उत्तराखंड में बारिश का कहर: 11 मौतें, भूस्खलन से सड़कें बंद
देहरादून, 2 सितंबर। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर आफत बनकर सामने आया है। मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद राज्य के कई हिस्सों में नदी-नाले उफान पर आ गए, भूस्खलन हुए और मलबा सड़कों पर आने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। ताजा रिपोर्ट के अनुसार बारिश से जुड़े अलग-अलग हादसों में तीन बच्चों समेत कम-से-कम 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि एक व्यक्ति लापता है।
देहरादून में सबसे गंभीर हालात
देहरादून के कई इलाकों में तेज बारिश के कारण नालों और नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। प्रेमनगर के पौंधा क्षेत्र में तेज बहाव में एक कार बह गई, जिसमें दो लोगों की मौत हुई और एक युवती को SDRF ने बचा लिया।
मसूरी-देहरादून मार्ग भी लगातार बारिश से प्रभावित है। रात में मलबा हटाकर रास्ता खोला गया, लेकिन दोबारा बारिश होने से मार्ग फिर बंद हो गया। पानी और मलबे के कारण महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों पर आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है।
पहाड़ों में भूस्खलन से बढ़ी मुश्किल
पिथौरागढ़ में भारी बारिश के बाद भूस्खलन से कैलाश मानसरोवर मार्ग प्रभावित हुआ है। धर्चुला से व्यास, चौदास और दारमा घाटियों की ओर जाने वाला संपर्क भी बाधित हुआ, जिससे ऊंचाई वाले क्षेत्रों की आवाजाही और आवश्यक आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।
राज्य में पहले भी इस मानसून के दौरान 100 से ज्यादा सड़कें एक साथ बंद हो चुकी हैं। जुलाई में करीब 118 सड़कें मलबे और पत्थरों के कारण बंद बताई गई थीं, जिनमें रुद्रप्रयाग, देहरादून, चमोली, नैनीताल और पिथौरागढ़ प्रमुख रूप से प्रभावित थे।
नदियों और नालों के पास खतरा सबसे ज्यादा
लगातार बारिश के कारण छोटी नदियां और बरसाती नाले अचानक उफान पर आ रहे हैं। ऐसे में सामान्य दिखने वाले रास्ते और पुल भी कुछ ही मिनटों में खतरनाक हो सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और कमजोर पहाड़ी सड़कों पर जाने से बचने की अपील की है।
प्रशासन और बचाव दल सक्रिय
बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। जहां सड़कें मलबे से बंद हुई हैं, वहां मशीनों के माध्यम से रास्ता खोलने का काम किया जा रहा है। खराब मौसम के बीच स्कूलों को बंद करने और संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मौसम को लेकर आगे भी सतर्कता जरूरी
31 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ के खतरे को लेकर चेतावनी जारी की गई थी। उस समय रिपोर्टों में 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना, नदियों के उफान और जगह-जगह भूस्खलन की स्थिति बताई गई थी।
उत्तराखंड में इस समय सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ भारी बारिश नहीं, बल्कि बारिश के साथ अचानक आने वाला मलबा, भूस्खलन और फ्लैश-फ्लड जैसा तेज जलप्रवाह है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने से राहत और आवश्यक सेवाओं की पहुंच भी प्रभावित हो सकती है।
