VEGFRs. Ligand stimulation transiently phosphorylates VEGFR1 and induces weak kinase activation in endothelial cells.

भारतीय वैज्ञानिकों ने VEGFR1 रिसेप्टर की उस प्रक्रिया को समझा, जो उसे अपने आप सक्रिय होने से रोकती है; कोलोन और गुर्दे के कैंसर की नई दवाओं के विकास में मिल सकती है मदद
-ज्योति रावत –
कैंसर के इलाज की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने कोशिकाओं के भीतर काम करने वाली एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक व्यवस्था को समझने में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि कोशिका की सतह पर मौजूद VEGFR1 नामक रिसेप्टर में एक तरह का प्राकृतिक ‘सुरक्षा ताला’ होता है, जो उसे बिना जरूरत अपने आप सक्रिय होने से रोकता है। भविष्य में इसी व्यवस्था को स्थिर रखने वाली दवाएं विकसित कर कुछ प्रकार के कैंसर को नियंत्रित करने की नई राह खोजी जा सकती है।
यह खोज भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), कोलकाता के डॉ. राहुल दास और उनकी टीम ने की है। वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से VEGFR1 और VEGFR2 नामक दो रिसेप्टरों के व्यवहार का अध्ययन किया। ये रिसेप्टर शरीर में नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नई रक्त वाहिकाओं का बनना भ्रूण के विकास, घाव भरने और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए जरूरी है, लेकिन यही प्रक्रिया ट्यूमर के विकास में भी भूमिका निभा सकती है।
आखिर VEGFR1 है क्या?
हमारे शरीर की कोशिकाओं की सतह पर कई प्रकार के रिसेप्टर होते हैं। इन्हें सरल भाषा में कोशिका के ‘सिग्नल रिसीवर’ कहा जा सकता है। बाहर से कोई विशेष रासायनिक संदेश मिलने पर ये सक्रिय होते हैं और कोशिका के भीतर आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर देते हैं।
VEGFR परिवार भी ऐसे ही रिसेप्टरों का समूह है। इसमें VEGFR1 और VEGFR2 महत्वपूर्ण हैं। सामान्य परिस्थितियों में इनका काम नियंत्रित ढंग से होना चाहिए। यदि ऐसे रिसेप्टर बिना उचित संकेत के सक्रिय होने लगें तो कोशिकाओं की सामान्य कार्यप्रणाली बिगड़ सकती है। रिसेप्टर टायरोसिन काइनेज की अनियंत्रित सक्रियता कैंसर सहित कई बीमारियों से जुड़ी पाई गई है।
VEGFR1 और VEGFR2 में मिला बड़ा अंतर
शोधकर्ताओं के सामने महत्वपूर्ण सवाल यह था कि एक ही परिवार के VEGFR1 और VEGFR2 का व्यवहार इतना अलग क्यों है।
VEGFR2 अपने निर्धारित रासायनिक संकेत यानी ‘लिगैंड’ के बिना भी स्वतः सक्रिय हो सकता है। इसके विपरीत VEGFR1 कोशिका में अधिक मात्रा में मौजूद रहने पर भी अपने आप सक्रिय नहीं होता। वैज्ञानिक इसी रहस्य को समझना चाहते थे।
अध्ययन में सामने आया कि VEGFR1 के भीतर एक विशेष आणविक व्यवस्था उसे निष्क्रिय अवस्था में बनाए रखती है। वैज्ञानिकों ने इसे एक असाधारण ‘आयनिक लैच’ कहा है। सामान्य पाठक इसे एक सूक्ष्म ‘सुरक्षा ताले’ के रूप में समझ सकता है। यह ताला VEGFR1 के एक हिस्से को उसके काइनेज क्षेत्र से बांधे रखता है और उसे अनावश्यक रूप से सक्रिय होने से रोकता है।
कैंसर से इसका क्या संबंध?
VEGFR1 का कैंसर से संबंध महत्वपूर्ण है। इसकी सक्रियता को कैंसर से जुड़े दर्द, स्तन कैंसर में ट्यूमर कोशिकाओं के जीवित रहने और मानव कोलोरेक्टल कैंसर कोशिकाओं के स्थानांतरण से जोड़ा गया है।
किसी ट्यूमर को बढ़ने के लिए ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसके लिए नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण महत्वपूर्ण हो जाता है। इस प्रक्रिया को ‘एंजियोजेनेसिस’ कहा जाता है। VEGFR परिवार इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यही कारण है कि वैज्ञानिक VEGFR1 की उस निष्क्रिय अवस्था में विशेष रुचि ले रहे हैं, जिसमें वह अनावश्यक रूप से सक्रिय नहीं होता।
नई दवाओं के लिए मिल सकता है लक्ष्य
इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भविष्य की दवाओं से जुड़ा है। यदि वैज्ञानिक ऐसे छोटे अणु विकसित कर सकें जो VEGFR1 को उसकी निष्क्रिय अवस्था में स्थिर रखें, तो संभव है कि उसके कारण पैदा होने वाले अवांछित संकेतों को नियंत्रित किया जा सके।
शोध में कोशिकीय टायरोसिन फॉस्फेट की भूमिका भी सामने आई है। वैज्ञानिकों ने संकेत दिया है कि इससे जुड़े मॉड्यूलेटर VEGFR1 के माध्यम से होने वाली असामान्य रक्त वाहिका निर्माण प्रक्रिया को नियंत्रित करने की चिकित्सीय क्षमता रख सकते हैं।
विशेष रूप से मानव कोलोरेक्टल कार्सिनोमा और गुर्दे के कैंसर के उपचार के लिए VEGFR1 की निष्क्रिय अवस्था को लक्ष्य बनाने वाले छोटे अणुओं में भविष्य की संभावनाएं देखी गई हैं।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि कैंसर की कोई नई दवा अभी तैयार हो गई है। यह फिलहाल बुनियादी वैज्ञानिक खोज है, जिसने यह समझने में मदद की है कि VEGFR1 अपने आप सक्रिय होने से कैसे बचता है। आगे इसी आणविक व्यवस्था को लक्ष्य बनाकर संभावित दवाओं पर शोध किया जा सकता है।
यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में केवल ट्यूमर को नष्ट करना ही नहीं, बल्कि उन कोशिकीय संकेतों को समझना भी जरूरी है जो ट्यूमर को बढ़ने और नई रक्त वाहिकाएं विकसित करने में मदद करते हैं। VEGFR1 का यह प्राकृतिक ‘सुरक्षा ताला’ भविष्य में ऐसी ही एक नई चिकित्सीय रणनीति का आधार बन सकता है।
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लेख का लिंक: https://doi.org/10.1038/s41467-024-45499-2
