चम्पावत प्रकरण को लेकर देहरादून में प्रदर्शन
नाबालिग बच्चियों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप
देहरादून, 9 मई। चम्पावत में एक नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होने और उसके बाद सामने आए घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए उत्तराखंड महिला मंच ने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ शुक्रवार को गांधी पार्क, देहरादून में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नेता अपने राजनीतिक हितों के लिए नाबालिग बच्चियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत ने कहा कि भाजपा सरकार अपने लोगों से जुड़े मामलों में लगातार लीपापोती करती रही है। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि आज तक वीआईपी का खुलासा नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चम्पावत मामले में पुलिस कुछ ही घंटों में इस निष्कर्ष पर पहुंच गई कि मामला फर्जी है, जबकि पुलिस ने स्वयं बच्ची को एक कमरे में निर्वस्त्र और रस्सियों से बंधी अवस्था में बरामद किया था।
उन्होंने कहा कि घटना के बाद बच्ची के पिता को नजरबंद किया गया और मामले की सच्चाई सामने लाने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों से सफाई दिलाई गई। कमला पंत ने कहा कि भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड ऐसे मामलों में तथ्यों को दबाने का रहा है।
महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि यदि पुलिस की कहानी को सही भी मान लिया जाए, तब भी यह गंभीर सवाल है कि भाजपा से जुड़े लोग अपनी अंदरूनी राजनीतिक लड़ाई में बच्चियों का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि पुलिस ऐसे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आते रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट ने कहा कि पुलिस जिस कमल रावत को इस कथित साजिश का सूत्रधार बता रही है, वह पहले भी एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जेल जा चुका है और बाद में हाईकोर्ट से रिहा हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय पुलिस ने मामले को फर्जी क्यों नहीं बताया और न ही हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की।
प्रदर्शन को ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, सुजाता पॉल, स्वाति नेगी, विमला कोली, गीतिका, ऊमा भट्ट, विजय भट्ट और मनीष केडियाल सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने की अपील की।
इस दौरान प्रो. राघवेन्द्र, डॉ. रवि चोपड़ा, ईश्वर पाल शर्मा, पद्मा गुप्ता, विजय नैथानी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
महिला मंच ने जारी किया अलग वक्तव्य
इधर, मामले में सामने आए नए घटनाक्रम के संदर्भ में उत्तराखंड महिला मंच ने एक अलग वक्तव्य जारी कर पुलिस और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
वक्तव्य में कहा गया कि जिस पुलिस ने लड़की को कमरे में बंद, पैरों में रस्सियों से बंधा और निर्वस्त्र अवस्था में पाया था, वही पुलिस अब पूरे मामले को फर्जी बता रही है। मंच ने आरोप लगाया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी को स्वयं सामने आकर दुष्कर्म न होने की सफाई देनी पड़ी, जबकि आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दायर करने के बजाय पिता-पुत्री को दो दिनों तक नजरबंद रखा गया।
महिला मंच ने आरोप लगाया कि बिना निष्पक्ष न्यायिक जांच शुरू किए, कथित रूप से दबाव, डर और लालच के जरिए बयान बदलवाने की कोशिश की गई। मंच के अनुसार, जिस तेजी से सरकार और प्रशासनिक मशीनरी ने इस गंभीर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया, उससे सरकार का “चाल, चरित्र और चेहरा” उजागर हो गया है।
