ब्लॉग

अमेरिका में राजनीतिक हिंसा – निशाने पर राष्ट्रपति

-उषा रावत
अमेरिकी इतिहास में राजनीतिक हिंसा कोई नई घटना नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी पुनरावृत्ति ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हालिया हमले की कोशिश ने इस कटु सत्य को फिर से उजागर किया है कि सत्ता के गलियारों में राजनीति अब एक जोखिम भरा क्षेत्र बन चुकी है। अमेरिकी इतिहास के पन्ने गवाह हैं कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन से लेकर जॉन एफ. केनेडी तक, चार राष्ट्रपतियों की पद पर रहते हुए हत्या की जा चुकी है। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस और यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के 45 राष्ट्रपतियों में से लगभग 10 पर सीधे हमले हुए हैं और यदि असफल साजिशों को शामिल किया जाए तो यह संख्या 30 को पार कर जाती है।

हिंसा की ऐतिहासिक जड़ें और वर्तमान का भयावह बदलाव
अमेरिका का जन्म क्रांतिकारी संघर्ष और गृहयुद्ध जैसी हिंसक घटनाओं के बीच हुआ था, लेकिन वर्तमान दौर की असुरक्षा ऐतिहासिक विरासत से कहीं अधिक गहरी और संस्थागत नजर आती है। 1960 के दशक के नस्लीय आंदोलनों के बाद आज का दौर शायद सबसे अधिक ध्रुवीकृत है। न केवल पूर्व स्पीकर नैंसी पेलोसी के पति पर हुआ हमला बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली छोटी-बड़ी हिंसक घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमले अब व्यक्तिगत नहीं बल्कि प्रतीकात्मक होते जा रहे हैं। आज राजनीतिक विरोधियों को शत्रु के रूप में पेश करने की बढ़ती प्रवृत्ति ने संवाद के स्थान पर प्रतिशोध की भावना को जन्म दिया है।

ध्रुवीकरण का अमानवीय चेहरा और वैचारिक टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में राजनीतिक बयानबाजी वास्तविक हिंसा से भी अधिक घातक रूप ले चुकी है। जब भाषा में तीखापन बढ़ता है, तो वह विरोधियों को ‘अमानवीय’ बनाने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। ‘द प्रॉसिक्यूशन प्रोजेक्ट’ के विश्लेषण के अनुसार, 1990 के बाद से अवैध राजनीतिक हिंसा में किसी एक विचारधारा का एकाधिकार नहीं रहा है। इसमें वामपंथी, दक्षिणपंथी और विभिन्न धार्मिक-वैचारिक समूह समान रूप से संलिप्त पाए गए हैं। यह रुझान स्पष्ट करता है कि हिंसा अब केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक विकृति बनती जा रही है।

सुरक्षा पर बढ़ता खर्च और संस्थानों की चुनौतियां
सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि व्हाइट हाउस संवाददाताओं के वार्षिक भोज जैसे आयोजनों में सीएनएन के वुल्फ ब्लिट्जर जैसे अनुभवी पत्रकारों ने इसे तीन दशकों में सबसे सख्त करार दिया है। अमेरिकी प्रशासन सुरक्षा पर भारी निवेश कर रहा है और 2024 तक सीक्रेट सर्विस का बजट लगभग 3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो 2010 की तुलना में दोगुना है। इसके बावजूद, केवल हथियारों और पहरेदारी से सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन होता जा रहा है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, 2023-24 के दौरान राजनीतिक धमकियों के मामलों में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

आर्थिक असमानता और डिजिटल दुष्प्रचार का प्रभाव
राजनीतिक अस्थिरता के पीछे गहरे आर्थिक और सामाजिक कारण भी छिपे हैं। अमेरिका में आय की असमानता तीन दशकों में अपने चरम पर है, जहाँ शीर्ष 1 प्रतिशत आबादी के पास देश की 32 प्रतिशत से अधिक संपत्ति है। आर्थिक असुरक्षा अक्सर जनता के भीतर गुस्से को जन्म देती है, जिसे सोशल मीडिया और षड्यंत्रकारी सिद्धांतों के माध्यम से राजनीतिक दिशा दे दी जाती है। 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल पर हुआ हमला इसी संचित आक्रोश और दुष्प्रचार का चरम बिंदु था, जिसमें 140 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। यह घटना साबित करती है कि आधुनिक युग में सूचना का गलत इस्तेमाल हिंसा की आग को भड़काने में ईंधन का काम करता है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भविष्य की राह
यह समस्या केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या जैसे मामलों ने साबित किया है कि राजनीतिक हिंसा एक वैश्विक संकट बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान केवल सुरक्षा बढ़ाने में नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व की भाषा और व्यवहार में सुधार करने में निहित है। जब शीर्ष नेता संयमित संवाद करते हैं, तो उसका प्रभाव समाज के निचले स्तर तक जाता है। यदि राजनीतिक ध्रुवीकरण इसी गति से बढ़ता रहा, तो समाज में ‘गृहयुद्ध जैसी मानसिकता’ पैदा होने का खतरा बना रहेगा।

संवाद और सुधार की अनिवार्यता
अमेरिका का अनुभव यह सिखाता है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और संवाद से तय होती है। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता राजनीतिक संवाद को मर्यादित करना, आर्थिक असमानता के खात्मे की दिशा में काम करना और सामाजिक सद्भाव को बहाल करना है। नफरत और विभाजन पर आधारित राजनीति का अंतिम परिणाम सदैव अस्थिरता ही होता है। समय रहते किए गए सुधारात्मक कदम ही अमेरिकी लोकतंत्र को इस हिंसा के साये से बाहर निकाल सकते हैं और दुनिया के अन्य लोकतंत्रों के लिए एक सकारात्मक मिसाल पेश कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!