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अंतरिक्ष से आए चमकते मेहमान ने ज्वालामुखी के विस्फोट को किया ‘फोटो-बॉम्ब’

For a split second, a fireball outshone the rivers of molten lava flowing from the Philippines’ most active volcano.

एक पल के लिए, आसमान से गिरे इस आग के गोले (Fireball) की चमक ने फिलीपींस के सबसे सक्रिय ज्वालामुखी से बहने वाली धधकते लावे की नदियों को भी फीका कर दिया।

लेखक: रॉबिन जॉर्ज एंड्र्यूज

सोमवार की रात जैसे ही फिलीपींस के लुजोन द्वीप पर अंधेरा छाया, देश का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी ‘मेयॉन’ (Mayon) प्रकृति का एक अद्भुत नजारा पेश कर रहा था। उसकी ढलानों पर धधकते लावे की नदियां बह रही थीं।

तभी स्थानीय समयानुसार रात ठीक 10:33 बजे, काले आसमान को चीरती हुई एक तेज रोशनी नीचे की ओर आई—पहले एक चमकती गेंद के रूप में और फिर एक चमकदार लकीर बनकर। कुछ पलों के लिए इस रोशनी ने मेयॉन ज्वालामुखी से उबलती चट्टानों और लावे की चमक को भी मात दे दी। फिर, जितनी तेजी से वह आया था, उतनी ही तेजी से ओझल हो गया। यह एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक पल था, जिसे कम से कम दो वेबकैमों ने लाइव कैद कर लिया।

फायरबॉल (आग के गोले)—जो कि दरअसल अंतरिक्षीय चट्टानों (Asteroids) या बर्फीले धूमकेतुओं (Comets) के जलते हुए टुकड़े होते हैं—कोई बहुत असामान्य घटना नहीं हैं। लेकिन किसी सक्रिय ज्वालामुखी के फटने के ठीक उसी पल, किसी फायरबॉल द्वारा उसे ‘फोटो-बॉम्ब’ करना वाकई बेहद दुर्लभ संयोग है।

“यह एक असाधारण और बेहद खूबसूरत संयोग का वीडियो है,” अलाबामा के हंट्सविले में नासा (NASA) के ‘मेटियोरॉइड एनवायरनमेंट ऑफिस’ के प्रमुख बिल कुक ने कहा। “कोई चाहे तो इसके लिए ‘अद्भुत’ शब्द का भी इस्तेमाल कर सकता है।”

इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हल की ज्वालामुखी वैज्ञानिक रेबेका विलियम्स कहती हैं, “मेरे लिए ज्वालामुखी विस्फोट से ज्यादा शानदार कुछ नहीं है।” लेकिन उन्होंने आगे जोड़ा, “प्रकृति की दो सबसे शक्तिशाली ताकतों का यह मिलन वाकई अद्भुत है।”

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जलते हुए उल्कापिंड ने आकार में छोटा होने के बावजूद बहुत बड़ा प्रभाव छोड़ा। मैरीलैंड की जॉन्स हॉपकिन्स एप्लाइड फिजिक्स लेबोरेटरी के ग्रह वैज्ञानिक और क्षुद्रग्रह विशेषज्ञ एंडी रिवकिन ने कहा, “उस विशालकाय ज्वालामुखी की चमक को एक पल के लिए महज़ एक ‘कॉफी कप’ के आकार की चीज ने पीछे छोड़ दिया।”

दिखने में विशाल, पर असल में क्या हुआ?

यह फुटेज जितना प्रभावशाली है, उतना ही थोड़ा भ्रामक भी है। देखने में ऐसा लग सकता है कि उल्कापिंड सीधे उस विशाल ज्वालामुखी से जा टकराया, लेकिन ऐसा नहीं था। असल में, यह पृथ्वी के वायुमंडल में काफी ऊंचाई पर ही जलकर पूरी तरह नष्ट और वाष्पीकृत (Vaporized) हो गया था।

वीडियो: फिलीपींस के धधकते ज्वालामुखी के ऊपर आसमान से गिरा फायरबॉल

अवधि: 0:29

लाइवस्ट्रीम वीडियो में सोमवार को फिलीपींस के सबसे सक्रिय ज्वालामुखी के ऊपर अंतरिक्ष से गिरता हुआ एक चमकदार फायरबॉल कैद हुआ।

