प्रेम पत्र को लिखने की कला का यह पहला ऐतिहासिक नमूना था

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा
I consider this letter the climax of the art of epistlary … इस पौराणिक प्रसंग को पढते समय मुझे आंख कवि John Donne की ये पंक्तियां याद आई -More than kisses, letters mingle souls.John Donne
धार्मिक साहित्य में स्तुतिवाचन की एक विधा प्रेम निवेदन भी है । वेदव्यास जी इस विधा में माहिर थे इसलिए उन्होने श्रीमद्भागवत में रुक्मिणी प्रसंग के बहाने श्रीकृष्ण से प्रणय निवेदन किया । रुक्मिणी ने स्वयं अपने अपहरण की योजना बनाई और श्रीकृष्ण से कहा इन गिद्धों से मुझे बचा लो …मैने आपके सौन्दर्य और गुणों की खूब प्रशंसा सुनी है जो तीनों लोकों में व्याप्त है । कहा जाय तो श्रीमद्भगवत मूलतः प्रेमियों का साहित्यिक ग्रन्थ है ,इसमें गोपीगीत , वेणुगीत और महारास के प्रसंग सभी श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेमप्रसंगों से ओत प्रोत हैं। शायद संपूर्ण संस्कृत साहित्य में यह पहला प्रेमपत्र है …उसके बाद तो लगभग सभी कवियों ने प्रेमकाव्य लिखे हैं जिनमें सबसे पहले मैं कालिदास का नाम लूंगा -मेघदूतं और अभिज्ञान शाकुन्तलम वस्तुतः प्रेमकथाए ही हैं ।
भागवत के कथाकार रुक्मिणी के इस प्रेम पत्र को मंगलाचरण के तौर पर पाठ करते हैं ..
श्रुत्वा गुणान् भुवनसुंदर शृण्वतां तेाा
निर्विश्य कर्णविवरैः हरतोऽङ्ग तापम् ।
रूपं दृशां दृशिमतां अखिलार्थलाभं
त्वय्यच्युताविशति चित्तमपत्रपम् मे ॥१॥
का त्वा मुकुन्द महतीकुलशीलरूप-
विद्यावयोद्रविणधामभिरात्मतुल्यम् ।
धीरा पतिं कुलवती न वृणीत कन्या
काले नृसिंह नरलोकमनोभिरामम् ॥२॥
तन्मे भवान् खलु वृतः पतिरङ्ग जाया-
मात्मार्पितश्च भवतोऽत्र विभो विधेहि ।
मा वीरभागमभिमर्शतु चैद्य आरात्
गोमायुवन्मृगपतेः बलिमम्बुजाक्ष ॥३॥……
पूर्तेष्टदत्तनियमव्रतदेवविप्र-
गुर्वर्चनादिभिरलं भगवान् परेशः
आराधितो यदि गदाग्रज एत्य पाणिं
गृह्णातु मे न दमघोषसुतादयोन्ये ॥४॥
इस साफ्टवेयर टेक्नोलॉजी के युग में प्रेमपत्र गायब ही हो गये । एक महिला लिखती है कि -Sending a handwritten letter is becoming such an anomaly. It’s disappearing. My mom is the only one who still writes me letters. And there’s something visceral about opening a letter – I see her on the page. I see her in her handwriting.” – Steve Carell…
