क्षेत्रीय समाचार

नरेंद्रनगर महाविद्यालय में डिजिटल मीडिया साक्षरता पर कार्यशाला आयोजित

  •  डिजिटल मीडिया पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, सूचनाओं की सत्यता परखना जरूरी : दीक्षा राणा
  •  विशेषज्ञों ने बताए फर्जी सूचनाओं, साइबर अपराधों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के खतरों से बचने के उपाय

नरेंद्रनगर, 2 नवंबर। धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत सोमवार को डिजिटल मीडिया साक्षरता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव, फर्जी सूचनाओं की पहचान, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और दुरुपयोग तथा डिजिटल माध्यमों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी।

महाविद्यालय के रूसा सभागार में प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि नरेंद्रनगर की ब्लॉक प्रमुख दीक्षा राणा, जिला पंचायत सदस्य हुकुम सिंह भंडारी, महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर विजय सिंह नेगी तथा अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि दीक्षा राणा ने कहा कि डिजिटल और सोशल मीडिया आज सूचना एवं संचार के महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। इनके अनेक सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन गलत और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से समाज के सामने नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध प्रत्येक सूचना को सही मान लेना उचित नहीं है। किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसके स्रोत और विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है। जिला पंचायत सदस्य हुकुम सिंह भंडारी ने डिजिटल माध्यमों के सकारात्मक और जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया।

विषय विशेषज्ञ के रूप में न्यूज़ पोटली के संचालक अरविंद शुक्ला ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल मीडिया की उपयोगिता और उसके दुरुपयोग के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यमों से किसानों तक मौसम, कृषि तकनीक, बाजार और सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से पहुंचाई जा सकती है, लेकिन भ्रामक सामग्री से नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को वास्तविक और छेड़छाड़ की गई तस्वीरों तथा डिजिटल सामग्री के बीच अंतर पहचानने के व्यावहारिक तरीके भी बताए।

महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की प्राध्यापिका डॉ. रंजीत जौहरी ने डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न मनोवैज्ञानिक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि लगातार मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से जुड़े रहने की आदत मानसिक स्वास्थ्य तथा दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। इससे बचने के लिए समय-समय पर डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाना आवश्यक है। उन्होंने डिजिटल माध्यमों से जुड़ी किसी परेशानी या संकट की स्थिति में परिवार के बुजुर्गों और विश्वसनीय व्यक्तियों से संवाद करने की सलाह भी दी।

ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में शामिल राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, हैदराबाद की डॉ. आकांक्षा शुक्ला ने गलत सूचना और जानबूझकर फैलाई जाने वाली भ्रामक सूचना के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने डिजिटल साक्षरता से जुड़े विधायी पहलुओं, तस्वीरों में छेड़छाड़ की पहचान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी परिवेश में डिजिटल साक्षरता केवल इंटरनेट और मोबाइल चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचनाओं की सत्यता परखने और तकनीक का सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है।

कानूनी विशेषज्ञ अनन्या मिश्रा ने ऑनलाइन माध्यम से साइबर अपराधों, डिजिटल मीडिया से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा भारतीय न्याय संहिता के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने प्रतिभागियों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग के दौरान कानूनी जिम्मेदारियों और सावधानियों से अवगत कराया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर विजय सिंह नेगी ने कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ साइबर अपराध और गलत सूचनाओं का प्रसार गंभीर चुनौती बन गया है। उन्होंने इन समस्याओं के प्रभावी और स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त उपाय विकसित नहीं हो पाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता बढ़ाकर ही समाज को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा सकता है।

कार्यशाला के प्रारंभ में अतिथियों का पौधयुक्त गमले और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यशाला की संयोजक डॉ. सृचना सचदेवा ने स्वागत संबोधन के साथ धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेंद्र नौटियाल ने किया।

इस अवसर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्राध्यापक डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल सहित जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!