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प्रधानमंत्री के भाषण में नंदादेवी राजजात का उल्लेख, तैयारियों को मिल सकता है नया बल

— हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट
थराली, 16 अप्रैल। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देहरादून में देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेस इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण के दौरान अपने भाषण में श्री मां नंदादेवी राजजात यात्रा का उल्लेख किए जाने से इस आसन्न यात्रा को लेकर संभावनाएं बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि अब केंद्र और राज्य सरकार इस ऐतिहासिक यात्रा को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटा सकती हैं।
देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेस इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड, गढ़ी कैंट में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार मां नंदादेवी राजजात यात्रा का जिक्र किया, उससे न केवल उत्तराखंड बल्कि देशभर और हिंदू धर्मावलंबियों के बीच इस यात्रा को लेकर एक सकारात्मक संदेश गया है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मां नंदादेवी राजजात यात्रा का उल्लेख करते हुए नारी शक्ति वंदन विधेयक के संदर्भ में देवभूमि उत्तराखंड के लोगों की मां नंदा के प्रति गहरी आस्था का विशेष उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने आगामी राजजात यात्रा की चर्चा करते हुए इस आयोजन के महत्व को रेखांकित किया। उनके इस उल्लेख से यात्रा आयोजकों तथा प्रदेश के जनमानस में यह उम्मीद जगी है कि केंद्र और राज्य सरकार इस यात्रा को भव्य रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।
दरअसल, पारंपरिक रूप से 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाली मां नंदादेवी राजजात यात्रा का आयोजन वर्ष 2026 में प्रस्तावित माना जा रहा है, किंतु अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसका आयोजन इसी वर्ष होगा अथवा वर्ष 2027 में किया जाएगा। इस अनिश्चितता के बीच अभी तक तैयारियों की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
वर्तमान में बधाण क्षेत्र, जहां राजजात यात्रा के सर्वाधिक पड़ाव निर्धारित हैं तथा गढ़वाल और कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली छतौलियों, देव डोलियों और निशानों का मिलन भी यहीं होता है, वहां अब तक मुख्य रूप से लोक निर्माण विभाग द्वारा ही कार्य किए जा रहे हैं। राजजात के अंतर्गत राज्य मार्ग संख्या 90 थराली–देवाल–मंदोली–वांण तथा राज्य मार्ग संख्या 91 ग्वालदम–नंदकेशरी मोटर मार्गों पर लगभग 47 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की लागत से कार्य चल रहे हैं।
हालांकि 52.20 किलोमीटर लंबे थराली–देवाल–मंदोली–वांण राज्य मार्ग पर अभी तक न तो पूर्ण चौड़ीकरण किया जा रहा है और न ही पूरे मार्ग पर हॉट मिक्स का कार्य प्रस्तावित है। इस मार्ग पर केवल लगभग 22 किलोमीटर हिस्से में ही टुकड़ों में हॉट मिक्स की स्वीकृति दी गई है, जिससे समूचे मार्ग की गुणवत्ता को लेकर सवाल बने हुए हैं।
इसके अतिरिक्त लगभग 280 से 290 किलोमीटर लंबी राजजात यात्रा के 19 से 22 प्रमुख पड़ावों वाले पैदल मार्गों पर अभी तक समुचित पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और यात्रियों के ठहराव के लिए ठोस व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक रणनीति तैयार नहीं की गई है। विभिन्न विभागों को आवश्यक कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि भी अब तक जारी नहीं हो सकी है, जिससे यात्रा की तैयारियों पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।
हालांकि हाल के दिनों में ग्रामीण निर्माण विभाग तथा जल संस्थान द्वारा राजजात से संबंधित कुछ कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं, किंतु यात्रा के व्यापक स्वरूप को देखते हुए वर्तमान प्रयास अभी अपर्याप्त माने जा रहे हैं।
ऐसे में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने सार्वजनिक मंच से मां नंदादेवी राजजात यात्रा तथा हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ का उल्लेख किए जाने को तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संभावना प्रबल हुई है कि अब यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर सरकारी स्तर पर अधिक सक्रियता दिखाई जा सकती है और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को भी गति मिल सकती है।
इस संबंध में थराली विधानसभा के विधायक भूपाल राम टम्टा का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से मां नंदादेवी राजजात यात्रा का उल्लेख किया जाना अपने आप में ऐतिहासिक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री को इस यात्रा के महत्व और उससे जुड़े विषयों की पूरी जानकारी है तथा वे इसके सफल आयोजन को लेकर गंभीर भी हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के इस सकारात्मक रुख को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें अब यात्रा की तैयारियों को और अधिक गति देंगी। इससे यह भी उम्मीद की जा रही है कि आयोजन और यात्रा संचालन के दौरान किसी प्रकार की बड़ी समस्या सामने नहीं आएगी तथा मां नंदादेवी राजजात यात्रा को दिव्य और भव्य स्वरूप में संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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