उत्तरकाशी में प्राचीन पांडुलिपियों का होगा व्यापक सर्वेक्षण, GYAN BHARATAM APP से होगा अभिलेखीकरण
उत्तरकाशी, 30 जुलाई। जनपद में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों, ग्रंथों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान, संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत सरकारी और निजी पुस्तकालयों, संग्रहालयों, संस्कृत महाविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, मंदिरों, आश्रमों तथा निजी संग्राहकों के पास मौजूद पांडुलिपियों को सर्वेक्षण में शामिल किया जाएगा।
राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत सर्वेक्षण का कार्य ‘GYAN BHARATAM APP’ के माध्यम से किया जाएगा। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों, शोधकर्ताओं, संस्कृत एवं प्राचीन भाषाओं के विशेषज्ञों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित विभागों को अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपद में बिखरी पड़ी प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान कर उनका अभिलेखीकरण एवं डिजिटलीकरण किया जाना जरूरी है, ताकि इस अमूल्य सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सर्वेक्षण कार्य समयबद्ध तरीके से संचालित करने तथा विभिन्न विभागों और संस्थानों के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। अभियान के माध्यम से पांडुलिपियों का चिन्हीकरण करने के साथ उनके संरक्षण की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
यह अभियान भारत सरकार के ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण, अभिलेखीकरण और डिजिटलीकरण कर उन्हें भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
बैठक में सचिव यमुनोत्री मंदिर समिति सुनील उनियाल, पीजी कॉलेज के प्राचार्य पंकज पंत, प्रताप सिंह बिष्ट सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
