चमोली जिले की नंदाकिनी घाटी में मोक्ष नदी में बाढ़ से सेरा सहित कई गांवों पर संकट

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ऊपर से गिरती चट्टान, नीचे नदी का बढ़ता जलस्तर, लोगों की सांस अटकाने का सबब बनी

–उत्तराखंड हिमालय ब्यूरो–

नंदानगर (घाट), 7 अगस्त। इस विकासखंड के अंतर्गत बीती रात भारी बारिश के कारण अचानक बढ़े मोक्ष नदी के जलस्तर ने पूरे इलाके के लोगों की नींद उड़ा दी। मोक्ष नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण रातभर जागते रहे।

 

सेरा गांव के ऊपर से चट्टान गिरने और निचले स्तर पर मोक्ष नदी व नन्दा नगर घाट से नंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही गांव तथा इलाके के अन्य आवासीय क्षेत्रों में खतरा उत्पन्न हो गया है। नतीजतन ग्रामीण सहमे हुए हैं। स्थिति यह है कि सेरा गांव, धुर्मा, ग्वाड़ बगड़ आदि गांवों को भारी खतरा उत्पन्न हो गया हैं। यही नहीं प्राथमिक विद्यालय, पंचायत घरों के साथ ही घराटों को भारी खतरा उत्पन्न हो गया है।


शनिवार की देर रात से शुरू हुई भारी बारिश के कारण मोक्ष नदी का जलस्तर बढ़ जाने के कारण सेरा गांव को भारी खतरा उत्पन्न हो गया हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुण्डी- मोख मल्ला मोटर मार्ग के निर्माण के चलते सारा मलबा मोक्ष नदी में डाल दिया गया था। इस कारण बरसात में पिछले वर्षों की अपेक्षा मोक्ष नदी ने विकराल रूप धारण कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि बीती रात भारी बारिश के कारण लगातार नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों को पूरी रात आंखों में बितानी पड़ी और मौसम के मिजाज तथा नदी का रौद्र रूप देख ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। बेशक अभी जान माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है लेकिन खेत खलिहानों को भारी नुकसान हुआ है साथ ही संपर्क मार्ग टूट गए हैं। इस कारण आवाजाही प्रभावित हो रही है, ऊपर से नदी का विकराल रूप लोगों को भयभीत कर रहा है।

 

सेरा गांव की शारदी देवी, नोरती देवी, संग्रामी देवी, रामी देवी, गोदावरी देवी, बिक्रम सिंह रावत, महाबीर सिंह रावत, कर्ण सिंह रावत, हिम्मत सिंह रावत, चन्दन सिंह रावत, दिलवर सिंह नेगी, महिपाल सिंह नेगी, इन्द्र सिंह नेगी, मानसिंह रावत, यशवन्त सिंह रावत, जगत सिंह रावत आदि
ने सड़क निर्माण के कार्यदाई विभाग को आड़े हाथों लेते हुए शासन-प्रशासन से नदी में पड़े मलूवे को हटाने के साथ सुरक्षात्मक उपायों के तहत तटबंधों का निर्माण किए जाने की मांग की है।

लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर  है कि सड़क निर्माण के मलबे का उचित निपटान करने के बजाय उसे नदी में डाल दिया गया और उसकी कीमत बेकसूर लोग चुका रहे हैं।

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