क्रेडिट: फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी, वाया स्टोरीफुल

कनाडा की वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के उल्का भौतिकी वैज्ञानिक पीटर ब्राउन कहते हैं, “इस बात की संभावना बहुत कम है कि इसका कोई हिस्सा ज़मीन पर ‘उल्कापिंड’ (Meteorite) के रूप में बचा हो। इसके पीछे छूटे चमकदार धुएं के रास्ते (Trail) को देखकर मेरा यही मानना है कि यह हवा में ही पूरी तरह स्वाहा हो गया।”

मेयॉन का सुंदर और डरावना रूप

मेयॉन ज्वालामुखी—जो अपने सटीक शंक्वाकार (Symmetrical) आकार के लिए जाना जाता है—जितना खूबसूरत है, उतना ही डरावना भी। इसके विस्फोट से अक्सर पिघली चट्टानें और जहरीली गैसों का भयंकर सैलाब (Avalanche) आता है। मई की शुरुआत में ही इसके राख और धुएं के गुबार वाले विस्फोटों के कारण हजारों लोगों को सुरक्षित ठिकानों और आपातकालीन शिविरों की ओर भागना पड़ा था।

मेयॉन के इस रौद्र रूप को कई वेबकैमों के जरिए सुरक्षित दूरी से लाइव देखा जा रहा था, जिनमें से एक ‘afarTV’ का और दूसरा ‘फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी’ का कैमरा था। ज्वालामुखी संस्थान के कैमरे ने इस फायरबॉल को ब्लैक एंड व्हाइट (श्वेत-श्याम) में रिकॉर्ड किया, जबकि afarTV के कैमरे में यह एक रहस्यमयी हरे रंग के विस्फोट के रूप में कैद हुआ। यहां तक कि एक स्थानीय चश्मदीद ने तो इसे गलती से कोई मिसाइल समझ लिया था।

लावे से भी ज्यादा गर्म

इस फायरबॉल ने लावे की चमक को फीका कर दिया, जो कि विज्ञान के नजरिए से हैरान करने वाला नहीं है। मेयॉन से निकलने वाले लावे का तापमान लगभग 1,800 डिग्री फारेनहाइट (1,000 डिग्री सेल्सियस) होता है। लेकिन जब अंतरिक्ष की कोई चट्टान अत्यधिक गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो उसके सामने की हवा के दबाव (Compression) से पैदा होने वाला तापमान इससे कई हजार डिग्री ज्यादा गर्म होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बाहरी मेहमान के बारे में कई बातें अब भी रहस्य हैं। डॉ. ब्राउन ने कहा, “वीडियो में दिखने वाला गहरा हरा रंग संभवतः कैमरे का एक तकनीकी प्रभाव (Artifact) है।” इसका मतलब यह है कि इस रंग के आधार पर हम उल्कापिंड की रासायनिक संरचना का सटीक अंदाजा नहीं लगा सकते।

वायुमंडल में प्रवेश करते समय इस उल्कापिंड के व्यवहार से यह पता लगाया जा सकता है कि यह किसी क्षुद्रग्रह (Asteroid) से टूटा था या धूमकेतु (Comet) से। धूमकेतु के टुकड़े चट्टानी क्षुद्रग्रहों की तुलना में बहुत तेज गति से पृथ्वी की ओर आते हैं। लेकिन इसकी सटीक गति और दिशा का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों को अलग-अलग कोणों (Angles) से बने और वीडियो फुटेज की जरूरत होगी।

हमारी उत्पत्ति का गवाह

डॉ. रिवकिन के अनुसार, ज्वालामुखी और फायरबॉल के इस मेल ने सबसे ज्यादा “सौंदर्य और कलात्मक” दृष्टि से लोगों को आकर्षित किया है।

यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि भले ही ज्वालामुखी विस्फोट और उल्कापिंड बेहद विनाशकारी माने जाते हैं, लेकिन पृथ्वी पर हमारा अस्तित्व इन्हीं की वजह से है। डॉ. विलियम्स कहती हैं, “हमारे वायुमंडल और महासागरों के निर्माण के लिए हमें क्षुद्रग्रहों और ज्वालामुखियों का ही शुक्रिया अदा करना चाहिए।” क्षुद्रग्रह अपने साथ पानी लेकर आए, और ज्वालामुखियों ने गैसों और भाप को आसमान की ओर धकेल कर वायुमंडल बनाया। यहाँ तक कि जिस सूखी ज़मीन पर हम चलते हैं, वह भी प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों के लावे से ही बनी है।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा, देखा जाए तो यह नजारा बिल्कुल वैसा ही था, जैसी करोड़ों साल पहले हमारी शुरुआती पृथ्वी दिखती रही होगी।”

 

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