मुख्य सचिव का ऐलान : उत्तराखंड में गैस, ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता, घबराने की जरूरत नहीं
चारधाम यात्रा से पहले मांग-आपूर्ति संतुलन, जमाखोरी पर सख्ती और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के निर्देश
देहरादून, 28 मार्च। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर उत्तराखंड सरकार ने राज्य में गैस, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में घरेलू और वाणिज्यिक गैस की उपलब्धता, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों की जरूरतों, आगामी चारधाम यात्रा के दौरान संभावित बढ़ी हुई मांग, उर्वरकों की स्थिति, पीएनजी पाइपलाइन विस्तार, सीएनजी आपूर्ति, कालाबाजारी और जमाखोरी पर नियंत्रण, अफवाह प्रबंधन तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
राज्य में पर्याप्त आपूर्ति, पैनिक की जरूरत नहीं
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने स्पष्ट कहा कि राज्य में गैस, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक घबराहट से बचें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता तक सही और समयबद्ध सूचना पहुंचाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर प्रतिदिन प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की जाए, ताकि अफवाहों और भ्रम की स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
वैश्विक संकट को अवसर में बदलने पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को उत्तराखंड के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने और वर्ष 2070 तक कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य हासिल करने के लिए घरेलू, औद्योगिक और परिवहन क्षेत्रों में ग्रीन एनर्जी और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने पीरूल ब्रिकेट, बायोगैस प्लांट, सोलर चूल्हे और सोलर कुकर को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। नगर निकायों को बायोगैस प्लांट स्थापित करने की दिशा में तेजी लाने और ऊर्जा विभाग को वैकल्पिक ऊर्जा के विस्तार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
चारधाम यात्रा को देखते हुए विशेष तैयारी
मुख्य सचिव ने पर्यटन और पूर्ति विभाग को निर्देशित किया कि आगामी चारधाम यात्रा के दौरान गैस और ईंधन की बढ़ती मांग का सटीक आकलन कर अग्रिम कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि यात्रा सीजन में आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर अतिरिक्त ईंधन और गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही शादी-विवाह जैसे आयोजनों के मद्देनजर भी अतिरिक्त गैस व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी स्तर पर उपभोक्ताओं को असुविधा न हो।
कालाबाजारी, जमाखोरी और सीमा क्षेत्रों में विशेष निगरानी
बैठक में गैस, कच्चे तेल और उर्वरकों की कालाबाजारी तथा जमाखोरी रोकने के लिए कड़ी प्रवर्तन कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में निगरानी और सर्विलांस बढ़ाने को कहा। उन्होंने गैस एजेंसियों और वितरकों पर नियमित निगरानी रखने, स्टॉक रजिस्टर की दैनिक जांच करने और आपूर्ति में असंतुलन की स्थिति में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता और दुरुपयोग पर रोक
मुख्य सचिव ने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि यूरिया का अनावश्यक भंडारण किसी भी स्थिति में न होने दिया जाए। उन्होंने कहा कि एग्रीटेक, फार्मर रजिस्ट्री और वास्तविक खेती के आंकड़ों का मिलान करते हुए उर्वरक वितरण प्रणाली को तकनीकी रूप से जोड़ा जाए, ताकि दुरुपयोग रोका जा सके और जरूरतमंद किसानों तक पारदर्शी तरीके से उर्वरक पहुंच सके।
पीएनजी पाइपलाइन विस्तार और उद्योगों में ग्रीन गैस उपयोग पर बल
बैठक में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पीएनजी पाइपलाइन से संबंधित अनुमतियां प्राथमिकता के आधार पर तत्काल प्रदान की जाएं। मुख्य सचिव ने कहा कि फार्मा सहित विभिन्न उद्योगों में पाइपलाइन आधारित गैस उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि एलपीजी और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो और ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी से प्रगति हो। उन्होंने सीएनजी और पीएनजी नेटवर्क विस्तार को राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ते हुए इसे प्राथमिकता का विषय बताया।
परिवहन क्षेत्र को ग्रीन एनर्जी आधारित बनाने की पहल
मुख्य सचिव ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परिवहन क्षेत्र को धीरे-धीरे ग्रीन एनर्जी आधारित मॉडल की ओर ले जाना होगा, जिससे न केवल ईंधन आयात पर दबाव कम होगा, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी राज्य को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
खाड़ी देशों में फंसे प्रवासियों के लिए सहायता तंत्र सक्रिय
बैठक में खाड़ी देशों और मिडिल ईस्ट में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों की सहायता के लिए भी विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने राज्य स्तर पर विशेष सचिव निवेदिता कुकरेती को नोडल अधिकारी नामित किया, जबकि जिलों में भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और टोल-फ्री नंबर जारी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में प्रवासी उत्तराखंडियों और उनके परिजनों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए।
वरिष्ठ अधिकारी और जिलाधिकारी बैठक में रहे शामिल
बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, एल.एल. फैनई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल के राज्य स्तरीय अधिकारी सचिवालय सभागार में उपस्थित रहे, जबकि सभी जिलों के जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक से जुड़े।
सरकार का संदेश स्पष्ट: आपूर्ति पर्याप्त, अफवाहों से बचें
राज्य सरकार ने साफ संदेश दिया है कि उत्तराखंड में गैस, ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार एक ओर जहां आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने पर फोकस कर रही है, वहीं दूसरी ओर चारधाम यात्रा, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा, पीएनजी विस्तार और कड़े प्रवर्तन के जरिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
