हवन-यज्ञ, पूर्णाहुति एवं ब्रह्मभोज के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य समापन
— राजेश्वरी राणा-
पोखरी, 15 अप्रैल। विकासखंड पोखरी के अंतर्गत ग्राम पंचायत काण्डई-चन्द्रशिला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन आज हवन-यज्ञ, पूर्णाहुति एवं ब्रह्मभोज के साथ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के अनुरूप संपन्न हुआ। यह पुण्य आयोजन कुंवरी देवी नेगी द्वारा अपने स्वर्गीय पति सुबेदार ध्यान सिंह नेगी तथा भरत सिंह नेगी, डॉ. जगमोहन सिंह नेगी और भूपेंद्र सिंह नेगी द्वारा अपने पूज्य स्वर्गीय पिता सुबेदार ध्यान सिंह नेगी के पितृमोक्ष एवं आत्मिक शांति की कामना से 8 अप्रैल से प्रारंभ किया गया था।
सात दिवसीय इस पावन कथा के दौरान पूरा काण्डई-चन्द्रशिला क्षेत्र हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। कथा व्यास विष्णु प्रसाद किमोठी ने अपने गूढ़, भावपूर्ण और तत्वज्ञान से परिपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में गोता लगाने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण, पापों के क्षय और मोक्ष की प्राप्ति का दिव्य मार्ग है।
कथा के सातों दिनों में उन्होंने राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप और उनके मोक्ष की कथा, गौकर्ण महाराज द्वारा अपने भ्राता धुंधकारी की मुक्ति का अद्भुत प्रसंग, भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति और हिरण्यकश्यप के उद्धार, ध्रुव की कठोर तपस्या, उद्धव-गोपी संवाद तथा गोपी गीत की मार्मिकता का विस्तार से वर्णन किया। इसके साथ ही जरासंध के बार-बार आक्रमण, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा समुद्र के मध्य द्वारिका नगरी की स्थापना, रुक्मिणी, सत्यभामा और जामवती सहित उनके दिव्य विवाह प्रसंग, कंस वध, ऋषियों के श्राप से यदुवंश का अंत तथा अंत में भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन की लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया।
अपने प्रवचनों में उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे ईश्वर भक्ति, सत्संग तथा सेवा में लगाना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा कि सुख और दुःख, दोनों ही परिस्थितियों में भगवान के चरणों में समर्पण ही जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए। गुरु की कृपा, करुणा और ज्ञान से ही जीवन में प्रकाश आता है और जीव का कल्याण संभव होता है।
अंतिम दिवस पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। इसके पश्चात विशाल ब्रह्मभोज का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पूरे आयोजन के दौरान कीर्तन मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन पर झूमते हुए भक्ति-रस में सराबोर दिखाई दिए और पूरा क्षेत्र “हरि नाम” के जयघोष से गूंज उठा।
इस पावन अवसर पर आचार्य रामेश्वर किमोठी, आचार्य ब्रह्मानंद किमोठी, आचार्य अनूप किमोठी, आचार्य संजय किमोठी, पीजी कॉलेज गोपेश्वर के प्राचार्य प्रो. एम.के. नगवाल, डॉ. रमाकांत यादव, राजेंद्र सिंह नेगी, रघुवीर नेगी, देवेंद्र नेगी, सुरेंद्र नेगी, सुमन देवी नेगी, ताजबर सिंह नेगी, मातबर सिंह नेगी, विक्रम नेगी, मुकेश नेगी, मनोज नेगी, अंशुल नेगी, रणजीत सिंह राणा, हेमराज सिंह राणा, रेखा देवी नेगी, डॉ. विनीता देवी नेगी, प्रियंका देवी नेगी, शशि देवी, राजेश्वरी देवी, उर्मिला देवी, अंजू देवी, विमला देवी, विजया देवी, पूनम देवी, रेखा देवी रावत, कु. निधि, मयंक रावत, विनीत नेगी, वैभव नेगी सहित कीर्तन मंडली के सदस्य, नेगी परिवार के सभी सदस्य, ग्रामवासी महिलाएं, पुरुष, बच्चे, बुजुर्ग तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस दिव्य आयोजन ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया और श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, श्रद्धा तथा भगवान के प्रति अटूट विश्वास को और अधिक प्रगाढ़ बनाया।
