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राहुल कोटियाल को चौथा पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार

 

  • पत्रकारों को अपनी प्रहरी की भूमिका नहीं भूलनी चाहिए : भारत भूषण
  • एक लाख रुपये की सम्मान राशि से नवाजे गए वरिष्ठ पत्रकार


देहरादून, 20 मई। जाने माने पत्रकार एवं ऑनलाइन पोर्टल ‘बारामासा’ के संस्थापक-संपादक राहुल कोटियाल को निष्पक्ष, बेबाक और साहसी पत्रकारिता के लिए चौथे पंडित भैरव दत्त धूलिया पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कर्मभूमि फाउंडेशन की ओर से दिए गए इस सम्मान में एक लाख रुपये की धनराशि, शॉल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

दून लाइब्रेरी में आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘मेल टुडे’ के संस्थापक-संपादक भारत भूषण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर कर्मभूमि फाउंडेशन के सचिव कैप्टन हिमांशु धूलिया ने पंडित भैरव दत्त धूलिया के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका तथा ‘कर्मभूमि’ समाचार पत्र के संपादक के रूप में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंडित धूलिया ने पत्रकारिता को जनसेवा और जनजागरण का माध्यम बनाया।
कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश नवानी ने कहा कि पत्रकारिता में मिशनरी भावना को बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया का दायित्व उन लोगों की आवाज बनना है, जो स्वयं अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रख सकते।
इसके बाद कैप्टन हिमांशु धूलिया ने पुरस्कार प्रशस्ति पत्र का वाचन किया और मुख्य अतिथि भारत भूषण ने राहुल कोटियाल को सम्मान प्रदान किया।
सम्मान ग्रहण करने के बाद राहुल कोटियाल ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी जिम्मेदारियों को और बढ़ाता है। उन्होंने स्वतंत्र और ईमानदार पत्रकारिता के सामने खड़ी आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज स्थिति यह बन गई है कि अखबारों के लिए विज्ञापन नहीं, बल्कि विज्ञापनों के लिए अखबार तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार, सहयोगियों और पाठकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि भारत भूषण ने बदलते मीडिया परिदृश्य और पत्रकारिता में विचारधारा की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक भारत में पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि जनजागरण का एक प्रभावी माध्यम भी थी। उन्होंने सरकारी विज्ञापनों पर बढ़ती निर्भरता को मीडिया में आत्म-सेंसरशिप का बड़ा कारण बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपनी प्रहरी की भूमिका कभी नहीं भूलनी चाहिए तथा समाचार, विश्लेषण और विचार को स्पष्ट रूप से अलग-अलग प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

यह प्रतिष्ठित पुरष्कार पाने वाले पहले पत्रकार जयसिंह रावत, दूसरे राजीव लोचन शाह और तीसरे रमेश पहाड़ी गैरोला थे।
कार्यक्रम के अंत में कर्मभूमि फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती धूलिया ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।

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