धराली आपदा की पहली बरसी पर कांग्रेस ने पुनर्वास और मुआवजे को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
देहरादून, 5 अगस्त। उत्तरकाशी जिले के धराली (भागीरथी घाटी) में 5 अगस्त 2025 को आई आपदा की पहली बरसी पर कांग्रेस ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और आजीविका बहाली के मुद्दे उठाते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि आपदा के एक वर्ष बाद भी कई प्रभावित परिवार स्थायी पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अनेक लोगों को अपनी आर्थिक क्षति के अनुरूप मुआवजा नहीं मिला है, जबकि स्थानीय कारोबारियों और किसानों को अब भी आजीविका बहाल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. सिंह के अनुसार, धराली बाजार में होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन राहत राशि वास्तविक नुकसान की तुलना में पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि कई व्यापारी अब भी आर्थिक संकट और कर्ज के दबाव से जूझ रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हर्षिल-धराली क्षेत्र के सेब उत्पादकों को भी आपदा के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। उनके अनुसार, मलबे में दबे बागानों के पुनरुद्धार और किसानों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि विस्थापित परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए। उनका दावा है कि कुछ प्रभावित परिवार अभी भी अस्थायी व्यवस्था या किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने भूवैज्ञानिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों और वैज्ञानिक आधार पर पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ. प्रतिमा सिंह ने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि मानसून के दौरान कुछ स्थानों पर सड़क में दरारें और भू-धंसाव जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन पर स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप सहायता, शीघ्र स्थायी पुनर्वास तथा आजीविका बहाली के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस प्रभावित लोगों की आवाज उठाना जारी रखेगी।
सरकार की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी
